DMK या विजय की TVK...तमिलनाडु में किससे हाथ मिलाएगी कांग्रेस? किस असमंजस में फंसी है पार्टी?

DMK Congress alliance: तमिलनाडु में क्या कांग्रेस अपने पुराने साथी डीएमके के साथ ही रहेगी, जिसने चुनाव जीतने पर सत्ता साझा करने से साफ इनकार कर दिया है, या फिर विजय की पार्टी टीवीके से हाथ मिलाएगी।
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Tamil Nadu Politics: राजधानी नई दिल्ली में शीर्ष नेतृत्व के साथ लंबी बैठकों के बाद तमिलनाडु कांग्रेस अब पूरी तरह एक्शन मोड में दिखाई दे रही है। पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी के साथ सप्ताहांत में हुए विचार-विमर्श के बाद, तमिलनाडु कांग्रेस कमेटी ने 2026 के विधानसभा चुनावों की तैयारियों को लेकर कल एक बेहद महत्वपूर्ण कार्यकारिणी बैठक बुलाई है।

हालांकि, इन तैयारियों के बीच पार्टी के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या उसने राज्य में अपनी आगे की रणनीति स्पष्ट कर ली है? क्या कांग्रेस अपने पुराने और मजबूत सहयोगी डीएमके (DMK) के साथ ही बनी रहेगी, जिसने चुनाव जीतने के बाद सत्ता साझा करने से साफ मना कर दिया है, या फिर वह राज्य में अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी ‘टीवीके’ (TVK) के साथ मिलकर नए गठबंधन विकल्प तलाशेगी।

कांग्रेस-डीएमके गठबंधन टूटेगा?

तमिलनाडु में कांग्रेस और डीएमके का गठबंधन इस समय अपने सबसे संवेदनशील दौर से गुजर रहा है। खबरों के अनुसार, कांग्रेस आलाकमान ने राज्य इकाई को गठबंधन मर्यादा निभाने और पुराने सहयोगी के खिलाफ बयानबाजी से दूर रहने की सलाह दी है, लेकिन राज्य के नेताओं में डीएमके द्वारा सत्ता में हिस्सेदारी न देने को लेकर गहरी असंतुष्टि है। कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने इस मुद्दे पर डीएमके को घेरते हुए केरल के ‘यूडीएफ मॉडल’ का हवाला दिया है। टैगोर ने कहा कि चुनाव के बाद सहयोगियों को ‘टाटा-बाय-बाय’ कहना गठबंधन धर्म के खिलाफ है। उन्होंने डीएमके के रवैये को ‘केंद्रीकृत सोच’ बताया, जबकि डीएमके ने अब तक कांग्रेस के इस तीखे रुख पर चुप्पी बनाए रखी है।

विजय की रैलियों की भीड़ कांग्रेस को आकर्षित कर रही

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कांग्रेस के लिए यह फैसला दोधारी तलवार जैसा है। एक ओर डीएमके से अलग होने के अपने फायदे हैं, क्योंकि कांग्रेस को वहां सरकार में भागीदारी नहीं मिलती और डीएमके के विवादास्पद बयानों का असर उत्तर भारत में कांग्रेस को झेलना पड़ता है। ऐसे में विजय की टीवीके, जिसने कांग्रेस को ‘स्वाभाविक सहयोगी’ बताया है, एक नया विकल्प बन सकती है। विजय की रैलियों में जुट रही भारी भीड़ और सत्ता में हिस्सेदारी की संभावना कांग्रेस को लुभा रही है। साथ ही बीजेपी के बढ़ते प्रभाव और डीएमके के खिलाफ सत्ता विरोधी माहौल से बचने के लिए भी यह बदलाव फायदेमंद नजर आ सकता है।

बदलाव में छिपा है बड़ा जोखिम

दूसरी तरफ, इस बदलाव में बड़ा खतरा भी जुड़ा है। डीएमके एक आजमाया हुआ और मजबूत सहयोगी है, जिसने लोकसभा चुनावों में कांग्रेस को बड़ी सफलता दिलाने में अहम भूमिका निभाई है। कांग्रेस का संगठन राज्य में पहले से ही कमजोर है और उसका वोट शेयर लगातार घट रहा है। वहीं, अभिनेता विजय अभी राजनीति में नए हैं और उनकी रैलियों की भीड़ वोटों में बदलेगी या नहीं, यह कहना कठिन है।

अगर विजय का प्रभाव नहीं चला, तो कांग्रेस एक स्थिर और भरोसेमंद सहयोगी खो सकती है और राज्य की राजनीति में पूरी तरह अलग-थलग पड़ने का खतरा भी रहेगा। अब देखना होगा कि कांग्रेस नेतृत्व सत्ता में हिस्सेदारी के आकर्षण में जोखिम उठाता है या सुरक्षित रास्ता चुनते हुए पुराने साथी के साथ ही बना रहता है।

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