EXCLUSIVE: मनगवां विधायक के पत्र पर बवाल! ईदगाह और मीनार को बताया अवैध निर्माण, जानें क्यों भड़की कांग्रेस

BJP MLA Narendra Prajapati: विधायक का पत्र के सामने आने के बाद कांग्रेस नेताओं ने इसका विरोध शुरू कर दिया। उनका कहना है कि जिस ईदगाह को विधायक अवैध निर्माण बता रहें वह सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज है।
mangawa mosque controversy
ईदगाह और मीनार की तस्वीर, (सोर्स- नवभारत ब्यूरो)
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BJP MLA Narendra Prajapati Viral Letter: रीवा जिले की मनगवां विधानसभा से भाजपा विधायक नरेंद्र प्रजापति का एक पत्र सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद नया विवाद खड़ा हो गया है। विधायक ने कलेक्टर को लिखे पत्र में अपने क्षेत्र मनगवा की नगर परिषद वार्ड क्रमांक 9 स्थित ईदगाह और मीनार को "अवैध निर्माण" बताते हुए जांच कर कार्रवाई की मांग की है। पत्र में "असामाजिक तत्वों द्वारा निर्माण" जैसे शब्दों के इस्तेमाल पर कांग्रेस और स्थानीय लोगों ने कड़ी आपत्ति जताई है। उनका दावा है कि संबंधित भूमि वर्षों से राजस्व अभिलेखों में दर्ज है, ऐसे में विधायक द्वारा प्रयुक्त भाषा न केवल भ्रामक है बल्कि सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने वाली भी है।

वायरल पत्र में भाजपा विधायक ने आरोप लगाया है कि नगर परिषद मनगवां के वार्ड क्रमांक 9 में बिना अनुमति ईदगाह एवं मीनार का निर्माण किया गया है और सक्षम अधिकारी की अनुमति के बिना खसरे में दर्ज किया गया है। उन्होंने कलेक्टर से पूरे मामले की जांच कर निर्माण हटाने की कार्रवाई करने की मांग की है।

कांग्रेस नेताओं ने किया विरोध

विधायक के इस पत्र के सामने आने के बाद कांग्रेस नेताओं और स्थानीय नागरिकों ने इसका विरोध शुरू कर दिया। उनका कहना है कि जिस ईदगाह को विधायक "अवैध निर्माण" और "असामाजिक तत्वों" से जोड़ रहे हैं, वह मध्य प्रदेश शासन के राजस्व रिकॉर्ड में वर्ष 2012-13 से दर्ज बताई जा रही है। विरोध करने वालों का कहना है कि यदि यह दावा सही है तो पहले राजस्व अभिलेखों की जांच होनी चाहिए, न कि किसी धार्मिक स्थल के संबंध में ऐसी भाषा का प्रयोग।

सांप्रदायिक तनाव की आशंका

विरोध करने वालों का आरोप है कि एक जनप्रतिनिधि से अपेक्षा की जाती है कि वह संविधान की भावना के अनुरूप सभी नागरिकों के साथ समान व्यवहार करे। उनका कहना है कि किसी धार्मिक स्थल के संदर्भ में "असामाजिक तत्व" जैसे शब्दों का उपयोग समाज में गलत संदेश दे सकता है और सांप्रदायिक तनाव की आशंका भी बढ़ा सकता है। कांग्रेस ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और विधायक के पत्र पर प्रशासन से स्पष्टीकरण की मांग की है।

विधायक का आरोप कितना सच?

हालांकि, यह भी स्पष्ट करना जरूरी है कि फिलहाल यह विवाद राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के स्तर पर है। यह प्रशासनिक जांच का विषय है कि संबंधित निर्माण की वैधानिक स्थिति क्या है, राजस्व रिकॉर्ड में क्या दर्ज है और विधायक के पत्र में लगाए गए आरोप तथ्यात्मक रूप से सही हैं या नहीं। प्रशासन की जांच और आधिकारिक निष्कर्ष के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

जांच पर टिकी सभी की नजरें

फिलहाल भाजपा विधायक के पत्र ने मनगवां की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। एक ओर विधायक अवैध निर्माण का आरोप लगाकर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस और स्थानीय लोग इसे धार्मिक आधार पर अनावश्यक विवाद पैदा करने वाला कदम बता रहे हैं। अब सबकी नजर प्रशासन की जांच और उसके निष्कर्ष पर टिकी है।

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