'ट्रंप ने मिसाइलें दागीं, हम डॉलर देंगे', ईरान के जख्मों पर चीन का बड़ा मरहम; सीधे खातों में जाएगा पैसा

China Iran School Attack: ईरान के गर्ल्स स्कूल पर हुए भीषण अमेरिकी मिसाइल हमले में 165 छात्राओं की मौत के बाद चीन ने पीड़ित परिवारों के लिए 1.84 करोड़ रुपये की सीधी आर्थिक सहायता का ऐलान किया है।
'Trump Fired Missiles, We Will Provide Dollars': China Offers Major Balm for Iran's Wounds Funds to Go Directly into Accounts
चीन ने ईरान के पीड़ितों के लिए खोला खजाना, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
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China Aid Iranian Schoolgirls Attack Victims: ईरान और अमेरिका के बीच जारी भीषण युद्ध के बीच एक ऐसी मानवीय त्रासदी सामने आई है जिसने पूरी दुनिया की अंतरात्मा को झकझोर कर रख दिया है। ईरान के दक्षिणी हिस्से में स्थित मिनाब गर्ल्स स्कूल पर हुए एक विनाशकारी मिसाइल हमले में 165 स्कूली छात्राओं समेत कुल 185 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई है। इस हृदयविदारक घटना के बाद, जहां एक ओर अमेरिका आरोपों के घेरे में है, वहीं चीन ने ईरान के जख्मों पर मरहम लगाने के लिए बड़ा कदम उठाया है।

सीधे खातों में पहुंचेगा पैसा

बीजिंग ने इस त्रासदी पर केवल शोक संवेदना व्यक्त नहीं की बल्कि एक ठोस संदेश देते हुए पीड़ित माता-पिता के लिए 2,00,000 डॉलर (करीब 1.84 करोड़ रुपये) की सीधी आर्थिक सहायता का ऐलान किया है। चीनी विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि 'ट्रंप ने मिसाइलें दागी हैं, लेकिन हम डॉलर देंगे।' यह राशि चीनी रेड क्रॉस सोसाइटी के माध्यम से उन माता-पिता के खातों में सीधे ट्रांसफर की जाएगी जिन्होंने इस हमले में अपनी बेटियों को खो दिया है।

अमेरिकी 'तकनीकी गलती' ने ली मासूमों की जान?

इस हमले को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारी विवाद खड़ा हो गया है। एक चौंकाने वाली जांच रिपोर्ट और 'न्यूयॉर्क टाइम्स' के दावों के मुताबिक, यह हमला किसी जानबूझकर की गई दुश्मनी का परिणाम नहीं, बल्कि अमेरिकी सेना की एक 'भयानक तकनीकी गलती'थी। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी खुफिया एजेंसी (DIA) ने पुराने डेटा के आधार पर टारगेट कोडिंग की थी, जिसमें गलती से इस प्राइमरी स्कूल को 'मिलिट्री टारगेट' मार्क कर दिया गया था। इसी घातक चूक की वजह से अमेरिकी टॉमहॉक मिसाइल सीधे उस स्कूल पर जा गिरी जहां मासूम बच्चियां पढ़ रही थीं।

चीन का कड़ा रुख

चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने इस हमले को 'मानवीय संवेदनाओं की मर्यादा और अंतरराष्ट्रीय कानून का सबसे गंभीर उल्लंघन' करार दिया है। चीन ने इस संकट की घड़ी में स्पष्ट रूप से ईरान के साथ खड़े होने का संकेत दिया है। दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इन सवालों का जवाब देने से बचते नजर आ रहे हैं और उन्होंने यह तर्क भी दिया कि संभवतः ईरान की अपनी ही कोई मिसाइल गलती से स्कूल पर गिर गई होगी।

आर्थिक मंदी के बीच अमेरिका की मुश्किल

यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी अर्थव्यवस्था भी चुनौतियों का सामना कर रही है। आंकड़ों के अनुसार, चौथी तिमाही में अमेरिकी GDP की वृद्धि दर केवल 0.7% रही है, जो कि 1.4% के अनुमान से लगभग आधी है। कम निवेश और घटते खर्च के बीच, इस तरह की सैन्य विफलताओं ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर अमेरिका की छवि और उसकी रणनीतिक सटीकता पर गंभीर सवालिया निशान लगा दिए हैं।

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