UGC के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट ने अगले आदेश तक लगाई रोक, कोर्ट ने बताया अस्पष्ट, दुरुपयोग का खतरा

UGC New Rule: सुप्रीम कोर्ट में यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ दाखिल याचिका पर सुनवाई जारी है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि आजादी के इतने साल बाद भी हम समाज को जातियों से मुक्त नहीं कर सके हैं।
The Supreme Court orders the central government to form a committee on the UGC controversy
सुप्रीम कोर्ट (Image- Social Media)
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UGC Controversy: यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ देशभर में विरोध जारी है। गुरुवार को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने छात्रों के बीच भेदभाव से जुड़े UGC इक्विटी रूल्स के नए रेगुलेशंस को चुनौती देने वाली एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई की। कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार से जवाब मांगा और सॉलिसिटर जनरल से कहा कि वे अपना पक्ष रखें तथा एक समिति के गठन पर विचार करें। कोर्ट ने नए नियमों पर रोक लगा दी है।

सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची ने कहा कि संविधान का अनुच्छेद 15(4) राज्यों को अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए विशेष कानून बनाने का अधिकार देता है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि वे याचिकाकर्ता की चिंता समझते हैं कि किसी प्रगतिशील कानून में प्रतिगामी रुख क्यों अपनाया जाना चाहिए। न्यायमूर्ति बागची ने उदाहरण देते हुए कहा कि उन्हें उम्मीद है कि भारत अमेरिका जैसी स्थिति की ओर नहीं जाएगा, जहां कभी अश्वेत और श्वेत छात्रों के लिए अलग-अलग स्कूल हुआ करते थे। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसी परिस्थितियों का दुरुपयोग किया जा सकता है।

भेदभाव समाज में खाई को और गहरा करेगा

याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि कुछ राजनीतिक नेताओं के बयान सामने आए हैं, जिनमें कहा गया है कि सामान्य वर्ग के छात्रों को शुल्क देना होगा आदि, जिससे चिंता और बढ़ गई है।  सुनवाई के दौरान वकील ने कहा कि नियमों के सेक्शन 3C की परिभाषा को चुनौती दी गई है, क्योंकि यह जाति आधारित भेदभाव को बढ़ावा देता है। वरिष्ठ अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने दलील दी कि यह प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 14 और 19 का उल्लंघन करता है। उनका कहना था कि शिक्षा के क्षेत्र में इस तरह का भेदभाव समाज में खाई को और गहरा करेगा। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि अदालत समानता के अधिकार के पहलू पर विचार कर रही है और यह जांचेगी कि क्या ये नियम संवैधानिक कसौटी पर खरे उतरते हैं। उन्होंने याचिकाकर्ता से इस बिंदु पर विस्तार से दलील देने को कहा।

सामान्य वर्ग को इस नियम के तहत कवर नहीं

विष्णु शंकर जैन ने आगे कहा कि अनुच्छेद 14 में वर्गीकरण (classification) को लेकर स्पष्ट सिद्धांत तय हैं और इस पर सुप्रीम कोर्ट के कई फैसले मौजूद हैं। उनके मुताबिक, सेक्शन 3C अनुच्छेद 14 के बिल्कुल विपरीत है। उन्होंने अदालत से जाति आधारित भेदभाव से जुड़े इस प्रावधान पर रोक लगाने की मांग की। एक अन्य वकील ने तर्क दिया कि यदि कोई छात्र सामान्य वर्ग से है और वह किसी कॉलेज में नया दाखिला लेता है, जहां उसे सीनियर्स द्वारा रैगिंग या उत्पीड़न का सामना करना पड़े, तो उसके लिए नियमों में कोई प्रभावी उपाय मौजूद नहीं है।

इस पर मुख्य न्यायाधीश ने आश्चर्य जताते हुए पूछा कि क्या सामान्य वर्ग को इस नियम के तहत कवर नहीं किया गया है। जवाब में वकील ने स्पष्ट रूप से कहा कि सामान्य वर्ग के छात्रों को इसमें शामिल नहीं किया गया है।

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