

MP Teacher Eligibility Test 2026: मध्य प्रदेश में वर्ष 1998 से 2009 के बीच नियुक्त करीब 1.5 लाख शिक्षकों के लिए बड़ा प्रशासनिक और कानूनी संकट खड़ा हो गया है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद इन शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (MP TET) उत्तीर्ण करना अनिवार्य कर दिया गया है। इस संबंध में कर्मचारी चयन मंडल (ESB) ने परीक्षा आयोजित करने की तैयारियां तेज कर दी हैं। निर्धारित समयसीमा के अनुसार शिक्षकों को 31 अगस्त तक यह परीक्षा पास करनी होगी।
शिक्षा विभाग के अनुसार, परीक्षा को लेकर सभी आवश्यक तैयारियां की जा रही हैं। शिक्षकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए परीक्षा प्रदेश के 50 जिला मुख्यालयों पर आयोजित की जाएगी। हाल ही में बनाए गए नए जिलों में परीक्षा केंद्र नहीं बनाए जाएंगे। परीक्षा की तिथि और अन्य दिशा-निर्देश कर्मचारी चयन मंडल की ओर से जारी किए जाएंगे।
परीक्षा की तैयारी में शिक्षकों की मदद के लिए स्कूल शिक्षा विभाग ने 'समर्थ पोर्टल' पर ऑनलाइन कोचिंग की सुविधा भी शुरू कर दी है। इस पोर्टल के माध्यम से शिक्षक घर बैठे परीक्षा की तैयारी कर सकेंगे। विभाग का उद्देश्य है कि अधिक से अधिक शिक्षक निर्धारित समयसीमा के भीतर परीक्षा उत्तीर्ण कर सकें।
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में वर्ष 1998 से 2009 के बीच नियुक्त शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा अनिवार्य कर दी थी। राज्य सरकार ने इस फैसले पर पुनर्विचार याचिका दायर की थी, लेकिन कोर्ट ने उसे भी खारिज कर दिया। इसके बाद अब सभी प्रभावित शिक्षकों को TET पास करना अनिवार्य हो गया है।
इस बीच राज्य सरकार प्रभावित शिक्षकों को राहत दिलाने की कोशिश में जुटी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व वाली सरकार एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट का रुख करने की तैयारी कर रही है। सरकार विशेष रूप से वर्ष 2005 से 2009 के बीच भर्ती हुए करीब 70 हजार शिक्षकों को राहत दिलाने की मांग करेगी।
सरकार का तर्क है कि इन शिक्षकों ने नियुक्ति के समय 'शिक्षक राज्य स्तरीय संविदा शाला शिक्षक पात्रता परीक्षा' पहले ही उत्तीर्ण कर ली थी। इसलिए इन्हें दोबारा TET देने के लिए बाध्य करना उचित नहीं होगा। सरकार इसी आधार पर सुप्रीम कोर्ट से नई TET अनिवार्यता से छूट देने की मांग करेगी।
यदि सुप्रीम कोर्ट सरकार की दलील स्वीकार कर लेता है, तो करीब 70 हजार शिक्षकों को बड़ी राहत मिल सकती है। हालांकि, फिलहाल अदालत की ओर से इस संबंध में कोई नया आदेश जारी नहीं हुआ है। ऐसे में 1998 से 2009 के बीच नियुक्त सभी शिक्षकों के लिए 31 अगस्त तक पात्रता परीक्षा पास करना जरूरी माना जा रहा है।
इस पूरे मामले पर प्रदेश के शिक्षक संगठन भी लगातार नजर बनाए हुए हैं। उनका कहना है कि लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों के हितों को ध्यान में रखते हुए सरकार और न्यायालय को व्यावहारिक समाधान निकालना चाहिए। फिलहाल, परीक्षा की तैयारियों के साथ-साथ शिक्षकों की निगाहें सरकार की अगली कानूनी पहल और सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी हुई हैं।