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19 वर्षों से उप जिला अस्पताल की प्रतीक्षा, हजारों मरीज आज भी रेफर टू भंडारा पर निर्भर
Lakhandur Hospital Issue: लाखांदुर उप जिला अस्पताल की मंजूरी 19 वर्षों से लंबित है। स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी, 59 रिक्त पदों और लगातार ‘रेफर टू भंडारा’ के कारण मरीज परेशान हैं।
- Written By: आंचल लोखंडे

19 वर्षों से उप जिला अस्पताल की प्रतीक्षा
Bhandara District News: ग्रामीण क्षेत्र के हजारों मरीजों के लिए वर्ष 2006 में लाखांदुर में ग्रामीण अस्पताल शुरू किया गया था। लेकिन आवश्यक दवाई और उपचार सुविधाओं के अभाव के कारण गंभीर मरीजों को आज भी नियमित रूप से जिला अस्पताल में रेफर किया जा रहा है। इसलिए तहसील के मरीज और नागरिक लंबे समय से इस अस्पताल को उप जिला अस्पताल का दर्जा देने की मांग कर रहे हैं। किंतु सरकार और स्वास्थ्य प्रशासन की लगातार अनदेखी के चलते तहसीलवासी पिछले 19 वर्षों से मंजूरी की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
लाखांदुर तहसील, जो भंडारा जिले में शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं के मामले में अंतिम पायदान पर है, यहां नागरिकों में वर्षों से असंतोष देखा जा रहा है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और नागरिकों द्वारा स्वास्थ्य विभाग में आवश्यक कर्मियों की भर्ती और पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग भी बार-बार की गई, लेकिन इस पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
4 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और 1 ग्रामीण अस्पताल
तहसील में वर्तमान में 4 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और 1 ग्रामीण अस्पताल संचालित हैं। इसके अलावा 26 स्वास्थ्य उपकेंद्र भी कार्यरत हैं। फिर भी स्वास्थ्य अधिकारियों और कर्मियों की कमी के कारण मरीजों को उपचार के दौरान लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
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स्वास्थ्य केंद्रों में 59 पद रिक्त
प्राप्त जानकारी के अनुसार तहसील के 4 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र-दिघोरी/मो., बारव्हा, सरांडी (बु) और कूड़ेगांव-के अंतर्गत कुल 195 पद स्वीकृत हैं, जिनमें से 59 पद रिक्त हैं।
प्रमुख रिक्त पद इस प्रकार हैं:
- स्वास्थ्य अधिकारी (गट-अ): 3 पद
- आयुर्वेदिक/एंग्लो (गट-ब): 2 पद
- स्वास्थ्य सहायिका (ठेका): 2 पद
- दवाई निर्माण अधिकारी (दिघोरी/मो.): 1 पद
स्वास्थ्य सेवक: 3 पद
- स्वास्थ्य सेवक (राज्य): 2 पद
- स्वास्थ्य सेविका (ओपीडी व उपकेंद्र): 16 पद
- स्वास्थ्य सेविका (ठेका): 4 पद
- चपरासी: 13 पद
- सफाई कर्मचारी: 2 पद
- कार्यक्रम सहायक: 1 पद
- स्वास्थ्य सहायिका (ठेका): 2 पद
- सीएचओ: 6 पद
रिक्त पदों के कारण स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता लगातार प्रभावित हो रही है।
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कब रुकेगा ‘रेफर टू’ का दौर?
ग्रामीण अस्पताल में आकस्मिक तथा गंभीर मरीजों को भर्ती तो किया जाता है, लेकिन सुविधाओं के अभाव में अधिकांश मरीजों को “रेफर टू भंडारा” किया जाना पड़ता है। इससे मरीजों और परिजनों को आर्थिक व मानसिक दोनों प्रकार की परेशानी झेलनी पड़ती है।
स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों का कहना है कि यदि लाखांदुर को उप जिला अस्पताल का दर्जा मिल जाए, तो गंभीर मरीजों को भंडारा रेफर करने का सिलसिला काफी हद तक रुक जाएगा। लेकिन 19 वर्षों से मांग लंबित रहने से नागरिकों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
Lakhandur up zilla hospital approval delay 19 years health services crisis
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