
विज्ञान प्रयोगशाला (AI Generated Image)
Bhandara School Science Lab: एक तरफ दुनिया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में लंबी छलांग लगा रही है, वहीं भंडारा जिले के ग्रामीण क्षेत्रों के हजारों छात्रों का विज्ञान आज भी किताबों के पन्नों तक ही सीमित है।
यूडाइस प्लस 2024-25 के ताजा आंकड़ों के अनुसार, जिले के माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्तर के लगभग 20 से 22 प्रतिशत स्कूलों में अभी भी अपनी स्वतंत्र विज्ञान प्रयोगशाला उपलब्ध नहीं है। संसाधनों के इस अभाव के कारण छात्रों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने और व्यावहारिक ज्ञान देने में बड़ी बाधाएं उत्पन्न हो रही हैं।
जिले के सातों तहसीलों में प्रयोगशालाओं की उपलब्धता को लेकर भारी असमानता दिखाई देती है। जिले में कुल 1,291 स्कूल हैं, लेकिन आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार केवल 485 स्कूलों में ही विज्ञान प्रयोगशालाएं दर्ज हैं।
| तहसील | स्कूल | विज्ञान प्रयोगशाला | आईसीटी लैब | अटल टिंकरिंग लैब |
|---|---|---|---|---|
| भंडारा | 228 | 94 | 08 | 02 |
| तुमसर | 245 | 87 | 07 | 01 |
| साकोली | 165 | 68 | 06 | 01 |
| पवनी | 172 | 62 | 05 | 01 |
| लाखनी | 170 | 61 | 04 | 01 |
| मोहाडी | 163 | 59 | 05 | 01 |
| लाखांदुर | 148 | 54 | 04 | 00 |
| कुल योग | 1,291 | 485 | 39 | 07 |
आंकड़े बताते हैं कि भंडारा और तुमसर में स्थिति तुलनात्मक रूप से बेहतर है, लेकिन लाखांदुर और मोहाडी जैसे ग्रामीण क्षेत्रों में हालात चिंताजनक हैं। विशेष रूप से लाखांदुर तहसील के एक भी स्कूल में अटल टिंकरिंग लैब जैसी आधुनिक अनुसंधान सुविधा उपलब्ध नहीं है। शिक्षा के अधिकार कानून और माध्यमिक शिक्षा नीति के तहत कक्षा 9वीं से 12वीं तक के हर स्कूल में सुसज्जित प्रयोगशाला अनिवार्य है।
इसके बावजूद, जिले के लगभग 105 से 125 माध्यमिक स्कूलों में प्रयोगों के लिए अलग कमरा तक नहीं है। फंड की कमी या जगह के अभाव का हवाला देकर इन स्कूलों में रसायन विज्ञान की अभिक्रियाएं हों या जीव विज्ञान की जटिल संरचनाएं, सब कुछ ब्लैकबोर्ड पर बनी आकृतियों के सहारे सिखाया जा रहा है।
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भंडारा जिले के केवल 39 स्कूलों में ही आईसीटी लैब्स कार्यरत हैं। इसका अर्थ है कि शेष स्कूलों के छात्र आज भी इंटरनेट और कंप्यूटर के बुनियादी ज्ञान से वंचित हैं। सबसे अधिक कठिनाई बोर्ड की व्यावहारिक (प्रैक्टिकल) परीक्षाओं के समय होती है।
जिन स्कूलों में लैब नहीं है, वहां के छात्रों को सीधे परीक्षा के दिन ही प्रयोगशाला का चेहरा देखने को मिलता है। शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि जिन्होंने साल भर टेस्ट ट्यूब या सूक्ष्मदर्शी (माइक्रोस्कोप) हाथ में नहीं पकड़ा, वे सीधे परीक्षा में प्रयोग कैसे सफल कर सकते हैं?
यद्यपि सरकार के समग्र शिक्षा अभियान के तहत प्रयोगशालाओं के लिए धन आवंटित किया जाता है, लेकिन यह सभी जरूरतमंद स्कूलों तक नहीं पहुंच पा रहा है। नीति आयोग की अटल टिंकरिंग लैब योजना के तहत जिले में केवल 7 लैब्स का होना प्रशासन की सुस्ती को दर्शाता है।
यदि ग्रामीण छात्रों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में टिकना है, तो जिले में प्रयोगशालाओं का जाल बिछाना और मोबाइल लैब्स (भ्रमणकारी प्रयोगशाला) जैसी व्यवस्था करना समय की मांग है।






