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जस्टिस चंद्रचूड़ को मिली बड़ी जिम्मेदारी, इस मामले में करेंगे मध्यस्थता, 10 महीने पहले हुए थे रिटायर
Supreme Court News: भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ को अब दो दिग्गज कंपनियों के बीच उपजे विवाद को सुलझाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने मध्यस्थ नियुक्त किया है।
- Written By: अभिषेक सिंह

पूर्व सीजेआई जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ (सोर्स- सोशल मीडिया)
Justice DY Chandrachud: भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ को रिटायरमेंट के 10 महीने बाद एक अहम जिम्मेदारी सौंपी गई है। उन्हें अब दो दिग्गज कंपनियों के बीच उपजे विवाद को सुलझाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने मध्यस्थ नियुक्त किया है।
न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ देश की दो प्रमुख कंपनियों के बीच एक व्यावसायिक विवाद में मध्यस्थ की भूमिका निभाएंगे। ये दोनों कंपनियां, यूरो प्रतीक इस्पात (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड और जियोमिन इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड, 1.7 लाख मीट्रिक टन लौह अयस्क के विवाद में उलझी हुई हैं।
कंपनियों ने स्वीकार की मध्यस्थता
न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति के.वी. विश्वनाथन की पीठ ने कहा कि दोनों पक्षों के बीच का मामला हर सुनवाई के साथ जटिल और अस्पष्ट होता जा रहा था। इसलिए सर्वोच्च न्यायालय ने 19 सितंबर को दोनों पक्षों को भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश के समक्ष मध्यस्थता का प्रस्ताव दिया गया, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया।
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सिंघवी और सुब्रमण्यम से कनेक्शन
वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी यूरो प्रतीक का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, जबकि वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल सुब्रमण्यम जियोमिन का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। दोनों वरिष्ठ वकीलों ने अपनी-अपनी कंपनियों की ओर से पीठ के प्रस्ताव पर सहमति जताई, जिसके बाद न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ को मध्यस्थ नियुक्त किया गया। दोनों वकीलों ने अपनी कानूनी चालों से मामले को और जटिल बना दिया था।
आखिर क्या है यह पूरा विवाद?
मामले में मध्यस्थ नियुक्त करने से पहले, मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की जबलपुर पीठ ने 11 अगस्त को एक निर्णय जारी किया, जिसके विरुद्ध यूरो प्रतीक ने सर्वोच्च न्यायालय में अपील दायर की। उच्च न्यायालय ने जियोमिन के मुकदमे को बहाल कर दिया, जिसे वाणिज्यिक न्यायालय अधिनियम, 2015 की धारा 12ए का पालन न करने के कारण वाणिज्यिक न्यायालय ने पहले ही खारिज कर दिया था।
क्यों मध्यस्थता तक पहुंचा मामला?
धारा 12ए के अनुसार, ऐसा मुकदमा जिसमें तत्काल अंतरिम राहत की संभावना न हो, तब तक शुरू नहीं किया जा सकता जब तक कि वादी ने पूर्व-संस्थागत मध्यस्थता का उपाय नहीं अपना लिया हो। उच्च न्यायालय ने पाया कि मुकदमे में तत्काल अंतरिम राहत की मांग की गई थी और इसलिए धारा 12ए लागू नहीं होती। जिसके चलते उसने यूरो प्रतीक को तब तक विवादित लौह अयस्क के परिवहन या बिक्री पर रोक लगा दी।
इसके बाद यूरो प्रतीक ने इस उच्च न्यायालय के आदेश के विरुद्ध सर्वोच्च न्यायालय में अपील की। दोनों पक्षों को सुनने के बाद, न्यायमूर्ति पारदीवाला और न्यायमूर्ति विश्वनाथन की पीठ ने पूर्व मुख्य न्यायाधीश चंद्रचूड़ को मध्यस्थ नियुक्त किया और उन्हें जल्द से जल्द एक रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।
कितनी होगी DY चंद्रचूड़ की फीस?
पीठ के आदेश में कहा गया है कि न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ की फीस संबंधित पक्षों के परामर्श से तय की जाएगी। शीर्ष अदालत ने अपने आदेश में यह भी कहा कि मध्यस्थता के दौरान दोनों पक्षों को यथास्थिति बनाए रखनी होगी। इसके अलावा, मध्यस्थ की रिपोर्ट प्राप्त होने तक पक्षों के बीच चल रही सभी दीवानी और आपराधिक कार्यवाही पर रोक लगा दी गई है।
यह भी पढ़ें: अहमदाबाद प्लेन क्रैश: ‘पायलट की गलती’ पर ‘सुप्रीम’ सवाल, DGCA और AAIB को थमाया नोटिस, अब क्या होगा?
बता दें कि इससे पहले मई में न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ को दिल्ली स्थित राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय में प्रोफेसर नियुक्त किया गया था। विश्वविद्यालय ने इसे भारतीय विधि शिक्षा में एक नया और बड़ा कदम बताया था। न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ 10 नवंबर, 2024 को मुख्य न्यायाधीश के पद रिटायर हुए थे। उनके बाद न्यायमूर्ति संजीव खन्ना भी CJI बने थे। न्यायमूर्ति खन्ना के रिटायरमेंट के बाद वर्तमान में न्यायमूर्ति बीआर गवई मुख्य न्यायाधीश हैं।
Justice chandrachud appointed mediator in major case after retirement
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