सीमा कुमारी
नवभारत डिजिटल टीम: सर्दियों का मौसम आते ही पूरे देश में हरी सब्जियों की एक नई बहार सी आ जाती है। बाजार में सरसों, पालक, मेथी, बथुआ जैसे कई साग मिलने लगते हैं, जो न सिर्फ स्वाद में लाजवाब होते हैं बल्कि सेहत के लिए भी बहुत ही फायदेमंद मानें जाते हैं। लेकिन, कुछ चीजें ऐसी होती हैं, जिनके बारे में बहुत कम लोगों को पता होता है। लेकिन, ये चीजें सेहत का खजाना होती हैं। ‘नोनी साग’ भी इन्हीं में से एक है, जो बिहार, झारखंड में पाया जाता है। पूर्वी उत्तर भारत, बिहार, असम, पश्चिम बंगाल झारखंड में मनाए जाने वाले जितिया पर्व में व्रती नोनी का साग जरूर खाती हैं। इस साग के बिना जिउतिया का पर्व अधूरा माना जाता है। ऐसे में आइए जानें पोषक तत्वों से भरपूर नोनी साग (Noni Saag) के सेवन से होने वाले फायदे।
जानकारों के अनुसार, भारत में ज्यादातर महिलाओं में प्रेगनेंसी के दौरान आयरन (Noni Saag is for pregnant women) की कमी देखी जाती है। प्रेगनेंसी में आयरन की पूर्ति करने में भी नोनी साग काफी मददगार साबित हो सकता है। इतना ही नहीं नई मां अगर नोनी साग का सेवन करें, तो उसके दूध में वृद्धि होती है।
‘नोनी साग’ डायबिटीज मरीज के लिए किसी रामबाण से कम नहीं है। अगर डायबिटीज मरीज नियमित रूप से नोनी के साग का सेवन करे तो ब्लड शुगर का स्तर बहुत कम समय में सामान्य हो जाता है। नोनी के साग में मौजूद कंपाउंड इंसुलिन सेंसेविटी को बढ़ाता है जिसके कारण नेचुरल रूप से शुगर का अवशोषण हो पाता है। इससे ब्लड शुगर नियंत्रित रहता है।
हेल्थ एक्सपर्ट्स का मानना है कि, ‘नोनी साग’ में भरपूर मात्रा में फाइबर पाया जाता है। फाइबर पाचन संबंधी समस्याओं को दूर करने में मदद करता है। नियमित तौर पर नोनी साग खाने से आंतों की सफाई होती है, जिससे पेट दर्द, कब्ज जैसी समस्याओं से राहत मिलती है। ऐसे में इसका सेवन पेट से जुड़ी समस्याओं से निजात दिलाने में काफी कारगार साबित हो है।
नोनी के साग में फ्लेवोनोइड्स एंटीऑक्सीडेंट पाया जाता है जो हार्ट के मसल्स को मजबूत करने के लिए जाना जाता है। नोनी के साग का नियमित सेवन करने से कोलेस्ट्रॉल कम होता है और गुड कोलेस्ट्रॉल बढ़ जाता है। नोनी का साग ब्लड प्रेशर को भी संतुलित करने में मदद करता है। यह ट्राइग्लिसराइड्स के लेवल को भी कम करता है।
नोनी के साग में पाए जाने वाला एंटीऑक्सीडेंट्स इम्यूनिटी बूस्टर है। नोनी के साग में पाए जाने वाले कंपाउड शरीर में टी और बी सेल्स को सक्रिय कर देता है, जिसके कारण ये शरीर में बाहरी आक्रमणकारियों से रक्षा करते हैं। यह डब्ल्यूबीसी यानी श्वेत रक्त कोशिकाओं की संख्या को भी बढ़ा देता है जिसके कारण बीमारियों से लड़ने की क्षमता बढ़ जाती है।