Nagpur RTO 'हफ्ता सिंडिकेट' पर कब्जे की जंग! अफसरों के गैंगवार ने लिया खतरनाक मोड़, 'सुपारी' कनेक्शन से सनसनी

Nagpur RTO Syndicate: नागपुर RTO में कथित वसूली सिंडिकेट और अफसरों के गैंगवार को लेकर सनसनी। अंडरवर्ल्ड कनेक्शन के आरोपों ने प्रशासनिक तंत्र और सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े किए।
Battle for Control over Nagpur RTO's 'Extortion Syndicate'! Gang War Among Officials Takes a Dangerous Turn; 'Contract Killing' Connection Sparks Sensation.
नागपुर RTO सिंडिकेट,(सोर्स: सौजन्य AI)
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Nagpur Transport Department Controversy: नागपुर शहर में महाराष्ट्र आरटीओ में हफ्ता वसूली सिंडिकेट पर कब्जे के लिए अफसरों के बीच चल रहे गैंगवार ने अब डर्टी पिक्चर का रूप धारण कर लिया। नागपुर के एक अधिकारी की अगुवाई में नये सिरे से तैयार हुए सिंडिकेट ने अब पुराने अफसरों का नामो-निशान मिटाने का बीड़ा उठाया है। इसमें सनसनीखेज जानकारी यह मिली है कि आरटीओ की वसूली के लिए कई अधिकारियों का 'नायक' अब खलनायक बन गया है।

इस नायक ने आरटीओ के पुराने सिंडिकेट के आजी-माजी अफसरों की सुपारी चर्चित इप्पा गैंग को दी है। इस गैंग के रडार पर पुणे-अमरावती से लेकर नागपुर तक के कुछ अफसर हैं और पुलिस प्रशासन यदि समय पर नहीं जागा तो जल्दी ही नागपुर के अंडरवर्ल्ड से जुड़े कुछ अपराधी बड़े खून-खराबा को अंजाम दे सकते हैं।

वसूली-नायक, वाघमारे के फोन पर सब रहस्य

बताया गया है सिंडिकेट का वसूली-नायक, उसका एक समा रिश्तेदार और वाघमारे नामक उनके पेटर के मोबाइल फोन पर इग्धा गैंग को दी गई सुफरी के सभी डिटेल्स है। वैसे भी प्रवर्तन निदेशालय इनकम टैक्स विभाग और पुलिस विभाग इनके सिर्फ मोबाइल की ही जांच कर ले तो सभावित गैंगवार से महाराष्ट्र को बचाया जा सकता है। परिवहन विभाग का इतिहास पहले ही बहुत अच्छा नहीं रहा। शिवसेना के पास ही आरटीओ का कामकाज रहा है। अब तो यह तक कहा जा रहा है कि आरटीओ अफसरों के बीच खून-खराबा की नौबत लाने वाले वसूली-नायक, सीएम की सिटी की बदनाम करने वाले राजनीतिक षड्यंत्र के इशारों पर काम कर रहे है। उल्लेखनीय है कि यह विभाग एकनाथ शिंदे की शिवसेना के पास है।

खरमाटे के खात्मे का गेम प्लान

आरटीओ में करोड़ों रुपये की महीने की अवैध वसूली का खेल कई दशकों से अनवरत शुरू है। महाराष्ट्र का भ्रष्टाचार प्रतिबंधक विभाग, कई विधायक-मंत्री, उनके पंटर, कई सामाजिक कार्यकर्ता, कुछ ट्रांसपोर्टर इस समूचे सिंडिकेट का हिस्सा बने हुए हैं। पता चला है कि आरटीओ के पूर्व अधिकारी बजरंग खरमाटे सहित कुछ और अधिकारियों के उस लिस्ट में नाम हैं जो नये सिंडिकेट को लगता है कि उनकी राह में बाधा हो सकते हैं।

इस खेल की शुरुआत भी बहुत ही नियोजित तरीके से हुई। सिटी के एक बड़े आरटीओ अधिकारी ने सिंडिकेट के कामकाज की पटकथा लिखी। सबसे पहले राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले को मिलकर एक ज्ञापन दिया गया। इस ज्ञापन में खरमाटे सहित कुछ अधिकारियों के नाम गंभीर आरोप लगाए और भ्रष्टाचार के समूचे नेटवर्क का विस्तृत ब्योरा दिया गया।

भ्रष्टाचार को इस शिकायत में सबसे पहला नाम बजरंग खरमाटे का दिया गया जिसकी जांच सरकार ने शुरू कर दी। आरटीओ में शिकायतों का होना बहुत ही आम बात है। ऐसे में सिंडिकेट के कुछ सदस्यों ने वसूली-नायक को उस काम में लगा दिया जो अब तक आरटीओ में नहीं हुआ, कहा जा रहा है कि इप्पा गैंग को पिछले दिनों खरमाटे सहित कुछ अधिकारियों के नामों की लिस्ट भेजी गई है।

इस पर आगे क्या हुआ इसकी जानकारी नहीं मिल पाई है। मात्र जिन अफसरों का नाम इप्पा गैंग की लिस्ट में शामिल है, उन तक यह संदेश पहुंचा दिया गया है कि सुरक्षित रहना है तो आरटीओ से सुरक्षित दूरी बनाए रखें। आरटीओं से जुड़ा कमोबेश हर व्यक्ति जानता है कि नागपुर के अंडरवर्ल्ड की धमकी कुछ अधिकारियों को मिली हुई है। अब इन अधिकारियों और उनके परिजनों में भय फैल गया है।

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