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Explainer: बीजेपी का गेम प्लान…या ओपी राजभर की अपनी मजबूरी, अखिलेश यादव पर क्यों हमलावर हैं सुभासपा प्रमुख?
- Written By: मनोज आर्या
OP Rajbhar vs Akhilesh Yadav: योगी सरकार में मंत्री और सुभासपा प्रमुख ओपी राजभर अखिलेश यादव के खिलाफ सीधे तौर पर मोर्चा खोल दिया है। लेकिन, क्या यह बीजेपी की सियासी गेम है या राजभर की अपनी मजबूरी?

अखिलेश यादव पर क्यों हमलावर हैं ओपी राजभर? (AI जेनरेटेड इमेज)
Why OP Rajbhar Attacking On Akhilesh Yadav: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर राज्य में सियासी हलचल तेज हो गई है। बीजेपी की नेतृत्व वाली एनडीए अपनी रणनीतियों को आखिरी रूप देने का जुटी है। वहीं, समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव भी पूरी दमखम के साथ चुनावी तैयारियों में लगे हुए हैं। हालांकि, पिछले कुछ समय से यूपी की राजनीति में ओमप्रकाश राजभर खूब चर्चाओं में हैं। वे लगातार अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी पर सीधा हमला कर रहे हैं।
लेकिन, सवाल उठता है कि पिछले विधानसभा चुनावों में अखिलेश के साथ रहने वाले राजभर उनके खिलाफ इतना हमलावर क्यों हैं। क्या यह बीजेपी का कोई सियासी चाल है या सुभासपा प्रमुख की अपनी मजबूरी? आइए उत्तर प्रदेश के इस नए सियासी खेल को विस्तार से समझने की कोशिश करते हैं।
‘PDA’ के अभेद्य किले में सेंधमारी
अखिलेश यादव ने पिछले कुछ समय से ‘PDA’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) का नारा काफी प्रमुखता से बुलंद किया है। समाजवादी पार्टी के इस नए सियासी गणित ने 2024 लोकसभा चुनावों में बीजेपी को भारी नुकसान पहुंचाया था। हालांकि, आगामी विधानसभा चुनाव में बीजेपी कोई भी गलती दोहराना नहीं चाहती, जिससे की उसको नुकसान हो। भाजपा अब इस सोशल इंजीनियरिंग को ध्वस्त करने की रणनीति पर काम कर रही है। सियासत के इस खेल में ओमप्रकाश राजभर एक बेहद अहम मोहरा बनकर उभरे हैं।
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पूर्वांचल में सपा को रोकने की कोशिश
ओमप्रकाश राजभर खुद राजभर समाज (जो अति-पिछड़ी जाति में आता है) के बड़े नेता माने जाते हैं। बीजेपी राजभर के सहारे यादव वोट बैंक से अलग अन्य गैर-यादव ओबीसी जातियों को एकजुट रखना चाहती है। अखिलेश यादव लगातार सरकार पर पिछड़ों और दलितों की अनदेखी का आरोप लगाते हैं। ऐसे में बीजेपी के पास ओपी राजभर के रूप में एक ऐसा आक्रामक चेहरा है, जो अखिलेश को उन्हीं की भाषा में जवाब दे सकता है। पूर्वांचल की कई सीटों पर राजभर और अन्य अति-पिछड़ी जातियों की आबादी निर्णायक भूमिका में है। बीजेपी राजभर को आगे रखकर पूर्वांचल में सपा के बढ़ते प्रभाव को रोकना चाहती है।
राजभर के सामने कई अहम चुनौतियां
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अखिलेश पर हमले के पीछे राजभर की अपनी राजनीतिक मजबूरियां और भविष्य की असुरक्षा भी एक बड़ा कारण है। पिछले कुछ चुनावों के ट्रेंड्स ने यह दिखाया है कि राजभर समाज का युवा वोटर भी अब धीरे-धीरे बड़ी पार्टियों (बीजेपी या सपा) की तरफ शिफ्ट हो रहे हैं। अपनी पार्टी का वजूद बचाए रखने के लिए राजभर को सुर्खियों में रखना बेहद जरूरी है। 2022 के विधानसभा चुनाव में राजभर ने सपा के साथ गठबंधन किया था, लेकिन चुनाव बाद दोनों के रास्ते अलग हो गए।

राजभर को लगता है कि सपा के साथ जाने से उनकी अपनी कोर ताकत कमजोर हुई और वह सिर्फ एक जूनियर पार्टनर बनकर रह गए। राजभर की राजनीति हमेशा सत्ता के इर्द-गिर्द घूमती है। बीजेपी के साथ रहकर कैबिनेट मंत्री पद और अपनी राजनीतिक रसूख को बनाए रखना उनकी प्राथमिकता है। अगर वह बीजेपी के एजेंडे पर आक्रामक नहीं दिखेंगे, तो गठबंधन में उनका वजन कम हो सकता है।
अखिलेश को कहां घेर रहे हैं राजभर?
ओपी राजभर अपने भाषणों और बयानों में बहुत सधे हुए तरीके से अखिलेश यादव पर निशाना साध रहे हैं। राजभर अक्सर यह आरोप लगाते हैं कि अखिलेश यादव सिर्फ ट्वीट और एसी कमरों में बैठकर राजनीति करते हैं, जबकि जमीनी कार्यकर्ताओं और पिछड़ों के बीच वह नहीं जाते। राजभर लगातार यह नैरेटिव बनाने की कोशिश कर रहे हैं कि सपा का ‘PDA’ सिर्फ एक छलावा है और सत्ता में आने पर इसका फायदा सिर्फ एक विशेष जाति को ही मिलता है, अति-पिछड़ों को नहीं।
सपा काल में हुई घटनाओं को जिक्र
ओपी राजभर ने मंगलवार की सुबह एक्स पर एक पोस्ट करते हुए अखिलेश यादव पर हमला बोला। अपने पोस्ट में उन्होंने लिखा कि बुलंदशहर वाली निंदनीय घटना की तरह ही आपके जंगलराज की एक और वीभत्स मिसाल सीतापुर से सामने ला रहा हूं। याद कीजिए, 6 मार्च 2012 को सत्ता का जनादेश मिलते ही आप लोगों का दलितों-पिछड़ों के खिलाफ नंगा नाच शुरू हो गया था। अभी सरकार भी नहीं बनी थी, सिर्फ जीते थे तभी से आप लोगों का आतंकराज शुरू हो गया था। जनादेश मिलने के दो दिन के अंदर ही 8 मार्च 2016 को आपके बेलगाम सपाई गुंडों ने सीतापुर के रेवसा के बिंबिया गांव में दलितों के 13 घर जला दिए। सिर्फ इसलिए क्योंकि दलितों ने सपा को वोट नहीं दिया था।
सपा का आतंकराज – पार्ट 1 अखिलेश यादव जी! कल ही मैंने कहा था कि रोज एक जनपद में आपके ‘आतंकराज’ की घटना याद दिलाकर बताऊंगा। बुलंदशहर वाली निंदनीय घटना की तरह ही आपके जंगलराज की एक और वीभत्स मिसाल सीतापुर से सामने ला रहा हूं। याद कीजिए, 6 मार्च 2012 को सत्ता का जनादेश मिलते ही… — Om Prakash Rajbhar (@oprajbhar) July 14, 2026
यह भी पढ़ें: मुस्लिम नेता को बर्दाश्त नहीं करती SP…इमरान मसूद ने अखिलेश को दिखाए तेवर, यूपी चुनाव से पहले महा-संग्राम!
इसी सीतापुर में 21 दिसंबर 2015 को लहरपुर थाने के पट्टी देहलिया गांव में दलित बस्ती के 35 घरों में आग लगा दी गई। बस इसलिए क्योंकि दलितों ने प्रधानी चुनाव में सपा प्रत्याशी को वोट नहीं दिया। दो मासूम दलित बच्चों को जिंदा जला दिया गया। आपका सपाई प्रधान खुद अपने हाथों से घरों में आग लगा रहा था। परिवार रो-रोकर गिड़गिड़ाते रहे, लेकिन आपके सपाई गुंडों ने कोई रहम नहीं किया। बच्चे जलकर राख हो गए, बस्ती खाक हो गई।
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