चावल बाजार से मैगनीज खदान तक.., कुबेर नगरी की पहचान खो रहा तुमसर, गौरवशाली रहा इतिहास

Tumsar City History: 1867 में स्थापित ‘कुबेर नगरी’ तुमसर का ऐतिहासिक गौरव फीका पड़ रहा है। चावल बाजार, रेलवे, खदानों और शहरी नियोजन की पहचान आज संकट में।
Tumsar City History: 1867 में स्थापित ‘कुबेर नगरी’ तुमसर का ऐतिहासिक गौरव फीका पड़ रहा है। चावल बाजार, रेलवे, खदानों और शहरी नियोजन की पहचान आज संकट में।
भंडारा न्यूज
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Tumsar Manganese Mine: तुमसर शहर का नाम निश्चित रूप से उन शहरों में से एक है जो वैनगंगा नदी के तट पर विकसित हुआ था, जो खनिज युक्त पूर्व विदर्भ की जीवनदायिनी है। तुमसर को कुबेर नगरी के नाम से जाना जाता था। ऐसा माना जाता है कि तुमसर नाम इन क्षेत्रों की झीलों में पाए जाने वाले तुम नाम मछली के नाम से रखा गया था।

शहर मराठा शासन के दौरान फला-फूला एवं अंग्रेजों की आजादी तक भंडारा जिले में चावल का एक बहुत ही महत्वपूर्ण बाजार था। 1867 में स्थापित शहर की आबादी उस समय 7,604 थी, जो उस समय बहुत बड़ी थी, लेकिन संपन्न अनाज बाजार के कारण शहर में बारिश के मौसम को छोड़कर वर्ष के 8 महीनों के दौरान 10,000 से 12,000 लोगों की आबादी हुआ करती थी।

  • 1867 में हुई शहर की स्थापना
  • 7,604 थी शुरुआत में आबादी

अनाज के अलावा मिलते थे सूती व रेशमी वस्त्र

यहां केवल चावल ही नही बल्कि गेहूं, कपास एव लगभग सभी प्रकार के अनाज छत्तीसगढ़ से शहर में थोक बिक्री के लिए आते थे। उस समय भारत के अन्य शहर बहुत ही अनियोजित एवं अनियंत्रित थे, लेकिन लाल मुरमाड की भूमि पर स्थित तुमसर में चौड़ी सड़कें थीं। व्यापारियों के पास विशाल हवेली व सुंदर अमराई थी। उस दौरान स्वच्छता व साफ-सफाई के कारण लोगो का स्वास्थ्य अच्छा रहता था। हालाँकि कुछ कुओं में खारा पानी था, लेकिन पीने योग्य पानी के बड़े कुओं ने शहर व बाजार की प्यास बुझा दी थी। शहर में अनाज के अलावा सूती व रेशमी वस्त्र भी पाए जाते थे। बैल गाड़ियां व उनके भंवर भी यहां बनाए जाते थे।

140 वर्ष पूर्व पहली ट्रेन आयी थी तुमसर

ब्रिटिश सरकार इस बाजार का लाभ उठाना चाहती थी। इस कारण नागपुर-छत्तीसगढ़ रेलवे कंपनी ने नागपुर-कलकत्ता रेलवे लाइन का निर्माण करते हुए पहली ट्रेन को 6 अप्रैल 1880 को तुमसर के पास लाई थी। दूसरे चरण में तुमसर-तिरोडा का उदघाटन 21 फरवरी, 1881 को किया गया था।

इसे बाद में केवल 8 वर्षों में बंगाल-नागपुर रेलवे कंपनी की ओर से रेल लाइन को चौड़ा किया गया। यहां दिलचस्प बात यह है कि इस पश्चिम की ओर जाने वाले मार्ग को नागपुर-भंडारा के बाद केवल तुमसर बाजार के लिए उत्तर की ओर मोड़ दिया गया था, लेकिन नदी का तल तुमसर शहर के पश्चिम की ओर बहुत चौड़ा है।

इसलिए यह रेल लाइन शहर से 5 किमी दूर है एव तुमसर रोड में स्टेशन का निर्माण कार्य किया गया था। इस स्टेशन के निर्माण के दौरान, बंगाली मजदूरों ने रेलवे लाइन के किनारे कालीमाता मंदिर का निर्माण किया था, जो स्टेशन के बीच में  रेलवे लाइन के साथ मौजूद है, जो देश में दुर्लभ है।

100 वर्ष पूर्व शुरू हुई मैगनीज की पहली खदान

इसके पश्चात वर्ष1883 में बालाघाट जिले के ब्रिटिश डिप्टी कलेक्टर कर्नल ब्लूमफील्ड ने आम्बागढ़ किले के पास मैंगनीज जमा की खोज की थी। 1893 में पी।एन। दत्ता की ओर से इसका अध्ययन किया गया। पहली मैंगनीज खदान 1901 में शुरू की गई।इसके बाद कई खदानों को शहर के 30 किमी के दायरे में शुरू किया गया।

1906-07 के दौरान जम्बन व सेई नामक कम्पनी के पास सेंट्रल इंडिया माइनिंग कंपनी की निजी तौर पर मालकियत थी। उन्होंने मैंगनीज परिवहन के लिए  तुमसर से मध्य प्रदेश के तिरोड़ी-कटंगी तक नैरोगेज ट्राम मार्ग का निर्माण किया।वह वर्ष 1916 में भारत सरकार की ओर से खरीदा गया। 1929 में तुमसर-तिरोड़ी मार्ग ब्रॉडगेज किया गया। शेष मार्ग को बंद किया गया। इन मैगनीज खदानों के कारण तुमसर केवल देश में नही बल्कि दुनिया में भी प्रसिद्ध हो गया था।

बावनथड़ी से हो रही सिंचाई

आजादी के पूर्व क्षेत्र के किसान प्राकृतिक पानी पर निर्भर थे। इस कारण प्रत्येक वर्ष किसानों की सैकडों एकर खेती बंजर रहती थी। लेकिन बावनथड़ी परियोजना का कार्य पूर्ण होने के बाद तहसील के 85 गांवो के 27 हजार 708 हैक्टेयर कृषि क्षेत्र में फसलों की सिंचाई हो रही है।

तहसील में चांदपुर, गायमुख, नरसिंह पहाड़ी माड़गी, अम्बागढ़ का किला आदि पर्यटन स्थल आजादी के पूर्व काफी अविकसित थे।लेकिन वर्तमान में कुछ हद तक विकसित हुए हैं। अभी भी काफी विकास होना शेष है। इस ओर प्रशासन की ओर से ध्यान देने की आवश्यकता है।

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