

Bhandara Ordnance Factory Blast: स्थानीय आयुध निर्माणी में हुए भीषण विस्फोट मामले में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने सख्त रुख अपनाते हुए कारखाना प्रशासन के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई के आदेश दिए हैं। गत वर्ष 24 जनवरी को हुई इस दुर्घटना में नौ श्रमिकों की मौत हो गई थी, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हुए थे।
एनजीटी ने स्पष्ट किया है कि विस्फोटक इकाई में सुरक्षा के बुनियादी नियमों का पालन नहीं किया गया, जिसके कारण यह हादसा हुआ। पुणे स्थित एनजीटी की पश्चिमी क्षेत्रीय पीठ ने सोमवार को दिए गए विस्तृत आदेश में भंडारा आयुध निर्माणी का संचालन करने वाली म्युनिशन्स इंडिया लिमिटेड (एमआईएल) को इस दुर्घटना के लिए जिम्मेदार ठहराया है।
पीठ में न्यायमूर्ति दिनेश कुमार सिंह तथा विशेषज्ञ सदस्य सुजीत कुमार वाजपेयी शामिल थे। न्यायाधिकरण ने कहा कि सेना के लिए उच्च गुणवत्ता वाले विस्फोटक तैयार करने वाले इस अत्यंत संवेदनशील औद्योगिक प्रतिष्ठान में सुरक्षा नियमों का गंभीर उल्लंघन हुआ है।
24 जनवरी 2025 को सुबह करीब 10.40 बजे आयुध निर्माणी के पीई-23 भवन में स्थित लो-टेम्परेचर प्लास्टिक एक्सप्लोसिव (एलटीपीई) विभाग में अचानक जोरदार विस्फोट हुआ था। विस्फोट इतना तीव्र था कि इमारत की छत उड़ गई और पूरी संरचना ढह गई। इस हादसे में 13 श्रमिक मलबे में दब गए, जिनमें से आठ की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि गंभीर रूप से घायल एक श्रमिक ने 28 फरवरी को उपचार के दौरान दम तोड़ दिया।
औद्योगिक सुरक्षा एवं स्वास्थ्य संचालनालय द्वारा प्रस्तुत शपथपत्रों के आधार पर एनजीटी ने पाया कि कारखाने में मानक कार्यप्रणाली (एसओपी) का पालन नहीं किया गया था। विशेष रूप से एडियाबैटिक कंप्रेशन से विस्फोट की आशंका को रोकने के लिए आवश्यक सामग्री-घनीकरण रोकथाम प्रणाली उपलब्ध नहीं थी। इसे न्यायाधिकरण ने गंभीर लापरवाही करार दिया।
इसके अलावा यह भी सामने आया कि अत्यंत जोखिमपूर्ण कार्यों में दो ऐसे ट्रेड अप्रेंटिस लगाए गए थे, जिन्हें इस प्रकार के कार्य का आवश्यक प्रशिक्षण नहीं था। कानून के तहत अप्रशिक्षित कर्मियों को ऐसे खतरनाक कार्यों में नियुक्त करना प्रतिबंधित है। इन तथ्यों के आधार पर एनजीटी ने माना कि म्युनिशन्स इंडिया लिमिटेड ने कारखाना अधिनियम, 1948 की धारा 7ए(1) का स्पष्ट उल्लंघन किया है।
एनजीटी ने भंडारा जिलाधिकारी को निर्देश दिए हैं कि केंद्र सरकार की आवश्यक अनुमति प्राप्त कर कारखाने के संचालन के लिए जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
एमआईएल ने अपने जवाब में दावा किया था कि कारखाना परिसर में किसी बड़े पर्यावरणीय नुकसान की स्थिति नहीं बनी। साथ ही यह भी बताया गया कि मृत एवं घायल श्रमिकों के परिवारों को मुआवजा, अनुग्रह राशि तथा अनुकंपा के आधार पर रोजगार प्रदान किया गया है। मृत श्रमिकों के परिजनों को प्रति परिवार 25 लाख रुपये की अनुग्रह राशि और अतिरिक्त 25 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी गई है, जबकि घायलों का संपूर्ण चिकित्सा व्यय भी वहन किया गया है।
हालांकि एनजीटी ने स्पष्ट किया कि मुआवजा दिए जाने से सुरक्षा नियमों के उल्लंघन को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। न्यायाधिकरण ने निर्देश दिए हैं कि सभी सुधारात्मक सुरक्षा उपाय पूरी तरह लागू होने तक विस्फोटग्रस्त प्लांट में दोबारा काम शुरू नहीं किया जाएगा।
इस मामले में महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल (एमपीसीबी) को भी जिम्मेदार ठहराया गया है। विस्फोट के बाद किए गए वायु गुणवत्ता परीक्षण में प्रदूषण स्तर अनुमेय सीमा से अधिक पाया गया था। इसी के चलते 25 फरवरी 2025 को विस्फोटग्रस्त प्लांट को बंद रखने के आदेश दिए गए थे, जो अब भी प्रभावी हैं।
मामले का निपटारा करते हुए एनजीटी ने सख्त शब्दों में कहा कि यह घटना केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि देश के अत्यंत संवेदनशील औद्योगिक प्रतिष्ठानों में मौजूद प्रणालीगत सुरक्षा खामियों का संकेत है। भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कड़े अनुपालन और स्पष्ट जवाबदेही तय करना आवश्यक है।