अमेरिका-इजरायल की कार्रवाई की मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने की निंदा, अली खामेनेई की शहादत पर जताया दुख

Israel-Iran War: ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन बताया है। बोर्ड ने संयुक्त राष्ट्र से हस्तक्षेप करने की मांग की है।
AIMPLB Appeal to United Nations
AIMPLB ने संयुक्त राष्ट्र से अमेरिका-इजरायल के खिलाफ अपील की (सोर्स- सोशल मीडिया)
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AIMPLB Appeal to United Nations: ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल द्वारा की जा रही सैन्य कार्रवाई पर अपनी कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। मंगलवार को जारी एक आधिकारिक बयान में बोर्ड ने संयुक्त राष्ट्र (UN) और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इस आक्रामक कार्रवाई को तत्काल रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की अपील की है। बोर्ड का मानना है कि यदि इस पर तुरंत लगाम नहीं लगाई गई, तो यह संघर्ष एक विनाशकारी वैश्विक युद्ध में बदल सकता है।

भारत की भूमिका और विदेश नीति पर बोर्ड की चिंता

AIMPLB के प्रवक्ता एस.क्यू.आर. इलियास ने कहा कि इस निर्णायक समय में भारत एक संतुलित और गरिमापूर्ण मध्यस्थ की भूमिका निभा सकता था। उन्होंने खेद जताते हुए कहा कि वर्तमान में भारत का जो रुख है, उससे देश की पुरानी विदेश नीति की साख पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। बोर्ड के अनुसार, भारत जैसे देश का शांति के लिए आगे न आना कूटनीतिक स्तर पर निराशाजनक है। इलियास ने खुलासा किया कि ओमान की मध्यस्थता में ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर बातचीत सकारात्मक दिशा में बढ़ रही थी। ओमान के विदेश मंत्री बद्र अल-बुसैदी के अनुसार, ईरान अमेरिका की लगभग सभी शर्तें मानने को तैयार था। इसके बावजूद, अमेरिका द्वारा अचानक बातचीत खत्म करना और इजरायल के साथ मिलकर हमला करना यह दर्शाता है कि कूटनीतिक प्रयास महज एक दिखावा थे। बोर्ड ने इसे एक नियोजित साजिश करार दिया है।

अली खामेनेई की हत्या अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन

ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की "शहादत" पर बोर्ड ने गहरा दुख व्यक्त किया है। इसे मुस्लिम उम्माह (समुदाय) के लिए एक अपूरणीय क्षति बताते हुए इलियास ने कहा कि किसी संप्रभु देश के शीर्ष नेतृत्व को युद्ध में निशाना बनाना अंतरराष्ट्रीय कानूनों और संयुक्त राष्ट्र चार्टर का खुला उल्लंघन है। उन्होंने इस बात पर भी हैरानी जताई कि भारत की ओर से कोई आधिकारिक शोक संदेश जारी नहीं किया गया, जो देश की नैतिक परंपराओं के विपरीत है।

पश्चिम एशिया में गहराने लगा संकट

बोर्ड ने चेतावनी दी है कि इस युद्ध ने पूरे पश्चिम एशिया को अस्थिरता की आग में झोंक दिया है। एक तरफ जहां कई यूरोपीय देश अमेरिका का समर्थन कर रहे हैं, वहीं रूस और चीन ईरान के पक्ष में खड़े नजर आ रहे हैं। यह ध्रुवीकरण तीसरे विश्व युद्ध की आहट दे रहा है। इलियास ने कहा कि लंबे समय तक चलने वाला यह संघर्ष न केवल मानवीय संकट को जन्म देगा, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था को भी तहस-नहस कर देगा, जिसका खामियाजा सबसे अधिक भारत जैसे विकासशील देशों को भुगतना पड़ेगा।

परिवर्तन की राजनीति का विरोध

अंत में, AIMPLB ने स्पष्ट किया कि खुले तौर पर 'शासन परिवर्तन' (Regime Change) की बात करना किसी भी लोकतांत्रिक और अंतरराष्ट्रीय मंच के लिए अस्वीकार्य होना चाहिए। बोर्ड ने संयुक्त राष्ट्र से मांग की है कि वह अपनी शक्तियों का उपयोग करे और पश्चिम एशिया में तुरंत युद्धविराम सुनिश्चित कराए ताकि निर्दोष लोगों की जान बचाई जा सके और दुनिया को आर्थिक मंदी से बचाया जा सके।

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