अचलपुर के विधायक का ‘अग्निपरीक्षा’, निकाय चुनाव के मुहाने पर भाजपा में अंदरूनी बगावत

BJP Internal Rebellion: अचलपुर, चांदूरबाजार और शेंदुरजना घाट नगरपालिका चुनाव में भाजपा को अंदरूनी बगावत का सामना करना पड़ रहा है। प्रहार, कांग्रेस और AIMIM के बीच कड़ा चौरंगी मुकाबला जारी है।
अचलपुर विधायक के लिए ‘अग्निपरीक्षा
अचलपुर विधायक के लिए ‘अग्निपरीक्षा (सौजन्यः सोशल मीडिया)
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Achalpur Municipal Election 2025: अचलपुर, चांदूर बाज़ार और शेंदुरजना घाट नगरपालिका चुनावों ने अचलपुर विधानसभा क्षेत्र का राजनीतिक तापमान अचानक बढ़ा दिया है। लगातार चार बार विधानसभा चुनावों में जीतकर अपना गढ़ मजबूत बनाए रखने वाले प्रहार और भाजपा के सामने इस बार का चुनावी रण बेहद कठिन होता दिख रहा है।

भाजपा में टिकट बंटवारे को लेकर अंदरूनी असंतोष उफान पर है, जबकि बाहर प्रहार, कांग्रेस और एआईएमआईएम तीनों दल भाजपा को रोकने के लिए पूरी तैयारी में उतर चुके हैं। ऐसे में अचलपुर की राजनीति सीधे-सीधे तुफानी संघर्ष की ओर बढ़ती दिखाई दे रही है और भाजपा विधायक के लिए यह चुनाव प्रतिष्ठा की लड़ाई बन चुका है।

तीन नगरपालिकाओं में चौरंगी मुकाबला

अचलपुर विधानसभा क्षेत्र की तीनों नगरपालिका अचलपुर, चांदूरबाज़ार और शेंदुरजना घाट में भाजपा, प्रहार जनशक्ति पार्टी, कांग्रेस और एआईएमआईएम के बीच कड़ी टक्कर नजर आ रही है। पूर्व मंत्री वसुधा देशमुख के बाद कांग्रेस को लगातार पराजय का सामना करना पड़ा, जबकि प्रहार ने चार विधानसभा चुनाव जीतकर अपनी पकड़ मजबूत की। लेकिन नगरपालिका स्तर पर अपेक्षित सफलता न मिलने से इस बार प्रहार ने अपनी रणनीति पूरी तरह आक्रामक कर दी है, जिसका सीधा असर भाजपा के समीकरणों पर पड़ सकता है।

भाजपा के सामने अंदरूनी बगावत की चुनौती

2017 के चुनाव में भाजपा ने चांदूर बाजार नगरपालिका में अध्यक्ष पद सहित 7 सदस्यों के साथ सत्ता कायम रखी थी। लेकिन इस बार टिकट वितरण में नए चेहरों को प्राथमिकता दिए जाने से पुराने कार्यकर्ताओं में भारी असंतोष फैल गया है। कुछ प्रभागों में योग्य उम्मीदवार न मिलने की स्थिति भी बनी है। अध्यक्ष पद के लिए भी तीखी प्रतिस्पर्धा है और कार्यकर्ताओं को नजरअंदाज करने के आरोप स्पष्ट रूप से सामने आ रहे हैं।

प्रहार का खेल, BJP को सीधा झटका

भाजपा में बढ़ते असंतोष का फायदा उठाते हुए प्रहार ने चुनावी रणनीति में बड़ा परिवर्तन किया है। नगराध्यक्ष पद की उम्मीदवारी न मिलने से नाराज भाजपा के एक नेता को प्रहार ने त्वरित टिकट देकर भाजपा को बड़ा झटका दिया। इसके बाद कई प्रभागों में भाजपा के असंतुष्ट नेताओं को टिकट देकर प्रहार ने अपनी स्थिति और मजबूत कर ली है। विधानसभा में मिली हार का बदला लेने के लिए प्रहार इस बार पूरी ताकत से मैदान में उतर चुका है।

कांग्रेस का मुस्लिम मतदाताओं पर फोकस

कांग्रेस ने अचलपुर और चांदूर बाजार दोनों जगह अध्यक्ष पद पर उम्मीदवार उतारकर इस बार पूरी शक्ति से मुकाबला करने का संकेत दिया है। अचलपुर में मुस्लिम समुदाय के उम्मीदवार को मैदान में उतारकर कांग्रेस ने स्थानीय मुस्लिम मतदाताओं को साधने की रणनीति अपनाई है। शहर में मुस्लिम आबादी अधिक होने के कारण यह फैसला भाजपा और प्रहार दोनों के लिए सीधी चुनौती बन सकता है।

भाजपा विधायक की ‘अग्निपरीक्षा’

नए प्रभागों में प्रचार, अंदरूनी गुटबाज़ी, नाराज कार्यकर्ताओं का पार्टी छोड़ना, प्रहार और कांग्रेस का आक्रामक विरोध तथा वरिष्ठ स्तर का दबाव — इन सभी परिस्थितियों ने भाजपा विधायक प्रवीण तायडे के सामने बड़ा संकट खड़ा कर दिया है। स्थानीय नाराजगी शांत करना, संगठन को एकजुट रखना और नगरपालिका पर पुनः कब्जा जमाना — इसके लिए उन्हें भारी मेहनत करनी होगी। मतदाताओं का रूझान किस ओर जाएगा, यह 2 दिसंबर को मतदान के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा, लेकिन इतना तय है कि अचलपुर का चुनावी संघर्ष इस बार पहले से कहीं ज्यादा तीव्र और दिलचस्प होने वाला है।

चांदूर बाजार में संघर्ष और भी तीखा

चांदूर बाजार में टिकट बंटवारे को लेकर भाजपा में असंतोष चरम पर है। कई पुराने कार्यकर्ताओं को मौका न मिलने से नाराजगी खुलकर सामने आ चुकी है। 2017 में सत्ता हासिल करने वाली भाजपा को इस बार कुछ प्रभागों में उम्मीदवार तक नहीं मिले। प्रहार ने भाजपा के असंतुष्ट नेताओं को टिकट देकर 20 उम्मीदवारों के साथ मजबूत मुकाबला तैयार किया है। कांग्रेस ने भी 17 उम्मीदवार उतारकर सामाजिक संतुलन साधने का प्रयास किया है। इन सारे राजनीतिक समीकरणों के चलते चांदूर बाजार में भाजपा के लिए यह चुनाव अत्यंत चुनौतीपूर्ण साबित होता दिखाई दे रहा है।

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