
विजय वडेट्टीवार (सौजन्य-एक्स)
Chandrapur Municipal Election Result: चंद्रपुर शहर मनपा के चुनाव होते ही सत्तास्थापना के सपने संजोए जाने लगे। कांग्रेस के बाद भाजपा ने भी सत्ता का दावा किया। साथ ही कांग्रेस को हलके में लेते हुए बताया कि उन्हें भी हमारी तरह स्पष्ट बहुमत नहीं मिला। इस मनपा चुनाव में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और विधायक विजय वडेट्टीवार ने पूरी नजर रखी थी। सबसे पहले सत्ता स्थापना का दावा भी उन्होंने ही किया था।
इस बीच अब अपनी चाणक्य नीति का परिचय देते हुए वडेट्टीवार महापौर पद की चाबी लेकर अज्ञात स्थल रवाना होने की खबर है। बताया जाता है कि वडेट्टीवार के पास 15 से अधिक सदस्य है। कुल मिला कर वडेट्टीवार के एक दांव ने भाजपा के साथ शिवसेना यूबीटी को भी सांसत में डाल दिया है। अब केवल महापौर पद के आरक्षण का इंतजार है। जो दो दिनों में होने की उम्मीद जताई जा रही है।
चुनावी नतीजों बाद भाजपा नेता सुधीर मुनगंटीवार ने सत्ता स्थापना का अपना विकल्प खुला होने की बात जाहिर कर दी। हालांकि, इस चुनाव में उनके ही पार्टी के उनके विरोधी विधायक की अपेक्षा मुनगंटीवार को कम सफलता मिली है। जिससे मन ही मन वे मायूस बताए जाते हैं। कई बार नेता अपने किसी बयान या भूमिका को अपनी प्रतिष्ठा से जोड़ देते है। शिवसेना यूबीटी को कथित तौर पर किंगमेकर बताया जाने लगा।
उनसे हाथ मिला कर भाजपा सत्ता स्थापना का अपना दावा रख सकती है, ऐसी अटकलें भी तेज हो गयी। यहीं नहीं चर्चाओं में पार्षदों के रेट भी लगने लगे थे। राजनीतिक जानकारों की माने तो, इस बीच तेज तर्रार नेता वडेट्टीवार ने बाज की तरह अपने लक्ष्य को झपट कर महापौर पद के समूचे सूत्र ही अपने हाथ ले लिए। इसके लिए विजय वडेट्टीवार ने राज्य के वरिष्ठ नेताओं से बात भी की है।
कांग्रेस की सांसद प्रतिभा धानोरकर के पास भी 12 सदस्य महफूज हैं और वह भी कांग्रेस की सत्ता मनपा में बनाने में अपनी रणनीति के तहत काम कर रही है। वडेट्टीवार ने वरिष्ठों से सलाह लेकर ही इसमें कदम रखा है। जानकारों की माने तो उन्होंने सांसद को सहयोग की भूमिका ली है। बताया जाता है कि यदि सांसद धानोरकर सत्ता स्थापना के सारे गणित जोड़ने में सफल हुई तो वडेट्टीवार अपने साथ के सदस्य उन्हें सौंपने को तैयार है।
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कुछ घंटों तक शिवसेना यूबीटी को किंगमेकर बताया जा रहा था। दलित वोटों के अच्छे ट्रांसफर से शिवसेना को बेहतरीन सफलता मिली। कांग्रेस और भाजपा के पास स्पष्ट बहुमत न होने से दोनों दल अपने पास आएंगे, ऐसा शिवसेना को लग रहा था और राज्य में कांग्रेस के मित्रदल होने के बाद भी शिवसेना ने अपने विकल्प खुले कर दिये थे, परंतु अब जैसे ही वडेट्टीवार और धानोरकर ने पेंच डाला है, शिवसेना ने भूमिका नहीं बदली तो राजनीतिक हानि की संभावना भी जानकारों ने जताई है।






