अमेरिका जैसे हालात नहीं बनाना चाहते...CJI सूर्यकांत की दो टूक! UGC नियमों पर सुप्रीम कोर्ट की 10 बड़ी बातें

Supreme Court ने कहा कि यूजीसी के नए नियम अस्पष्ट हैं और इसके दुरुपयोग का खतरा है। इसके बाद कोर्ट ने यूजीसी के नए नियमों पर स्टे लगा दिया है। इस मामले की अगली सुनवाई अब 19 मार्च को होगी।
10 key points from the Supreme Court on UGC regulations
सुप्रीम कोर्ट (Image- Social Media)
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Supreme Court UGC Stay: सुप्रीम कोर्ट ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियमों और कैंपस में बढ़ते भेदभाव को लेकर बेहद कड़ी टिप्पणी की है। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने सुनवाई के दौरान समाज में गहराती वर्गीय खाई और पहचान आधारित राजनीति पर गंभीर सवाल खड़े किए।

शीर्ष अदालत ने कहा कि UGC के नए नियम अस्पष्ट हैं और इनके दुरुपयोग की पूरी आशंका है। इसके बाद कोर्ट ने UGC के नए रेगुलेशंस पर रोक लगा दी है। मामले की अगली सुनवाई अब 19 मार्च को होगी। आइए जानते हैं सुप्रीम कोर्ट की बड़ी बातें...

1. 75 साल बाद पीछे लौटने की चिंता

मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत ने देश के सामाजिक ताने-बाने पर सवाल उठाते हुए कहा, “आजादी के 75 साल बाद क्या हम एक वर्गहीन समाज के लक्ष्य से पीछे हटकर एक प्रतिगामी समाज की ओर बढ़ रहे हैं?”

2. क्षेत्रीय पहचान और रैगिंग का खतरनाक रूप

अदालत ने कैंपस में बढ़ती रैगिंग पर चिंता जताते हुए कहा कि दक्षिण भारत और पूर्वोत्तर से आने वाले छात्रों की संस्कृति का मज़ाक उड़ाया जाना बेहद खतरनाक प्रवृत्ति है। जो लोग दूसरों की संस्कृति से परिचित नहीं होते, वे अक्सर उसे निशाना बनाते हैं।

3. ‘शरारती तत्वों’ द्वारा दुरुपयोग का खतरा

सुप्रीम कोर्ट ने UGC नियमों में इस्तेमाल की गई भाषा पर आपत्ति जताते हुए कहा कि ऐसे शब्दों का उपयोग शरारती तत्व समाज में विभाजन पैदा करने के लिए कर सकते हैं।

4. अमेरिका के नस्लभेद वाले दौर की चेतावनी

जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि भारत को उस स्थिति में नहीं जाना चाहिए, जहां अमेरिका में कभी अश्वेत और श्वेत बच्चों के लिए अलग-अलग स्कूल होते थे। शिक्षा का मूल आधार समावेशिता होनी चाहिए।

5. अंतर-जातीय विवाह और सामाजिक प्रगति

हॉस्टल जीवन का उदाहरण देते हुए CJI ने कहा, “भगवान के लिए! आज हमारे समाज में अंतर-जातीय शादियां हो रही हैं। हम खुद हॉस्टल में रहे हैं, जहां सभी साथ रहते थे।” उन्होंने जोर दिया कि आधुनिक शैक्षणिक संस्थानों में किसी भी तरह के विभाजन की कोई जगह नहीं होनी चाहिए।

6. प्रतिष्ठित लोगों की कमेटी का सुझाव

कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा कि इस पूरे मुद्दे की समीक्षा के लिए समाज के प्रतिष्ठित लोगों की एक उच्च-स्तरीय समिति गठित करने पर विचार किया जाए, ताकि देश बिना किसी विभाजन के आगे बढ़ सके।

7. 3E बनाम 2C पर कानूनी सवाल

जस्टिस बागची ने नियमों की वैधता पर सवाल उठाते हुए पूछा कि जब शिक्षा व्यवस्था में पहले से 3E मौजूद है, तो नए 2C मानकों की आवश्यकता क्यों पड़ी।

8. वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह से सख्त सवाल

UGC के नियमों का पक्ष रख रहीं वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह से मुख्य न्यायाधीश ने साफ कहा कि समाज और शिक्षा के क्षेत्र में पीछे नहीं जाया जा सकता। प्रगति का रास्ता केवल समावेशिता से होकर गुजरता है।

9. 2012 के पुराने नियम फिर लागू

मामले की गंभीरता को देखते हुए CJI ने आदेश दिया कि 2012 के पुराने नियम तत्काल प्रभाव से लागू रहेंगे। कोर्ट का मानना है कि पुराने नियम नए रेगुलेशंस की तुलना में अधिक संतुलित थे।

10. 19 मार्च को अगली सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में नोटिस जारी कर दिया है। अगली अहम सुनवाई 19 मार्च को होगी, जहां समिति के गठन और नियमों की व्याख्या पर आगे निर्णय लिया जाएगा।

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