
चंद्रशेखर बावनकुले और नाना पटोले (सौजन्य-सोशल मीडिया)
Maharashtra Politics: निकाय चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवारों की प्रचार सभा में पूर्व प्रदेशाध्यक्ष नाना पटोले ने राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले के ‘पिता’ का अपमानजनक तरीके से उल्लेख किया जिससे बावनकुले भड़क उठे। उन्होंने कहा कि नाना पटोले का यही स्तर शुरू से रहा है। उन्होंने हमेशा स्तर छोड़कर ही राजनीति की है।
यदि इस तरह के उल्लेख करके वे चुनाव जीतने की कोशिश कर रहे हैं तो यह उनके लिए बहुत महंगा पड़ेगा। जनता उन्हें सबक सिखाएगी। उन्होंने हमारे परिवार का अपमान किया है। इस चुनाव में कांग्रेस जमीन पर आ जाएगी और पटोले का भी वहां राजनीतिक अंत होगा। वे नागपुर में पत्रकारों के सवालों का जवाब दे रहे थे।
बावनकुले ने कहा कि महाविकास आघाड़ी सिर्फ भाजपा का विरोध करने के लिए एकजुट हुई है। उसकी कोई वैचारिक भूमिका या स्तर नहीं है। जैसे महायुति में एकता का विचार है, वैसा मविआ में कहीं दिखाई नहीं देता। अलग-अलग दलों के लोग केवल भाजपा और मुख्यमंत्री फडणवीस को अलग-थलग करने और निशाना बनाने के उद्देश्य से एक साथ आए हैं।
वे चाहे जितनी साजिशें करें, साथ रहें या न रहें, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। हम विकास के नाम पर वोट मांगते हैं। महाराष्ट्र की जनता हमें ही वोट देगी। उन्होंने कांग्रेस नेता पटोले के साथ ही प्रदेशाध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल व विजय वडेट्टीवार के संदर्भ में कहा कि ये खराब भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं। इन्होंने अपना स्तर छोड़ दिया है। कांग्रेस को अपना जहाज डूबता नजर आ रहा है। विपक्ष डरा हुआ है।
बावनकुले ने कहा कि मित्र-दलों को चुनाव लड़ने का अधिकार है। शिंदे सेना चुनाव लड़ रही है। हम मित्रतापूर्ण मुकाबला कर रहे हैं। भले ही यह दोस्ताना लड़ाई हो लेकिन मनभेद या मतभेद नहीं होंगे। वोटों के विभाजन की कोई चिंता नहीं है। वोट बंटेंगे या नहीं इसका कोई महत्व नहीं है। भाजपा और महायुति बहुमत से चुनकर आएंगी।
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प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण के 2 दिसंबर के बाद महायुति को लेकर दिए गए बयान का अलग-अलग अर्थ निकाला जा रहा है इस पर कहा कि वे पार्टी के प्रमुख हैं। राज्य स्तर पर महायुति पर इसका कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा। 2 तारीख के बाद महायुति फिर से मजबूत दिखाई देगी।






