
Pragya Paliwal Gaud (सोर्सः सोशल मीडिया)
Amravati News: कॉलेज जीवन हर व्यक्ति के जीवन में एक बार आता है। कॉलेज लाइफ में सीखी गई हर बात जीवन के हर मोड़ पर हमारे साथ रहती है। इसलिए बड़े सपने देखें, खुली आँखों से सपने देखें और उन्हें पूरा करने की ज़िम्मेदारी लें तथा एक उज्ज्वल भविष्य की ओर आगे बढ़ें, यह विचार भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC) की उपकुलपति डॉ. प्रज्ञा पालीवाल गौड़ ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।
भारतीय जन संचार संस्थान की उपकुलपति डॉ. प्रज्ञा पालीवाल गौड़ ने बुधवार, 21 जनवरी को अमरावती परिसर का दौरा किया। इस अवसर पर आयोजित संवाद कार्यक्रम में उन्होंने विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया। इसके पश्चात उन्होंने बडनेरा स्थित निर्माणाधीन परिसर का निरीक्षण कर कार्य प्रगति की जानकारी ली। इस दौरान क्षेत्रीय निदेशक डॉ. राजेश सिंह कुशवाहा, विशेष कार्य अधिकारी डॉ. मनोज सोनोने, डॉ. विनोद निताले, डॉ. आदित्य मिश्रा, डॉ. प्रमोद गायकवाड़, जयंत सोनोने तथा रोहन तायडे उपस्थित थे।
उपकुलपति डॉ. गौड़ ने कहा कि जनसंचार और पत्रकारिता की पढ़ाई करते समय इस क्षेत्र में हो रहे निरंतर बदलावों को अपनाना आवश्यक है। मीडिया सेक्टर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। भविष्य में हर क्षेत्र में केवल दो वर्ग होंगे एक जो एआई तकनीक को जानते होंगे और दूसरे जो नहीं जानते होंगे। इसलिए विद्यार्थियों को भविष्य की जरूरतों को समझते हुए अत्याधुनिक तकनीकों को अपनाना चाहिए और मीडिया क्षेत्र में अपना सशक्त योगदान देने के लिए तैयार रहना चाहिए।
उन्होंने यह भी बताया कि भारतीय जन संचार संस्थान ने हाल ही में इंडियन आर्मी, आईआईएम, आईआईटी और फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (FTII), पुणे के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर किए हैं।
ये भी पढ़े: सोलापुर में क्रूजर-कंटेनर की टक्कर, दर्शन से लौट रहे यात्रियों पर टूटा कहर, 4 लोगों की मौत, 6 घायल
इस अवसर पर विद्यार्थियों द्वारा निर्मित लैब जर्नल का उपकुलपति डॉ. प्रज्ञा पालीवाल गौड़ के हाथों विमोचन किया गया। मराठी पत्रकारिता की छात्रा काजल घुटे द्वारा पेंसिल से बनाए गए स्केच को देखकर उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की और काजल घुटे की सराहना की। कार्यक्रम में मराठी, हिंदी और अंग्रेज़ी पत्रकारिता पाठ्यक्रमों के विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित थे। कार्यक्रम की सफलता के लिए राजेश जोलेकर, नूरुज्जमा शेख, भूषण मोहोकर, राजेश कुमार, अनंत नांदुरकर, मंदा पवार और नंदा तुप्पट सहित अन्य सहयोगियों ने योगदान दिया।






