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न्यायपालिका पर उठते सवाल: 9 साल में जजों के खिलाफ 8600 से ज्यादा शिकायतें, सरकार ने बताया ‘एक्शन’ प्लान
Judicial Complaints India: केंद्र सरकार ने लोकसभा में बताया कि 2016-2025 के बीच मौजूदा जजों के खिलाफ 8,639 शिकायतें मिली हैं। इन शिकायतों की जांच न्यायपालिका के अपने 'इन-हाउस मैकेनिज्म' के तहत होती है
- Written By: प्रतीक पांडेय

केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, फोटो- सोशल मीडिया
8600 Complaints Against Judges: भारतीय लोकतंत्र के सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ, न्यायपालिका की शुचिता और जजों के आचरण को लेकर संसद में चौंकाने वाले आंकड़े पेश किए गए हैं। पिछले नौ साल में मौजूदा जजों के खिलाफ शिकायतों का ग्राफ तेजी से बढ़ा है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि इन मामलों में कार्रवाई की शक्ति न्यायपालिका के पास ही सुरक्षित है।
संसद में पेश किए गए शिकायतों के बड़े आंकड़े देश की न्यायपालिका की जवाबदेही को लेकर केंद्र सरकार ने लोकसभा में एक विस्तृत रिपोर्ट पेश की है। केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने एक लिखित जवाब में जानकारी दी कि साल 2016 से 2025 के बीच मौजूदा जजों के खिलाफ कुल 8,639 शिकायतें चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया के कार्यालय को प्राप्त हुई हैं।
2024: शिकायतों का सबसे ‘व्यस्त’ साल
सरकारी आंकड़ों पर एक नजर डालें तो पता चलता है कि शिकायतों के मामले में साल 2024 सबसे ऊपर रहा है। अकेले इस एक वर्ष में जजों के खिलाफ कुल 1,170 शिकायतें दर्ज की गईं। इतनी बड़ी संख्या में शिकायतों का आना यह संकेत देता है कि आम जनता और संबंधित पक्ष अब न्यायिक आचरण के प्रति अधिक सतर्क और मुखर हो गए हैं। इन शिकायतों में प्रशासनिक अनियमितताओं से लेकर व्यक्तिगत आचरण तक के मामले शामिल हो सकते हैं।
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इन-हाउस मैकेनिज्म: कैसे होती है जजों पर कार्रवाई?
अक्सर यह सवाल उठता है कि जब जजों के खिलाफ शिकायत आती है, तो उसकी जांच कौन करता है? कानून मंत्री ने स्पष्ट किया कि हाई कोर्ट के जजों और चीफ जस्टिस के खिलाफ आने वाली शिकायतों पर कार्रवाई के लिए न्यायपालिका के भीतर ही एक ‘इन-हाउस मैकेनिज्म’ मौजूद है। इसका अर्थ है कि सरकार इन मामलों में सीधा हस्तक्षेप नहीं करती, बल्कि न्यायपालिका खुद अपने सदस्यों के आचरण की समीक्षा करती है।
इस प्रक्रिया की बुनियाद मई 1997 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा पारित दो महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर टिकी है:
1. रेस्टेटमेंट ऑफ वैल्यूज ऑफ ज्यूडिशियल लाइफ: यह जजों के लिए आचरण के मानक तय करता है।
2. इन-हाउस प्रोसीजर: इसके तहत उन जजों के खिलाफ उपयुक्त कदम उठाए जाते हैं जो निर्धारित मानकों का पालन करने में विफल रहते हैं।
शिकायत दर्ज करने और जांच की प्रक्रिया प्रक्रिया के अनुसार, शिकायतों को उनके पद की गंभीरता के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में बांटा जाता है। सुप्रीम कोर्ट के जजों और हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस के खिलाफ मिली शिकायतें सीधे CJI (चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया) को भेजी जाती हैं। दूसरी ओर, हाई कोर्ट के जजों के खिलाफ शिकायतों को संबंधित हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस देखते हैं।
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इसके अलावा, सरकार को CPGRAMS (सेंट्रलाइज्ड पब्लिक ग्रीवेंस रिड्रेस एंड मॉनिटरिंग सिस्टम) या अन्य माध्यमों से जो भी शिकायतें प्राप्त होती हैं, उन्हें भी अंतिम कार्रवाई के लिए सीधे संबंधित प्राधिकरण (CJI या हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस) को भेज दिया जाता है। इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता बनी रहे और उस पर किसी बाहरी शक्ति का दबाव न हो, जबकि जवाबदेही भी तय की जा सके।
Over 8600 complaints against judges since 2016 govt explains in house mechanism in lok sabha
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