
शिवराज सिंह चौहान, फोटो- सोशल मीडिया
India-US Trade Deal 2026: एक तरफ कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान भारत-अमेरिका ट्रेड डील को किसानों के लिए स्वर्णिम अवसर बता रहे हैं, वहीं किसान संगठनों ने 12 फरवरी को इस डील के विरोध में ‘भारत बंद’ और प्रदर्शन की चेतावनी दी है।
भारत और अमेरिका के बीच हुए ऐतिहासिक व्यापार समझौते ने देश की राजनीति और कृषि क्षेत्र में नई बहस छेड़ दी है। जहां केंद्र सरकार इसे भारतीय उत्पादों के लिए वैश्विक बाजार खोलने वाला कदम बता रही है, वहीं विपक्ष और किसान संगठनों ने इसे ‘किसान विरोधी’ करार दिया है। इस पूरे विवाद के बीच केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मोर्चा संभालते हुए स्पष्ट किया है कि भारतीय किसानों का हित ‘सर्वोपरि’ है और उनके अधिकारों से कोई समझौता नहीं किया गया है।
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर सरकार का रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के “मैं देश नहीं झुकने दूंगा” के संकल्प के अनुरूप किसानों के हितों की पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित की गई है। उन्होंने पूर्ववर्ती कांग्रेस और यूपीए सरकारों की आलोचना करते हुए कहा कि उनके समय में अर्थव्यवस्था 6वें से गिरकर 11वें स्थान पर पहुंच गई थी, जबकि वर्तमान सरकार के प्रयासों से भारत अब तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है।
शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि भारतीय किसानों को नुकसान पहुंचाने वाले उत्पादों को समझौते से बाहर रखा गया है। सोयाबीन, मक्का, चावल, गेहूं, चीनी, मोटे अनाज और दलहन (मूंग, काबुली चना) जैसे प्रमुख अनाजों पर टैरिफ में कोई छूट नहीं दी गई है। इसके अलावा, डेयरी क्षेत्र को पूरी तरह सुरक्षित रखते हुए अमेरिका से लिक्विड दूध, घी, मक्खन, पनीर, योगर्ट और क्रीम जैसे उत्पादों की एंट्री पर रोक बरकरार रखी गई है।
कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के अनुसार, भारत के मसाला बाजार को भी कवच प्रदान किया गया है। काली मिर्च, हल्दी, अदरक, जीरा, हींग और धनिया सहित लगभग सभी प्रमुख मसालों को सुरक्षित सूची में रखा गया है। समझौते की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि भारतीय कृषि उत्पादों को अमेरिका में ‘शून्य शुल्क’ पर निर्यात करने का अवसर मिलेगा, जबकि अमेरिकी किसानों को भारतीय बाजार में ऐसी कोई रियायत नहीं दी गई है।

शिवराज सिंह चौहान ने सबसे बड़ा ऐलान यह किया कि भारत में किसी भी प्रकार के आनुवंशिक रूप से संशोधित (GM) उत्पादों को प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी। इससे भारत के बीज और मिट्टी सुरक्षित रहेंगे।
इस समझौते के तहत भारत और अमेरिका ने एक-दूसरे की वस्तुओं पर टैरिफ (आयात शुल्क) में बड़ी कटौती की है:
भारत में ये चीजें होंगी सस्ती: ताजे फल (जैसे अखरोट, बादाम), प्रीमियम बाइक, लग्जरी कारें, विमान, डिफेंस उपकरण, सोया ऑयल और मेडिकल उपकरण सस्ते होंगे। भारत कई अमेरिकी औद्योगिक वस्तुओं पर शुल्क घटाएगा।
अमेरिका में भारतीय उत्पादों को फायदा: भारत की जेनरिक दवाओं, रत्न-आभूषण और एयरक्राफ्ट पार्ट्स पर अमेरिका ने टैरिफ शून्य कर दिया है। इसके अलावा रेडीमेड कपड़े, फुटवियर, खिलौने और इंजीनियरिंग गुड्स के लिए अमेरिकी बाजार के द्वार खुलेंगे।

समझौते से इतर, शिवराज सिंह चौहान ने देश को दालों के मामले में आत्मनिर्भर बनाने के लिए ‘दलहन आत्मनिर्भरता मिशन’ का रोडमैप भी जारी किया है। उन्होंने कहा कि “दालों का आयात करना देश के लिए शर्म की बात है” और भारत अब निर्यातक बनने की दिशा में काम करेगा। इसके लिए क्लस्टर मॉडल पर देश में 1000 दाल मिलें खोली जाएंगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब देश की दलहन नीति दिल्ली से नहीं, बल्कि सीधे खेतों से तय होगी।
इस व्यापार समझौते के खिलाफ सबसे बड़ी चुनौती 12 फरवरी 2026 को आने वाली है। संयुक्त किसान मोर्चा (SKM), इसके गैर-राजनीतिक धड़े और अखिल भारतीय किसान सभा (AIKS) सहित कई दिग्गज किसान संगठनों ने इस दिन देशभर में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया है।
यह भी पढ़ें: मलेशिया में स्वागत देख गदगद हुए PM मोदी, बोले- गहरी मित्रता क्या होती है ये मैं महसूस कर रहा हूं
किसान नेताओं के अनुसार, 12 फरवरी को देश के हर गांव में इस समझौते के खिलाफ प्रदर्शन किए जाएंगे। प्रदर्शनकारी इस डील को लेकर वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के तुरंत इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने भी इस डील की कमियां गिनाते हुए इसे भारतीय किसानों की कीमत पर अमेरिका को दी गई छूट बताया है। कांग्रेस का आरोप है कि इस डील के बाद अमेरिका से भारत का आयात तीन गुना बढ़ जाएगा, जिससे व्यापार संतुलन बिगड़ सकता है।






