'वोटर लिस्ट से काटे जा रहे लोगों के नाम'... UP की वोटर लिस्ट में गड़बड़ी के आरोप पर सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

UP SIR : यूपी में एसआईआर (फॉर्म 7) के कथित दुरुपयोग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई हुई। एक वकील ने आरोप लगाया कि फॉर्म-7 का गलत इस्तेमाल कर कई लोगों के नाम लिस्ट से हटाए गए हैं।
Names of people are being removed from the voter list... What did the Supreme Court say on the allegations of irregularities in the voter list of UP?
यूपी वोटर लिस्ट का मामला सुप्रीम कोर्ट में। इमेज-एआई
Updated on

Supreme Court News : लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत यानी वोट देने का अधिकार इन दिनों सुप्रीम कोर्ट की दहलीज पर है। उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान फॉर्म-7 के कथित दुरुपयोग का मामला तूल पकड़ चुका है। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने मुद्दे की गंभीरता को स्वीकार करते हुए जल्द सुनवाई का भरोसा दिया है।

मामले की शुरुआत तब हुई, जब एक वकील ने चीफ जस्टिस के सामने यह चौंकाने वाला दावा किया कि यूपी में फॉर्म-7 का गलत इस्तेमाल कर बड़ी संख्या में लोगों के नाम मतदाता सूची से काटे जा रहे हैं। आरोप है कि बिना किसी ठोस कानूनी प्रक्रिया के नागरिकों को उनके मताधिकार से वंचित किया जा रहा है। मुख्य न्यायाधीश ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा कि यह मुद्दा संवैधानिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह सीधे तौर पर लोकतांत्रिक प्रक्रिया की शुचिता से जुड़ा है।

फॉर्म-7: नियम बनाम दुरुपयोग

चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार रिप्रेजेंटेशन ऑफ द पीपल्स एक्ट (RPA), 1950 के तहत अलग-अलग फॉर्म का प्रावधान है। फॉर्म 6- नया नाम जुड़वाने के लिए, फॉर्म 7-  नाम कटवाने के लिए (मृत्यु या स्थान परिवर्तन की स्थिति में) और फॉर्म 8-  नाम या पते में सुधार के लिए। विवाद की जड़ यह है कि फॉर्म-7 का इस्तेमाल अब कथित तौर पर हथियार के रूप में किया जा रहा, ताकि विपक्षी समर्थकों के वोट हटाए जा सकें। चुनाव आयोग का स्पष्ट नियम है कि गलत जानकारी देकर किसी का नाम कटवाने पर एक साल की जेल और जुर्माने का प्रावधान है।

सियासी उबाल और पीडीए का मुद्दा

इस मामले पर उत्तर प्रदेश की राजनीति भी गरमा गई है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सीधा आरोप लगाया कि सत्ता पक्ष योजनाबद्ध तरीके से पीडीए (पिछड़े, दलित, अल्पसंख्यक) और विशेष रूप से मुसलमानों के वोट कटवा रहा है। उनका कहना है कि यह सोची-समझी साजिश है, ताकि चुनावों के नतीजों को प्रभावित किया जा सके।

9 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में SIR का चल रहा काम

वर्तमान में यूपी समेत देश के 9 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में एसआईआर का काम अंतिम चरण में है। अब सबकी निगाहें सुप्रीम कोर्ट पर टिकी हैं, जो कुछ हफ्तों में इस बात की जांच करेगा कि फॉर्म 7 का इस्तेमाल किन परिस्थितियों में किया गया। कोर्ट का हस्तक्षेप यह सुनिश्चित करेगा कि किसी भी नागरिक का लोकतांत्रिक हक प्रशासनिक लापरवाही या राजनीतिक द्वेष की भेंट न चढ़े।

Navbharat Live
navbharatlive.com