World TB Day 2025: केवल फेफड़े नहीं इन अंगों को भी खोखला करती है टीबी, इन लक्षणों की नहीं करें नजरअंदाज

हर साल दुनिया में विश्व तपेदिक दिवस  World TB Day मनाया जाता है। वैसे तो यह बीमारी फेफड़ों को ही प्रभावित करती है लेकिन अन्य अंगों में भी फैलने के मामले मिले है।
टीबी की बीमारी के लक्षण
टीबी की बीमारी के लक्षण (सौ. सोशल मीडिया)
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 World TB Day 2025: आजकल कौन सी बीमारी कब दस्तक दे जाए इसकी जानकारी नहीं होती है। ट्यूबरक्‍लॉसिस (तपेदिक/टीबी) इस बीमारी के बारे में तो आपने सुना होगा यह फेफड़ों को प्रभावित करता है और खोखला बना देता है। बचपन में इस बीमारी को TV से जोड़ते थे लेकिन असल में यह बीमारी टीवी से नहीं फैलती है। टीबी जैसी गंभीर बीमारी के बढ़ते मामलों को देखते हुए हर साल दुनिया में विश्व तपेदिक दिवस  World TB Day मनाया जाता है। वैसे तो यह बीमारी फेफड़ों को ही प्रभावित करती है लेकिन अन्य अंगों में भी फैलने के मामले मिले है। चलिए जानते है इस बीमारी के लक्षण और बचाव के तरीके।

क्या होती है टीबी की बीमारी

इस TB ट्यूबरक्‍लॉसिस की बीमारी की बात की जाए तो, यह ऐसा रोग है जो शरीर के किसी भी अंग को प्रभावित करता है इसमें आमतौर पर यह फेफड़ों, लिंफ ग्‍लैंड्स, हडि्डयों, पेट, मस्तिष्‍क और जेनाइटो-यूरिनरी सिस्‍टम को सबसे ज्‍यादा प्रभावित करता है।टीबी से फेफड़े सबसे ज्‍यादा प्रभावित होते हैं और यह संक्रमण मुख्‍य रूप से एक संक्रमित व्‍यक्ति से दूसरे को फैलता है। फेफड़ों के ट्यूबरक्‍लॉसिस में लंबे समय तक खांसी, बलगम के साथ खून, सांस लेने में तकलीफ और फेफड़े में दर्द हो सकता है।

जानिए टीबी के कौन से लक्षण जिन्हें नहीं करें नजरअंदाज

यहां पर टीबी के सामान्य लक्षण तो सब जानते ही है इसमें लंबे समय तक बना रहने वाला बुखार, जो आमतौर पर शाम को शुरू होता है, भूख की कमी, वज़न गिरना, कमज़ोरी महसूस होना और रात में पसीना आना शामिल हैं। चलिए जानते है टीबी के कुछ लक्षण ऐसे भी जिनके बारे में किसी को जानकारी नहीं होती है...

1- अगर आपको टीबी है तो इसके संकेत मिलने लगते है। इसमें खांसने पर खून या बलगम आना इस बीमारी का सबसे खतरनाक संकेत होते है। इससे संकेत का दिखने का मतलब है कि आपके फेफड़े इस जानलेवा बीमारी से इन्फेक्ट हो चुके हैं।
2-कई बार शरीर में एनर्जी की कमी होती है इसका कारण भी टीबी हो सकता है।
3-टीबी की बीमारी में बुखार की स्थिति भी बनती है। इसमें अक्सर रात के समय बुखार आता है। अगर आप भी इस तरह के संकेतों का अनुभव कर रहे हैं, तो बिना देर किये डॉक्टर को दिखाएं।
4-अगर खांसी लगातार 15-20 दिनों तक रहती है, तो आगे टीबी के लिए जांच करवानी चाहिए।
5- टीबी के मरीजों की भूख खत्म हो जाती है और कई घंटे कुछ न खाने पर भी उनका खाना खाने का दिल नहीं चाहता।
6-एक आप बिना वजह कई दिनों तक खांसी और बुखार के साथ कमजोरी महसूस करते रहते हैं। तो यह ट्यूबरक्लोसिस की समस्या का कारण है।
7-श्वसन से जुड़ी कई बीमारियों में सांस लेने में दिक्कत आना एक आम संकेत होता है। क्योंकि टीबी भी आमतौर पर फेफड़ों को ही प्रभावित करती है।

इन अंगों को प्रभावित करती है टीबी की बीमारी

1- ब्रेन ट्यूबरक्‍लॉसिस- इस बीमारी का असर मस्तिष्क या दिमाग से जुड़ा होता है। इसकी वजह से सिर में तेज़ दर्द, दौरे पड़ने, बेहोशी छाने, उल्टियां, लकवा, दृष्टिदोष और शारीरिक संतुलन खोने जैसी समस्‍याएं सामने आ सकती हैं।

2-बोन ट्यूबरक्‍लॉसिस - इस बीमारी का असर आपके शरीर की हड्डियों पर पड़ता है।जिसकी वजह से दर्द, विकृति और फ्रैक्‍चर तथा हाथ-पैरों में कमजोरी महसूस होती है।

3- पेट में ट्यूबरक्‍लॉसिस- यहां पर इस बीमारी का असर आपके पेट में होता है। इसमें ही पेट में दर्द, पेट में फ्लूड के जमाव की वजह से पेट में भारीपन का अहसास प्रमुख रूप से बना रहता है।

4-हमारे देश में महिलाओं और पुरुषों दोनों में ही बांझपन का सबसे आम कारण तपेदिक है। इसके अलावा, कई बार महिलाएं पेट के निचले भाग में लगातार दर्द, एमेनोरिया, मासिक धर्म के दौरान अत्‍यधिक रक्‍तस्राव और दुर्गंधयुक्‍त डिस्‍चार्ज की शिकायत भी करती हैं।

5-लिंफ नोड ट्यूबरक्‍लॉसिस होने पर गर्दन के ग्‍लैंड्स आकार में बढ़ जाते हैं और उनमें सूजन आती है, जिनमें मवाद भर सकता है और ये फट सकते हैं जिनसे लंबे समय तक पस बहता है।

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जानिए क्या है ट्यूबरक्‍लॉसिस का इलाज

यहां पर अगर आप फेफड़े से लेकर शरीर के किसी अंग में टीबी की बीमारी से पीड़ित है तो इलाज अब आसान है। ट्यूबरक्‍लॉसिस के निदान और उपचार की सुविधा डॉट्स (DOTS) सेंटर्स पर व्‍यापक रूप से मुफ्त उपलब्‍ध है। सरकार भी ट्यूबरक्‍लॉसिस के मरीज़ों को इंसेन्‍टव्‍स प्रदान करती है इसलिए यह जरूरी है हम इस रोग से प्रभावित होने पर किसी भी लक्षण की अनदेखी न करें और न ही छिपाएं। अगर इसके कोई भी लक्षण नजर आते है तो तुरंत जांच कराना चाहिए रोग की पुष्टि होने पर जल्‍द से जल्‍द इलाज शुरू करें।
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