Diabetes Or Blood Sugar: क्या डायबिटीज और ब्लड शुगर एक ही बीमारी है या अलग? आसान भाषा समझें
Blood Sugar VS Diabetes: बहुत से लोग 'ब्लड शुगर' और 'डायबिटीज' शब्द का इस्तेमाल एक-दूसरे की जगह पर करते हैं, लेकिन ये दोनों एक ही चीज नहीं हैं। आइए समझते हैं ब्लड शुगर और डायबिटीज में क्या अंतर है?
- Written By: रीता राय सागर
डायबिटीज या ब्लड शुगर (फोटो.सोशल मीडिया)
Easy Explanation Of Diabetes VS Blood Sugar: कई बार लोग ब्लड शुगर और डायबिटीज को एक ही समझने की गलती कर देते हैं, जब कि दोनों में अंतर है। डायबिटीज हड्डियों को अंदर से कमजोर कर देती है। लंबे समय तक शुगर लेवल अनियंत्रित रहने से हड्डियों का घनत्व कम जाता है और उनकी प्राकृतिक लचीलापन खत्म हो जाता है।
ब्लड शुगर का लेवल बढ़ने पर किडनी को ज्यादा ग्लूकोज बाहर निकालना पड़ता है, जिससे बार-बार पेशाब आता है और शरीर में पानी का लेवल तेजी से कम हो जाता है।
क्या होता है ब्लड शुगर
ब्लड शुगर या ग्लूकोज असल में आपके खून में मौजूद शुगर की मात्रा है। ग्लूकोज शरीर को ऊर्जा देता है, जो उसे खाना खाने से मिलता है। खाना खाने के बाद ब्लड शुगर का लेवल बढ़ना स्वाभाविक है। स्वस्थ लोगों में भी ब्लड शुगर होता है।
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खाना, शारीरिक गतिविधि, तनाव, नींद जैसे अन्य कारणों से भी दिन भर ब्लड शुगर लेवल स्वाभाविक रूप से बदलता रहता है।
क्या होता है डायबिटीज
वहीं दूसरी ओर, डायबिटीज एक ऐसी मेडिकल कंडीशन है, जिसमें शरीर ब्लड शुगर को ठीक से कंट्रोल नहीं कर पाता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि या तो पैंक्रियाज़ पर्याप्त इंसुलिन नहीं बना पाता है या शरीर इंसुलिन पर ठीक से प्रतिक्रिया नहीं दे पाता है। इसी के परिणाम स्वरूप ब्लड शुगर लेवल सामान्य से अधिक हो जाता है।
बीमारी, तनाव, कुछ खास दवाओं के असर, नींद की कमी या भारी भोजन के कारण ब्लड शुगर में अस्थायी रूप से बढ़ोतरी हो सकती है। डायबिटीज का पता लैब टेस्ट और मेडिकल पैरामीटर जैसे फास्टिंग ब्लड शुगर, HbA1c या ओरल ग्लूकोज टॉलरेंस टेस्ट के जरिए लगाया जाता है।
ब्लड शुगर और डायबिटीज में अंतर
- ब्लड शुगर एक माप है, जबकि डायबिटीज एक बीमारी है। ब्लड शुगर का होना सामान्य है, लेकिन लगातार हाई ब्लड शुगर का मतलब डायबिटीज़ हो सकता है।
- ब्लड शुगर की एक बार बढ़ी हुई रीडिंग का मतलब यह नहीं है कि व्यक्ति को डायबिटीज है। डायग्नोसिस के लिए आमतौर पर फास्टिंग ब्लड शुगर, HbA1c या ओरल ग्लूकोज टॉलरेंस टेस्ट की जरूरत होती है।
- खान-पान की अच्छी आदतें, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और वेट को कंट्रोल करके ब्लड शुगर को नियंत्रण में रखने और मधुमेह होने के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है।
- नियमित जांच जरूरी है, क्योंकि डायबिटीज धीरे-धीरे विकसित होता है। आम तौर पर शुरुआती चरणों में इसके कोई लक्षण दिखाई नहीं देते।
- ब्लड शुगर के असामान्य स्तर का जल्दी पता चलने पर समय रहते जीवनशैली में बदलाव और डॉक्टरी मदद ली जा सकती है। इससे दिल, किडनी, आंखों और नसों को प्रभावित करने वाली दीर्घकालिक परेशानियों को रोका जा सकता है।
