
विजय वडेट्टीवार और प्रतिभा धानोरकर (सौजन्य-सोशल मीडिया)
Vijay Wadettiwar vs Pratibha Dhanorkar: कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार ने आलोचनात्मक रूप से कहा कि, प्रतिभा धानोरकर सिर्फ एक सांसद है, वह पार्टी की मालिक नहीं है। उन्होंने कहा कि पार्टी के मालिक पार्टी के कार्यकर्ता होते हैं।चंद्रपुर मनपा में सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरकर आने तथा यहां बहुमत के करीब आकर रुकी कांग्रेस को मनपा में सत्तासीन करने को लेकर कांग्रेस सांसद धानोरकर और विधायक वडेट्टीवार के बीच अंतर्द्वंद्व जारी है।
दोनों नेताओं ने अपने अपने समर्थक नवनिर्वाचित पार्षदों को अलग अलग स्थानों पर रखा है, कांग्रेस के यहां कुल 27 पार्षद निर्वाचित हुए है, जिनमें से वडेट्टीवार के खेमे में 15 जबकि धानोरकर के खेमे में 12 पार्षद है। अपने अपने समर्थित पार्षदों को दो गुटों में बांटने के इस घटनाक्रम ने जिले में वडेट्टीवार और धानोरकर के बीच के विवाद को और बढ़ावा देने का काम किया है। जिससे दोनों नेताओं की ओर से एकदूसरे के खिलाफ तीखी बयानबाजी शुरू है।
विजय वडेट्टीवार ने आलोचना करते हुए कहा कि, सांसद धानोरकर जल्दबाजी में बयानबाजी कर रही है, उन्हें संयम से काम लेने की जरूरत है। उन्होंने आरोप लगाया कि, उनकी अपनी पुत्री शिवानी को लोकसभा की टिकट देने के लिए जो लोग दिल्ली में पार्टी आलाकमान के पास आग्रह करने गए थे उन सबके प्रतिशोध स्वरूप मनपा चुनाव में 6 प्रत्याशियों का टिकट काटने का काम धानोरकर ने किया।
जिनका टिकट काटा गया उनमें से 2 पार्षद निर्दलीयों के तौर पर चुनकर आए हैं, ऐसे लोगों को दरकिनार कर पार्टी आगे नहीं बढ़ सकती। धानोरकर की इस कृति से पार्टी को नुकसान हुआ है, वरना चंद्रपुर मनपा में कांग्रेस की स्थिति और मजबूत होती थी।
उन्होंने कहा कि, प्रतिभा धानोरकर को राजनीति में आए 6 वर्ष हुए है, जबकि वे पिछले 25 वर्ष से इस जिले में नेतृत्व कर रहे है। उन्होंने कहा कि, उन्होंने किसी भी नवनिर्वाचित पार्षद को जबरन अपने पास नहीं बुलाया, वे सभी स्वेच्छा से उनके पास आए हैं। अतः पार्टी के पार्षद भगाकर ले जाने का धानोरकर द्वारा उनके खिलाफ लगाया गया आरोप बेबुनियाद है।
वडेट्टीवार ने यह भी आरोप लगाया कि, जो पार्षद धानोरकर के खेमे में है, उनमें से तीन चार को छोड़ कर अन्य सभी उनके खेमे में आने को तैयार है। उन्होंने धानोरकर पर पार्षदों को जबरन भगाकर ले जाने का आरोप लगाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि, चंद्रपुर मनपा में कांग्रेस को मिली सफलता के लिए धानोरकर समेत उनकी अपनी मेहनत भी रही है।
यह भी पढ़ें – कहीं पे निगाहें, कहीं पे निशाना! शिंदे की ‘कैद’ से पार्षद आजाद, होटल से निकलकर सीधे पहुंचे हाईकमान
पलटवार करते हुए सांसद धानोरकर ने चेतावनी दी कि, अगर पार्टी को सिर्फ वडेट्टीवार की ही बात माननी हो तो वे सब सामूहिक रूप से इस्तीफा देने को तैयार है। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि, मनपा चुनाव में कांग्रेस बहुमत के करीब पहुंचने की बात स्पष्ट होने के बाद जब वे अपने घर लौटी तो पार्टी के वरिष्ठ नेता वडेट्टीवार नवनिर्वाचित पार्षदों को भगाकर अन्यत्र ले गए। यह गलत था।
पार्षद कांग्रेस के चुनाव चिन्ह पर चुनकर आए थे, ऐसे में इस तरफ पार्षदों को 2 गुटों में बांटना अनुचित था। अगर ले जाना ही था तो सभी पार्षदों को ले जाना चाहिए था। उन्होंने वडेट्टीवार के खिलाफ भाजपा की बी टीम की सक्रियता का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि, भाजपा के सुधीर मुनगंटीवार के साथ मिलकर वडेट्टीवार कांग्रेस को कमजोर कर रहे है। उन्होंने कहा कि, वह इस क्षेत्र की सांसद है, अतः वडेट्टीवार को उनके कार्यक्षेत्र में हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है।






