
इमरान खान, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Pakistan Imran Khan News In Hindi: पाकिस्तान में अभिव्यक्ति की आजादी पर गहरा संकट मंडरा रहा है। जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के समर्थन में सोशल मीडिया पर पोस्ट और वीडियो साझा करना चार वरिष्ठ पत्रकारों और विश्लेषकों को भारी पड़ गया है। पाकिस्तान की एक आतंकवाद निरोधक अदालत ने इसे ‘आतंकवादी गतिविधि’ करार देते हुए इन पत्रकारों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि आरोपियों की ऑनलाइन गतिविधियां पाकिस्तान के आतंकवाद निरोधक कानून के तहत आती हैं। कोर्ट के मुताबिक, इन पोस्ट और वीडियो से समाज में डर और अशांति फैली और राज्य संस्थानों के खिलाफ माहौल बनाया गया। अदालत का दावा है कि इमरान खान के समर्थन में किया गया डिजिटल कंटेंट लोगों को उकसाने वाला था और इससे सार्वजनिक व्यवस्था को खतरा पैदा हुआ।
यह मामला 9 मई 2023 की हिंसा से जुड़ा है। उस दिन इमरान खान की गिरफ्तारी के बाद उनके समर्थकों ने देश के कई हिस्सों में प्रदर्शन किए थे जिनमें सैन्य ठिकानों पर हमले भी शामिल थे। इसके बाद पाकिस्तान सरकार और सेना ने इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के नेताओं, समर्थकों और आलोचनात्मक आवाज़ों के खिलाफ बड़े पैमाने पर कार्रवाई शुरू की।
जिन लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है उनमें पूर्व सैन्य अधिकारी से यूट्यूबर बने आदिल राजा और सैयद अकबर हुसैन, पत्रकार वजाहत सईद खान, साबिर शाकिर और शाहीन सहबाई, कमेंटेटर हैदर रजा मेहदी और राजनीतिक विश्लेषक मोईद पीरजादा शामिल हैं।
कोर्ट के दस्तावेजों के अनुसार, इनमें से अधिकतर लोग फिलहाल पाकिस्तान से बाहर रह रहे हैं और सुनवाई के दौरान अदालत में पेश नहीं हुए जिस कारण फैसला गैरहाजिरी में सुनाया गया।
अदालत ने उम्रकैद के साथ-साथ अतिरिक्त सजाएं और भारी जुर्माने भी लगाए हैं। कोर्ट ने साफ किया है कि यदि जुर्माने की राशि अदा नहीं की गई तो सजा की अवधि और बढ़ाई जा सकती है। हालांकि, यह सभी सजाएं इस्लामाबाद हाई कोर्ट की पुष्टि के अधीन होंगी।
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इस कार्रवाई पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी प्रतिक्रिया सामने आई है। पत्रकारों की सुरक्षा के लिए काम करने वाली संस्था ‘कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स’ (CPJ) ने इसे बदले की राजनीति करार दिया है। CPJ का कहना है कि यह कदम आलोचनात्मक पत्रकारिता को दबाने और मीडिया को डराने के उद्देश्य से उठाया गया है। संस्था ने मांग की है कि इन मामलों को तुरंत खत्म किया जाए और पाकिस्तान में पत्रकारों के खिलाफ हो रही धमकियों, सेंसरशिप और कानूनी कार्रवाइयों को रोका जाए।
विशेषज्ञों का मानना है कि इमरान खान की गिरफ्तारी के बाद पाकिस्तान का राजनीतिक माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया है। सोशल मीडिया पर राय रखने वाले पत्रकारों, यूट्यूब विश्लेषकों और सरकार की आलोचना करने वालों पर लगातार शिकंजा कसा जा रहा है, जिससे देश में लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।






