
बच्चे का ब्लड प्रेशर चेक करता डॉक्टर (सौ. फ्रीपिक)
Pediatric Hypertension: हाई ब्लड प्रेशर की समस्या आजकल सिर्फ युवाओं में ही नहीं बल्कि बच्चों में भी देखी जा सकती है। यह एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या बनकर उभर रहा है। हमारे शरीर में धमनियां दिल से निकले खून को शरीर के अन्य अंगों तक पहुंचाती है। जब इस खून का दबाव धमनियों की दीवारों पर सामान्य से अधिक हो जाता है तो उसे हाई ब्लड प्रेशर कहा जाता है। बच्चों के मामले में अगर ब्लड प्रेशर उनकी उम्र, लंबाई और लिंग के हिसाब से 95 परसेंटाइल ऊपर है तो इसे पीडियाट्रिक हाइपरटेंशन कहा जाता है।
अगर आपको बच्चों में इसके कुछ सामान्य लक्षण नजर आते हैं तो इसे बिल्कुल भी नजर अंदाज नहीं करना चाहिए। यह आगे चलकर गंभीर समस्या का रूप ले सकता है।
अक्सर माता-पिता बच्चों के सिरदर्द को पढ़ाई का तनाव या थकान समझ कर टाल देते हैं। लेकिन हाई ब्लड प्रेशर के कारण होने वाला सिरदर्द काफी तेज और लगातार बना रह सकता है। अगर बच्चा बार-बार सिरदर्द की शिकायत करे तो उसका बीपी चेक कराना अनिवार्य है।
जब ब्लड प्रेशर बहुत अधिक होता है तो मस्तिष्क तक ऑक्सीजन और खून की पर्याप्त आपूर्ति बाधित हो सकती है। इसके कारण बच्चों को अचानक चक्कर आना या धुंधला महसूस होकर बेहोश होने जैसी समस्या हो सकती है। यह एक आपातकालीन संकेत है।
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यदि आपका बच्चा खेलते समय या सामान्य शारीरिक गतिविधि करते समय बहुत जल्दी थक जाता है या उसे सांस लेने में कठिनाई महसूस होती है तो यह दिल पर पड़ रहे अतिरिक्त दबाव का संकेत हो सकता है। इसे नजरअंदाज करना भविष्य में हृदय संबंधी जटिलताओं को बढ़ा सकता है।
हाई ब्लड प्रेशर का सीधा असर आंखों की रेटिना पर पड़ता है। यदि बच्चे को अचानक धुंधला दिखाई देने लगे या उसे देखने में परेशानी हो तो यह उच्च रक्तचाप का गंभीर लक्षण हो सकता है।
डॉक्टरों के अनुसार बच्चों के आहार में नमक की मात्रा कम करके, जंक फूड से दूरी बनाकर और रोजाना कम से कम एक घंटा शारीरिक खेल दूर को रूटीन में शामिल करें। इससे समस्याओं को काफी हद तक कम किया जा सकता है। अगर बच्चों को किसी तरह की समस्या है तो तुरंत डॉक्टर की सलाह लें।






