Meta के चश्मे का वो फीचर जिसपर 5 साल पहले लगी थी रुक, अब बढ़ेगी टेंशन

Facial Recognition Technology: सड़क पर चलते हुए कोई अनजान व्यक्ति सिर्फ आपको देखकर आपका नाम, पेशा और आपकी पूरी डिजिटल जानकारी जान ले? सुनने में यह जादूई लग सकता है, लेकिन अब यह हकीकत बन सकता है।
Meta glasses feature that was banned five years ago will now increase tensions.
Meta Glasses (Source. YouTube)
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Name Tag Feature: क्या आपने कभी सोचा है कि सड़क पर चलते हुए कोई अनजान व्यक्ति सिर्फ आपको देखकर आपका नाम, पेशा और आपकी पूरी डिजिटल जानकारी जान ले? सुनने में यह जादूई लग सकता है, लेकिन अब यह हकीकत बन सकता है। Meta एक बार फिर अपनी विवादित फेसियल रिकग्निशन तकनीक को नए अंदाज़ में लाने की तैयारी कर रही है।

स्मार्ट चश्मे में आएगा पहचान का नया दौर

Mark Zuckerberg की कंपनी इस तकनीक को अपने Ray-Ban Smart Glasses में जोड़ने की योजना बना रही है। इस फीचर की मदद से चश्मा पहनने वाला व्यक्ति सामने खड़े किसी भी अनजान शख्स की पहचान तुरंत कर सकेगा। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस प्रोजेक्ट को फिलहाल "Name Tag" नाम दिया गया है। एक मीडिया रिपोर्ट में बताया गया है कि यह फीचर व्यक्ति का चेहरा स्कैन करके उससे जुड़ी डिजिटल जानकारी सामने ला सकता है। यानी पलक झपकते ही पहचान और प्रोफाइल दोनों हाज़िर!

Name Tag फीचर आखिर है क्या?

रिपोर्ट के मुताबिक, इस फीचर के जरिए चश्मा पहनने वाला व्यक्ति सामने वाले का नाम ही नहीं, बल्कि उससे जुड़ी अन्य सार्वजनिक जानकारियां भी देख सकेगा। मेटा का AI असिस्टेंट तुरंत डेटा प्रोसेस कर उपयोगकर्ता को जानकारी उपलब्ध कराएगा। सोचिए, किसी मीटिंग, बाजार या सड़क पर चलते समय कोई आपको पहचान ले क्या यह सुविधा है या खतरे की घंटी?

मेटा की सीक्रेट प्लानिंग क्या कहती है?

लीक रिपोर्ट्स के अनुसार, कंपनी इस फीचर को बेहद रणनीतिक तरीके से लॉन्च करने की तैयारी में है। कहा जा रहा है कि इसे ऐसे समय पर पेश किया जा सकता है जब वैश्विक स्तर पर राजनीतिक हलचल ज्यादा हो और प्राइवेसी से जुड़े संगठन अन्य मुद्दों में व्यस्त हों। शुरुआत में इसे दृष्टिबाधित लोगों की सहायता के उद्देश्य से किसी कॉन्फ्रेंस में पेश किया जा सकता है, ताकि इसकी उपयोगिता को प्रमुखता दी जा सके।

पहले क्यों बंद करनी पड़ी थी यह तकनीक?

साल 2021 में तीव्र विरोध और कानूनी चुनौतियों के बाद मेटा ने लगभग एक अरब लोगों का फेस-स्कैन डेटा डिलीट कर दिया था। प्राइवेसी विवाद के चलते कंपनी को यह कदम उठाना पड़ा था। लेकिन स्मार्ट ग्लासेस की बढ़ती लोकप्रियता ने इस तकनीक को दोबारा जीवित कर दिया है।

प्राइवेसी एक्सपर्ट्स क्यों हैं चिंतित?

प्राइवेसी विशेषज्ञों का कहना है कि मोबाइल या कंप्यूटर में फेसियल रिकग्निशन सीमित दायरे में रहता है, लेकिन अगर यही तकनीक पहनने वाले चश्मों में आ जाए तो आम लोगों की गुमनामी लगभग खत्म हो सकती है। उनका मानना है कि यह फीचर आम आदमी की निजी जिंदगी को सार्वजनिक कर सकता है और यही सबसे बड़ी चिंता है।

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