गुढ़री में पात्र किसान मुआवजे से वंचित, कृषि सहायक पर भड़के किसान, फर्जी पंचनामा करने का आरोप

Bhandara News: गुढ़री क्षेत्र में बारिश से धान की फसल बर्बाद हुई, लेकिन किसानों का आरोप है कि कृषि विभाग ने गलत पंचनामा किया, जिससे पात्र किसान मुआवजे से वंचित रह गए और अपात्रों को लाभ मिला।
गुढ़री में पात्र किसान मुआवजे से वंचित, कृषि सहायक पर भड़के किसान, फर्जी पंचनामा करने का आरोप
गुढ़री में पात्र किसान मुआवजे से वंचित (फाइल फोटो)
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Farmers Are Furious At The Agricultural Assistant: साकोली तहसील के गुढ़री क्षेत्र में सितंबर महीने में हुई भारी बारिश और मावा-तुड़तुड़ा के प्रकोप से धान की फसल बड़े पैमाने पर बर्बाद हो गई। हालांकि, स्थानीय किसानों का आरोप है कि कृषि विभाग की ओर से नुकसान का पंचनामा करते समय गलत सर्वेक्षण किए जाने के कारण पात्र किसान मदद से वंचित रह गए।

गुढरी में कृषि सहायक ने बिना कोई सूचना लिए या सोशल मीडिया पर जानकारी दिए नुकसान का पंचनामा कर दिया। उस समय, बांध पर एक भी किसान से न मिलने की बात कहकर यह निष्कर्ष निकाला गया कि गुढरी परिसर में कोई नुकसान नहीं हुआ है। अगले दिन जैसे ही किसानों को इसकी जानकारी मिली, उन्होंने खेत का भौतिक निरीक्षण करके पंचनामा करने पर जोर दिया।

गुढ़री में फर्जी पंचनामा का आरोप

हालांकि, संबंधित अधिकारी ने आनाकानी की और कोई भी किसान मापदंड पर खरा नहीं उतरता का हवाला देते हुए पंचनामा न करने का फैसला किया। इसके विपरीत, यह बात सामने आई है कि कुछ अपात्र किसानों ने अक्टूबर महीने में भारी बारिश के मुआवजे का लाभ फर्जी पंचनामा दिखाकर प्राप्त कर लिया। इस अन्यायपूर्ण निर्णय के कारण, जिन किसानों को वास्तव में नुकसान हुआ था, उन्हें एक पैसा भी नहीं मिला। इससे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर संदेह पैदा हो रहा है और किसानों ने गुढ़री के कृषि सहायक के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

फर्जी पंचनामा करने का आरोप

गुढ़री क्षेत्र के अधिकांश किसान मध्यम और लघु श्रेणी के हैं। यहां कोई सिंचाई परियोजना न होने के कारण फसलें पूरी तरह से बारिश पर निर्भर हैं। हल्की किस्म के 115 से 120 दिन पुराने धान पर पहले बोरर और फिर भुनगा कीट का हमला हुआ। इसके बाद हुई भारी बारिश ने फसलें बर्बाद कर दीं। किसानों की सारी मेहनत पानी में बह गई।

पीड़ित किसानों ने आरोप लगाया कि जब हम मदद की उम्मीद कर रहे थे, तब फर्जी पंचनामा बनाकर हमारे अधिकार छीन लिए गए। साकोली तहसील से लाखनी तहसील में विभाजन के बाद नीलागोंदी गांव की लगभग 35 प्रतिशत कृषि गुढ़री सीमा में आती है। हालांकि, इन किसानों को जानकारी न दिए जाने के कारण वे सरकारी योजनाओं से वंचित रह जाते हैं।

कृषि सहायकों की निष्क्रियता और सुस्ती के कारण नीलागोंदी के किसान भी योजनाओं से वंचित रह रहे हैं। किसानों की मांग है कि गुढ़री में पंचनामों की पुनः जांच की जाए और पात्र किसानों को तत्काल सहायता प्रदान की जाए, और संबंधित कृषि सहायक के विरुद्ध विभागीय जांच कर कार्रवाई की जाए।

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