संभल मस्जिद सर्वे पर सस्पेंस बरकरार, सुप्रीम कोर्ट ने टाली सुनवाई, अब फैसले के लिए करना होगा इतना इंतजार

Sambhal Mosque News: संभल की शाही जामा मस्जिद के सर्वे विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई फिलहाल टल गई है। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई तीन हफ्ते बाद करने का फैसला किया है।
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शाही जामा मस्जिद, सुप्रीम कोर्ट (सोर्स-एआई जनरेटेड)
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Shahi Jama Masjid SC Hearing: उत्तर प्रदेश के संभल स्थित शाही जामा मस्जिद के सर्वे को लेकर चल रहे विवाद में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई होनी थी, जो टल गई है। शीर्ष अदालत ने मामले की अगली सुनवाई तीन सप्ताह बाद करने का निर्देश दिया है। यह मामला उस याचिका से जुड़ा है, जिसे मुस्लिम पक्ष ने दायर कर इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी है।

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में निचली अदालत द्वारा संभल की शाही जामा मस्जिद का कोर्ट कमिश्नर के माध्यम से सर्वे कराए जाने के निर्देश को बरकरार रखा था।

सर्वे को लेकर क्या है मुस्लिम पक्ष का कहना?

मुस्लिम पक्ष का कहना है कि निचली अदालत का इस तरह से सर्वे कराने का अधिकार क्षेत्र नहीं है। याचिकाकर्ताओं के अनुसार, मस्जिद से जुड़े विवाद में कोर्ट कमिश्नर से सर्वे कराने का आदेश देना न्यायिक प्रक्रिया और अधिकार क्षेत्र से परे है। इसी के तहत इसे रद्द किया जाना चाहिए। इस मामले में हिंदू पक्ष ने भी अपनी दलील पेश की हैं।

यहां प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट लागू नहीं होता- हिंदू वकील

दरअसल, इस मामले में पहले की सुनवाई के दौरान, हिंदू पक्ष की ओर से वकील विष्णु शंकर जैन ने हाईकोर्ट को बताया था कि शाही मस्जिद पहले से ही एक संरक्षित स्मारक है। ऐसे में यहां प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट लागू ही नहीं होता। उन्होंने यह भी दावा किया था कि विवादित स्थल पर मंदिर से जुड़े प्राचीन साक्ष्यों को मिटाया जा रहा है, इसलिए वहां सर्वे कराया जाना जरूरी है।

सर्वे कानून के दायरे में- इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि कोर्ट कमिश्नर द्वारा कराया जाने वाला सर्वे कानून के दायरे में है और इसमें कोई अवैधता नहीं है। हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया था कि यदि कोई स्मारक भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा संरक्षित है, तो उस पर पूजा स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 1991 का प्रावधान स्वतः लागू नहीं होता। इसी आदेश को चुनौती देते हुए मुस्लिम पक्ष ने शीर्ष अदालत का रुख किया है। अब हर किसी की नजरें सुप्रीम कोर्ट में होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि शाही जामा मस्जिद के सर्वे को लेकर आगे क्या कानूनी दिशा तय होती है।

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