547 ग्राम पंचायतों में मनरेगा के काम ठप,ग्राम रोजगार सहायकों का आंदोलन जारी, लंबित मांगों पर आक्रामक

MNREGA: भंडारा जिले की ग्राम रोजगार सहायक संगठना ने 25 अगस्त से कामबंद आंदोलन शुरू किया है। पिछले पखवाड़े से चल रहे इस आंदोलन के चलते जिले की 547 ग्राम पंचायतों में मनरेगा के सभी कार्य ठप हो गए हैं।
547 ग्राम पंचायतों में मनरेगा के काम ठप
547 ग्राम पंचायतों में मनरेगा के काम ठप (सौजन्यः सोशल मीडिया)
Published on
Updated on

Bhandara News: भंडारा जिले की ग्राम रोजगार सहायक संगठना ने 25 अगस्त से कामबंद आंदोलन शुरू किया है। पिछले पखवाड़े से चल रहे इस आंदोलन के चलते जिले की 547 ग्राम पंचायतों में मनरेगा के सभी कार्य ठप हो गए हैं। ग्राम रोजगार सहायकों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला है।

उनकी प्रमुख मांगों में 3 अक्टूबर 2024 के निर्णय को लागू करना, 11 महीने का संशोधित मानधन प्रदान करना, कामगारों को पूर्णकालिक दर्जा देना, 2016 से लंबित अल्पाहार व यात्रा भत्ता जारी करना तथा 8 मार्च 2021 के अनुसार प्रोत्साहन मानधन का भुगतान करना शामिल है।

भीख मांगों आंदोलन करेंगे

ग्राम रोजगार सहायक गांवों में रोजगार गारंटी योजना के क्रियान्वयन में अहम भूमिका निभाते हैं। प्रत्येक ग्राम पंचायत में मनरेगा के जरिए गरीब और सीमित साधनों वाले लाभार्थियों को रोजगार उपलब्ध कराया जाता है। लेकिन, योजना लागू कराने वाले इन सहायकों की समस्याओं की अनदेखी लंबे समय से की जा रही है। इससे नाराज होकर सहायकों ने आंदोलन को तेज करने का निर्णय लिया है।

आंदोलन के जिला अध्यक्ष सेवकराम नागफासे ने बताया कि प्रशासन पिछले पखवाड़े से चल रहे आंदोलन की ओर बिल्कुल ध्यान नहीं दे रहा है। इस कारण आंदोलन की प्रखरता और अधिक बढ़ाई जाएगी। इसी के तहत 11 सितम्बर को सुबह 11 बजे पंचायत समिति भंडारा से दोपहर 3 बजे तक जिला परिषद भंडारा तक सभी ग्राम रोजगार सहायक "भीख मांगो आंदोलन" करेंगे। इस अनोखे आंदोलन के जरिए प्रशासन का ध्यान अपनी मांगों की ओर आकर्षित किया जाएगा।

आंदोलन और भी तीव्र होगा

संगठना ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने उनकी मांगों पर जल्द ही सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो 15 सितम्बर को नागपुर स्थित मनरेगा आयुक्तालय पर राज्यव्यापी आंदोलन परिवार सहित किया जाएगा।ग्राम रोजगार सहायकों के आंदोलन से मनरेगा के कामकाज पूरी तरह ठप्प हो चुके हैं। प्रशासन ने अगर तत्काल हस्तक्षेप नहीं किया तो इसका व्यापक असर जिलेभर में पड़ेगा। सहायकों का कहना है कि लंबे समय से मानधन और भत्ते न मिलने से उनका मनोबल टूट रहा है और कामकाज प्रभावित हो रहा है।

इसलिए आवश्यक है कि शासन 3 अक्टूबर 2024 के निर्णय के अनुसार मानधन का भुगतान करे, लंबित भत्तों की राशि जारी करे, सहायकों को पूर्णकालिक दर्जा प्रदान करे और 2011 के निर्णयानुसार कार्रवाई के अधिकार मुख्य कार्यपालन अधिकारी को सौंपे। तभी मनरेगा की गति फिर से बहाल हो सकेगी।

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com