
गर्भवती महिला का हेल्थ चेकअप करता डॉक्टर (सौ. एआई)
Pregnancy Health Tips: प्रेग्नेंसी के दौरान शरीर को मां और बच्चे दोनों को ऑक्सीजन और पोषण की सप्लाई करनी पड़ती है जिसकी वजह से हीमोग्लोबिन का स्तर सही होना जरूरी है। एनीमिया की कमी को नजरअंदाज करना प्रसव के दौरान कई समस्याएं पैदा कर सकता है।
गर्भावस्था का समय महिला के जीवन का सबसे संवेदनशील दौर होता है। इस दौरान शरीर में हीमोग्लोबिन की भूमिका लाइफलाइन जैसी होती है। हीमोग्लोबिन ही वह माध्यम है जो फेफड़ों से ऑक्सीजन लेकर गर्भ में पल रहे शिशु तक पहुंचाता है। यदि इसकी मात्रा कम हो जाए तो थकान, चक्कर आना और सांस फूलने जैसी समस्याएं शुरू हो जाती हैं जो आगे चलकर मां और बच्चे दोनों के लिए जोखिम पैदा करती हैं।
पालक, मेथी और सरसों जैसी हरी पत्तेदार सब्जियां आयरन और फोलेट का पावरहाउस हैं। इसके अलावा चुकंदर लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण में जादू की तरह काम करता है। फलों में अनार, सेब और आंवला को प्राथमिकता दें।
खजूर, किशमिश और अंजीर को रात भर भिगोकर सुबह खाने से शरीर को तुरंत ऊर्जा और आयरन मिलता है। काले तिल और गुड़ का सीमित मात्रा में सेवन भी हीमोग्लोबिन बढ़ाने का एक पारंपरिक और प्रभावी तरीका है।
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सिर्फ आयरन खाना काफी नहीं है शरीर को उसे सोखने के लिए विटामिन-सी की जरूरत होती है। इसलिए अपने भोजन के साथ नींबू पानी, संतरा या मौसमी को जरूर शामिल करें।
भोजन के तुरंत बाद चाय या कॉफी पीने की आदत आयरन के अवशोषण को रोक देती है। यदि आप आयरन की गोलियां ले रही हैं तो चाय और दवा के बीच कम से कम कुछ घंटे का अंतर जरूर रखें।
अक्सर महिलाएं पेट में जलन या कब्ज के डर से आयरन की गोलियां छोड़ देते हैं जो खतरनाक हो सकता है। बिना डॉक्टर की अनुमति के दवा बंद न करें। इसके बजाय दवा लेने का समय बदलें या हल्की सैर और प्राणायाम को दिनचर्या का हिस्सा बनाएं।
याद रखें: हीमोग्लोबिन का सही स्तर एक स्वस्थ डिलीवरी और स्वस्थ बच्चे की पहली सीढ़ी है। किसी भी बदलाव से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें।






