उमंग सिंघार का आरोप, मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार में तालाब नहीं बने...सिर्फ घोटालों का जलाशय भरता गया

Umang Singhar Statement: शहडोल में DMF फंड से तालाब निर्माण में करोड़ों रुपये के घोटाले का आरोप लगा है। उमंग सिंघार ने पुराने तालाब, गड्ढों और नालों को नया निर्माण बताकर भुगतान किए जाने का दावा किया।
Shahdol DMF Talab Ghotala
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार (फोटो सोर्स- नवभारत)
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Shahdol DMF Talab Ghotala: मध्य प्रदेश के शहडोल जिले में डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन (DMF) के तहत किए गए निर्माण कार्यों में बड़ा भ्रष्टाचार सामने आया है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने आरोप लगाया है कि जिले में सरकारी खजाने का पैसा पानी की तरह बहाया गया, लेकिन धरातल पर काम के नाम पर केवल खानापूर्ति हुई। यहां हाईवे के गड्ढों और पुराने तालाबों को 'नया निर्माण' बताकर करोड़ों रुपए का भुगतान ले लिया गया।

वर्ष 2022-23 की कार्ययोजना के तहत डीएमएफ मद से तालाब निर्माण, घाट निर्माण और सौंदर्यीकरण के लिए 43 प्रोजेक्ट्स मंजूर किए गए थे, जिनका कुल बजट 7.48 करोड़ रुपए था। इनमें से 24 प्रोजेक्ट्स केवल नए तालाब बनाने के नाम पर थे, जिसके लिए 5.75 करोड़ रुपए की स्वीकृति दी गई थी।

जांच में सामने आई चौंकाने वाली सच्चाई

पड़ताल में पता चला कि जिन स्थानों पर नए तालाब बनाने का दावा किया गया, वहां या तो कोई काम नहीं हुआ या फिर वहां पहले से ही गड्ढे या पुराने तालाब मौजूद थे। एक तालाब की औसत लागत 25 लाख रुपए दिखाई गई, जबकि मौके पर स्थिति इसके उलट थी।

मामले के प्रमुख खुलासे

  • हाईवे के गड्ढों को बताया तालाब: जयसिंहनगर ब्लॉक के जोरा गांव में रीवा-शहडोल हाईवे निर्माण के दौरान मुरम निकालने से बने एक गड्ढे को 'तालाब' घोषित कर दिया गया। इस गड्ढे के नाम पर 25 लाख रुपए का आवंटन जारी कर दिया गया।
  • पुराने तालाब का 'नया' नाम: बरना पंचायत के झिरिया में 20 साल पुराने तालाब की पाल टूट गई थी, जिसकी मरम्मत होनी चाहिए थी। लेकिन, इसे 'नवीन तालाब निर्माण' बताकर 20.56 लाख रुपए का भुगतान ले लिया गया।
  • नाले को बताया नया तालाब: ब्योहारी ब्लॉक के तेंदुहा गांव में पहले से बने दर्री नाले और उसकी पिचिंग को सांसद के प्रस्ताव पर दोबारा 'नवीन तालाब निर्माण' बताकर 25 लाख रुपए स्वीकृत करा लिए गए।

प्रशासन की भूमिका पर सवाल

इस मामले ने प्रशासनिक अधिकारियों की मिलीभगत और बिना भौतिक सत्यापन के भुगतान करने की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यदि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो, तो घोटाले की राशि और बढ़ सकती है।

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