इसके बाद कामदेव की पत्नी रति अपने पति के भस्म हो जाने पर विलाप करने लगीं। इसे देखते हुए उनके आंसुओं और प्रार्थना से शिव का हृदय पिघला और उन्होंने पुनर्जन्म का वर दिया। बताया जाता है कि, शिव का तीसरा नेत्र सिर्फ कामदेव के अंत का माध्यम नहीं, बल्कि चेतना, शक्ति और न्याय का प्रतीक भी बन गया।