पश्चिम बंगाल के DGP को निलंबित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंची ईडी, आज होगी सुनवाई

West Bengal Politics: ED ने DGP राजीव कुमार को बर्खास्त करने की मांग की है। पश्चिम बंगाल, ED, सुप्रीम कोर्ट, ममता बनर्जी और राजीव कुमार के बीच कोल पिल्फरेज घोटाले पर छापेमारी विवाद की पूरी जानकारी।
Enforcement Directorate (ED) has approached the Supreme Court to seek the suspension of the Director General of Police (DGP) of West Bengal
सुप्रीम कोर्ट (सौजन्यः सोशल मीडिया)
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I-PAC controversy: पश्चिम बंगाल में सियासी माहौल तेजी से गरमा गया है। चुनावी रणनीति तैयार करने वाली संस्था आईपैक (I-PAC) पर ईडी की छापेमारी को लेकर उठे विवाद के बीच अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने राज्य के पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार को निलंबित करने की मांग के साथ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। गुरुवार को आईपैक पर ईडी की कार्रवाई से जुड़े मामले पर भी शीर्ष अदालत में सुनवाई होनी है।

ईडी ने राज्य पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ भी अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की है। इस याचिका में कार्मिक मंत्रालय और गृह मंत्रालय को निर्देश देने का अनुरोध किया गया है कि वे संबंधित अधिकारियों के खिलाफ उचित कार्रवाई करें।

8 जनवरी से शुरू हुआ विवाद

यह पूरा मामला 8 जनवरी 2026 को सामने आया, जब ईडी ने कोलकाता में आईपैक के दफ्तर और इसके डायरेक्टर प्रतीक जैन के आवास पर छापेमारी की। यह कार्रवाई करीब 2,742 करोड़ रुपये के कोल पिल्फरेज (कोयला चोरी) घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस के तहत की गई थी। ईडी का आरोप है कि छापेमारी के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी स्वयं मौके पर पहुंचीं और डीजीपी राजीव कुमार के साथ पुलिस बल लेकर ईडी अधिकारियों को अपना काम करने से रोक दिया। एजेंसी का दावा है कि मुख्यमंत्री ने कथित तौर पर दस्तावेज, लैपटॉप और मोबाइल फोन जब्त कर लिए, जिससे जांच प्रभावित हुई। ईडी ने इसे कानून की अवहेलना और गंभीर अपराध करार दिया है।

डीजीपी राजीव कुमार पर गंभीर आरोप

ईडी की नई याचिका में डीजीपी राजीव कुमार की भूमिका पर विशेष जोर दिया गया है। एजेंसी का कहना है कि जब वे कोलकाता के पुलिस कमिश्नर थे, तब उन्होंने मुख्यमंत्री के साथ धरने में हिस्सा लिया था। अब डीजीपी के पद पर रहते हुए वे फिर से जांच में रुकावट डाल रहे हैं। ईडी ने सुप्रीम कोर्ट से सीबीआई को एफआईआर दर्ज कर जांच सौंपने के निर्देश देने की मांग की है। साथ ही राज्य सरकार, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, डीजीपी राजीव कुमार, कोलकाता पुलिस कमिश्नर मनोज वर्मा और अन्य अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की अपील भी की गई है।

बंगाल सरकार ने दाखिल किया कैविएट

वहीं, पश्चिम बंगाल सरकार ने भी सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दायर की है, ताकि उनकी सुनवाई के बिना कोई एकतरफा आदेश न पारित हो। इस मामले को लेकर कलकत्ता हाईकोर्ट में भी सुनवाई हुई थी, जहां ईडी ने कहा कि उन्होंने कुछ भी जब्त नहीं किया, बल्कि सारी सामग्री मुख्यमंत्री अपने साथ ले गईं। टीएमसी की याचिका पर हाईकोर्ट ने ईडी के बयान को रिकॉर्ड में लेते हुए मामला निपटा दिया।

चुनाव से पहले बढ़ा केंद्र-राज्य टकराव

यह पूरा विवाद 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले तृणमूल कांग्रेस और केंद्र सरकार के बीच टकराव को और तेज करता नजर आ रहा है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ईडी की छापेमारी को टीएमसी को कमजोर करने की साजिश बताया है, जबकि ईडी का कहना है कि राज्य सरकार ने सुनियोजित तरीके से जांच में बाधा पहुंचाई।

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