Holi 2026: भारत नहीं यह छोटा सा देश है रंगों का सबसे बड़ा दीवाना, जानें कौन से देश धूमधाम से मनाते हैं होली?

Holi Obsession 2026: होली की धूम वैश्विक स्तर पर है। सर्च ट्रेंड्स के अनुसार कतर दुनिया का सबसे अधिक होली प्रेमी देश बना है, जबकि भारत आठवें स्थान पर है। नेपाल और ईरान में भी यह पर्व मनाया जा रहा है।
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वैश्विक स्तर पर होली 2026 की धूम (सोर्स-सोशल मीडिया)
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World Holi Celebration Trends 2026: आज 4 मार्च 2026 है और पूरी दुनिया में रंगों के सबसे खूबसूरत त्योहार होली की जबरदस्त धूम मची हुई है। भारत की गलियों से लेकर न्यूयॉर्क के चौराहों तक हर कोई गुलाल और प्यार के रंगों में सराबोर नजर आ रहा है। हाल ही में आई एक ग्लोबल स्टडी ने दुनिया को चौंका दिया है क्योंकि होली की दीवानगी में भारत अब पहले नंबर पर नहीं है। विश्व होली ट्रेंड 2026 के अनुसार अब यह पावन पर्व सात समंदर पार भी लोगों के दिलों पर राज कर रहा है।

होली की दीवानगी में कतर नंबर वन

हैरानी की बात यह है कि एक ताजा रिसर्च के मुताबिक खाड़ी का छोटा सा देश कतर होली के लिए सबसे ज्यादा जुनूनी निकला है। वहां रहने वाले भारतीय समुदाय और प्रवासियों की वजह से यह देश गूगल सर्च और उत्साह के मामले में दुनिया में सबसे आगे रहा। सिंगापुर दूसरे और मॉरीशस तीसरे स्थान पर हैं जहां पारंपरिक फाग और होलिका दहन के साथ यह पर्व बड़े स्तर पर मनाया जाता है।

भारत का स्थान और वैश्विक रैंकिंग

होली का असली जन्मस्थान होने के बावजूद भारत इस बार टॉप 10 देशों की सूची में आठवें पायदान पर खिसक गया है। इस सूची में संयुक्त अरब अमीरात चौथे स्थान पर है जबकि न्यूजीलैंड और बहरीन जैसे देश भी भारत से ऊपर पायदान पर मौजूद हैं। ब्रिटेन, जर्मनी और स्विट्जरलैंड में भी भारतीय मूल के लोग ढोल-नगाड़ों और संगीत के साथ इस रंगीन उत्सव का आनंद ले रहे हैं।

नेपाल की फागू पूर्णिमा का उत्साह

पड़ोसी देश नेपाल में होली को फागू पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है और यहां यह उत्सव पूरे एक हफ्ते तक चलता है। पहाड़ी इलाकों में पहले दिन जश्न मनाया जाता है जबकि तराई के मैदानी क्षेत्रों में दूसरे दिन रंगों का शानदार खेल होता है। नेपाल में यह पर्व भारत के बाद सबसे बड़े त्योहार के रूप में मनाया जाता है जहां लोग एक-दूसरे को रंग लगाकर प्यार बांटते हैं।

ईरान का तिरगान और प्राचीन संस्कृति

ईरान में 'तिरगान' नामक एक प्राचीन त्योहार मनाया जाता है जो काफी हद तक हमारी होली से मिलता-जुलता प्रतीत होता है। इस उत्सव में लोग एक-दूसरे पर पानी फेंकते हैं जो प्राचीन काल से बारिश और फसल के देवता की पूजा से जुड़ा हुआ है। भारत और ईरान की पुरानी संस्कृतियों में कई समानताएं होने के कारण इन दोनों त्योहारों का स्वरूप और खुशियां एक जैसी लगती हैं।

कैरेबियन देशों में फगवा की धूम

दक्षिण अमेरिका के सूरीनाम, गयाना और त्रिनिदाद जैसे देशों में इस त्योहार को 'फगवा' कहकर बड़े हर्षोल्लास से मनाया जाता है। इन देशों में पारंपरिक चौताल गाए जाते हैं और लोग बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में होलिका दहन भी करते हैं। रंगों का यह मेल सरहदों को पार कर पूरी मानवता को भाईचारे और एकता के एक खूबसूरत धागे में पिरोने का काम कर रहा है।

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