नहर मरम्मत को चाहिए 66 करोड़, जमीनी कार्य शुरू होने में अभी करना होगा इंतजार

Bhandara Canal Repair: उपसा सिंचाई परियोजना की 16.5 किमी मुख्य नहर जर्जर हालत में है। मरम्मत के लिए 66 करोड़ का प्रस्ताव सरकार को भेजा गया है। मंजूरी के बाद ही कार्य शुरू होगा।
नहर मरम्मत को चाहिए 66 करोड़
नहर मरम्मत को चाहिए 66 करोड़ (सौजन्यः सोशल मीडिया)
Published on
Updated on

Bhandara News: उपसा सिंचाई परियोजना की मुख्य नहर का निर्माण लगभग 25 से 30 वर्ष पूर्व किया गया था। लंबे समय से मरम्मत न होने के कारण यह नहर अब पूरी तरह जर्जर अवस्था में पहुँच चुकी है। नहर में जगह-जगह रिसाव होने से बड़ी मात्रा में पानी का अपव्यय हो रहा है। इसके बावजूद अब तक मरम्मत के लिए आवश्यक निधि उपलब्ध नहीं कराई जा सकी है। परियोजना की मुख्य नहर 16.50 किलोमीटर लंबी है, जबकि शाखा तथा उप-नहरों की संयुक्त लंबाई 80 से 90 किलोमीटर तक पहुंचती है।

तीन दशक पुराने इन संरचनाओं में लगातार बढ़ते रिसाव को ध्यान में रखते हुए, सिंचाई विभाग ने नहरों की व्यापक मरम्मत के लिए 66 करोड़ रुपये का प्रस्ताव सरकार को भेज दिया है। प्रस्ताव पर मंजूरी मिलने के बाद ही मरम्मत कार्य प्रारंभ हो सकेगा, जिसमें अभी लगभग एक वर्ष का समय लगने की संभावना है। वर्तमान स्थिति यह है कि मिट्टी में पर्याप्त नमी संग्रहित होने और कई क्षेत्रों में जल भंडार लबालब होने के कारण सिंचाई की तत्काल आवश्यकता कम हो गई है।

सिंचाई विभाग के सामने एक और बड़ी चुनौती

लेकिन यदि ग्रीष्मकालीन धान की खेती में किसानों की रुचि बढ़ती है, तो पानी की माँग एक बार फिर तेजी से बढ़ सकती है। यही कारण है कि सिंचाई विभाग भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए नहर मरम्मत को अत्यावश्यक मान रहा है। सिंचाई विभाग के सामने एक और बड़ी चुनौती है। कर्मचारियों की भारी कमी है। टेकेपार सिंचाई संभाग में उपलब्ध मानव बल बेहद सीमित है।

ग्रीष्मकालीन धान का रुझान नहीं हो रहा कम:

पिछले कुछ वर्षों में किसानों की कृषि पद्धति में उल्लेखनीय बदलाव देखने को मिल रहा है।

किसानों में नहीं छूट रहा धान का मोह

सूखे की आशंका और बदलते मौसम पैटर्न को देखते हुए भी किसान अपनी रणनीति बदलने के लिए तैयार नहीं हैं। सिचाई विभाग ने रबी फसलों को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया है, हालांकि वास्तविकता यह है कि बड़ी संख्या में किसान ग्रीष्मकालीन धान की खेती में अधिक रुचि ले रहे है। इससे गर्मियों में सिंचाई जल की मांग बढ़ जाती है, जो नहरों की जर्जर हालत को देखते हुए भविष्य में समस्या खड़ी कर सकती है, लेकिन काम चलाने में अधिकारी प्रयास अवश्य करते है।

2,000 हेक्टेयर को सिंचाई उपलब्ध कराने का लक्ष्य

टेकेपार सिंचाई विभाग आंबाडी के उप अभियंता जी. डी. वंजारी ने कहा कि टेकेपार उपसा सिंचाई परियोजना के तहत ग्रीष्मकालीन फसलों के लिए 2,000 हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई जल उपलब्ध कराने का लक्ष्य है। पानी का वितरण जल उपभोक्ता संस्थाओं के माध्यम से किया जाता है। प्रत्येक संस्था को 300 से 400 हेक्टेयर क्षेत्र आवंटित किया गया है। वही, सरकार से प्रस्ताव को स्वीकृति मिलने के बाद ही नहर मरम्मत कार्य की दिशा में ठोस कदम उठाए जा सकेंगे। उम्मीद है कि मंजूरी मिलते ही जर्जर नहरों का जीर्णोद्धार किया जाएगा, जिससे आने वाले मौसमों में किसानों को सुचारू सिंचाई सुविधा मिल सकेगी।

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com