महाराष्ट्र में शिक्षकों के प्रमोशन पर मचा बवाल; संगठनों ने RTE नियमों को लेकर सरकार को दी चुनौती

Maharashtra Teacher News: महाराष्ट्र स्टेट शिक्षण क्रांति संगठन ने राज्य सरकार से TET नियमों और इन-सर्विस शिक्षकों की वरिष्ठता पर सुप्रीम कोर्ट में स्पष्टीकरण देने की मांग की है।
Supreme Court GR clarification on Maharashtra Teachers' TET promotion dispute
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस व महाराष्ट्र स्टेट शिक्षण क्रांति संगठन के प्रदेश अध्यक्ष सुधीर घागस (सोर्स: सोशल मीडिया)
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TET Mandatory Controversy: महाराष्ट्र में शिक्षकों की पदोन्नति और टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (TET) की अनिवार्यता को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। महाराष्ट्र स्टेट शिक्षण क्रांति संगठन ने राज्य सरकार को पत्र लिखकर मांग की है कि राइट टू एजुकेशन (RTE) फ्रेमवर्क के तहत जारी किए गए सभी सरकारी प्रस्तावों (GRs) को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष मजबूती से रखा जाए, ताकि कार्यरत शिक्षकों के भविष्य पर मंडरा रहा खतरा टल सके।

वरिष्ठता बनाम योग्यता का विवाद

संगठन के प्रदेश अध्यक्ष सुधीर घागस ने स्कूल शिक्षा मंत्री दादा भुसे और प्रधान सचिव रंजीत सिंह देओल को सौंपे ज्ञापन में प्रशासनिक अव्यवस्था का मुद्दा उठाया है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार, कक्षा 1 से 8 तक के सभी शिक्षकों के लिए TET अनिवार्य है। जो शिक्षक RTE एक्ट लागू होने से पहले नियुक्त हुए थे, उन्हें भी दो साल के भीतर यह परीक्षा पास करने का निर्देश दिया गया है। समस्या तब शुरू हुई जब पदोन्नति की बात आई। घागस का कहना है कि वर्तमान में प्रशासनिक स्तर पर TET पास जूनियर शिक्षकों को उन सीनियर शिक्षकों से पहले प्रमोट किया जा रहा है जिन्होंने अभी तक परीक्षा पास नहीं की है। यह सीधे तौर पर 'महाराष्ट्र प्राइवेट स्कूल्स एम्प्लॉइज रूल्स, 1981' के शेड्यूल F का उल्लंघन है, जहाँ वरिष्ठता सेवा की निरंतरता से तय होती है।

गलत तरीके से थोपा जा रहा है नियम?

संगठन ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ शिक्षा अधिकारी अपनी शक्तियों का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं। RTE एक्ट केवल कक्षा 1 से 8 (6 से 14 वर्ष के बच्चे) तक सीमित है। इसके बावजूद, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्कूलों में भी पदोन्नति के लिए TET की मांग की जा रही है, जो पूरी तरह से नियम विरुद्ध है।

पासिंग मार्क्स कम करने की अपील

शिक्षकों के हितों को ध्यान में रखते हुए संगठन ने महाराष्ट्र सरकार से मांग की है कि TET के लिए क्वालिफाइंग क्राइटेरिया में बदलाव किया जाए। वर्तमान में जनरल कैटेगरी के लिए 60% और आरक्षित वर्ग के लिए 55% अंक अनिवार्य हैं। संगठन का प्रस्ताव है कि इसे घटाकर सभी के लिए एक समान 40% कर दिया जाए ताकि अनुभवी शिक्षक अपनी नौकरी और पद सुरक्षित रख सकें।

अंत में, सुधीर घागस ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और विधायक रवींद्र चव्हाण से भी हस्तक्षेप करने की गुहार लगाई है ताकि महाराष्ट्र के हजारों शिक्षकों के हितों की रक्षा हो सके।

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