खाकी की सुस्ती, कातिलों की मस्ती, 90 दिन में नहीं फाइल हुई चार्जशीट, हत्याकांड के 4 आरोपी डिफॉल्ट बेल पर रिहा

Police Negligence: छत्रपति संभाजीनगर में पुलिस की बड़ी लापरवाही। शकील शेख हत्याकांड में 90 दिन की समय सीमा बीतने के बाद चार्जशीट दाखिल करने पर आरोपियों को मिली वैधानिक जमानत। पढ़ें पूरी खबर।
Police Lethargy, Killers' Impunity: Charge Sheet Not Filed Within 90 Days; 4 Accused in Murder Case Released on Default Bail
महाराष्ट्र पुलिस (सोर्स: सोशल मीडिया)
Published on: 
Updated on: 

Chhatrapati Sambhajinagar Crime: कानून की एक छोटी सी चूक अपराधियों के लिए वरदान साबित हो सकती है, इसका ताजा उदाहरण छत्रपति संभाजीनगर में देखने को मिला है। शहर को झकझोर देने वाले शकील आरीफ शेख हत्याकांड में पुलिस की भारी लापरवाही सामने आई है। निर्धारित 90 दिनों के भीतर आरोपपत्र (Charge Sheet) दाखिल न कर पाने के कारण चार मुख्य आरोपियों को कोर्ट से 'डिफॉल्ट बेल' मिल गई है।

क्या है पूरा मामला?

जनवरी माह में 30 वर्षीय शकील आरीफ शेख की उसके ही दोस्तों ने बड़ी बेरहमी से हत्या कर दी थी। जांच में पता चला कि प्रेम संबंध, मोबाइल और पैसों के लेन-देन के विवाद में मुख्य आरोपी शेख रेहान उर्फ जब्बार ने साजिश रची थी। आरोपियों ने शकील को बंधक बनाया, दो दिनों तक उसे सिगरेट से जलाया, प्रताड़ित किया और अंत में गला रेतकर उसकी हत्या कर दी। अपराध शाखा ने तत्परता दिखाते हुए 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया था।

91वें दिन की गई कागजी कार्रवाई

फौजदारी कानून (CrPC/BNSS) के तहत, हत्या जैसे गंभीर मामलों में पुलिस के लिए गिरफ्तारी के 90 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल करना अनिवार्य होता है। यदि पुलिस इस समय सीमा को चूक जाती है, तो आरोपियों को वैधानिक रूप से जमानत पाने का अधिकार मिल जाता है। छावनी पुलिस ने चार्जशीट 90वें दिन के बजाय 91वें दिन दाखिल की। इस एक दिन की देरी का लाभ उठाकर शेख राहील, शेख शाहिद, सैयद सिराज और शेख साहिल को कानूनन जमानत मिल गई।

पुलिस विभाग में हड़कंप, जांच के आदेश

इस गंभीर लापरवाही के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। पुलिस उपायुक्त (DCP) पंकज अतुलकर ने स्वीकार किया कि जांच अधिकारी से तकनीकी त्रुटि हुई है। उन्होंने बताया कि "संबंधित जांच अधिकारी से इस देरी पर स्पष्टीकरण मांगा गया है। इस लापरवाही के लिए उनके खिलाफ विभागीय जांच (Departmental Enquiry) शुरू कर दी गई है। रिपोर्ट के आधार पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।"

क्या होती है 'डिफॉल्ट' बेल?

भारतीय कानून के अनुसार, जब पुलिस किसी आरोपी को गिरफ्तार करती है, तो उसे एक निश्चित समय (60 या 90 दिन, अपराध की गंभीरता के आधार पर) में जांच पूरी कर कोर्ट में सबूत पेश करने होते हैं। यदि पुलिस समय पर ऐसा नहीं कर पाती, तो आरोपी का यह संवैधानिक अधिकार बन जाता है कि वह जमानत पर बाहर आ सके, भले ही अपराध कितना भी संगीन क्यों न हो। इसे ही 'डिफॉल्ट' या वैधानिक जमानत कहा जाता है।

एक तरफ जहां पीड़ित परिवार न्याय की उम्मीद लगाए बैठा है, वहीं पुलिस की इस प्रक्रियात्मक चूक ने न्याय प्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि कुछ आरोपी अभी भी जेल में हैं क्योंकि उन्होंने जमानत के लिए आवेदन नहीं किया या उन्हें जमानतदार नहीं मिले, लेकिन मुख्य साजिशकर्ताओं का इस तरह बाहर आना पुलिस की कार्यप्रणाली पर एक बड़ा धब्बा है।

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com