Hindi news, हिंदी न्यूज़, Hindi Samachar, हिंदी समाचार, Latest Hindi News
X
  • देश
  • महाराष्ट्र
  • मध्य प्रदेश
  • विदेश
  • चुनाव
  • खेल
  • मनोरंजन
  • नवभारत विशेष
  • वायरल
  • धर्म
  • लाइफ़स्टाइल
  • बिज़नेस
  • करियर
  • टेक्नॉलजी
  • यूटिलिटी
  • हेल्थ
  • ऑटोमोबाइल
  • वीडियो
  • वेब स्टोरीज
  • फोटो
  • होम
  • विडियो
  • फटाफट खबरें

Periods Cycle Explained: क्या है पीरियड्स, ओवुलेशन और फर्टाइल विंडो? जानें मासिक चक्र का पूरा विज्ञान

All About Menstrual Cycle: मासिक धर्म एक शारीरिक प्रक्रिया है। सभी लड़कियों में मासिक धर्म की उम्र अलग-अलग हो सकती है। मासिक धर्म शुरू होने की औसत आयु 12 वर्ष है। वहीं, 50 साल की उम्र के बाद पीरियड्स

  • Written By: रीता राय सागर
Updated On: Jun 02, 2026 | 07:41 AM

मासिक चक्र (फोटो.सोशल मीडिया)

Follow Us
Follow Us:

Menstrual Cycle Explained: मासिक धर्म या चक्र एक नेचुरल प्रोसेस है, जो हर महीने महिलाओं के शरीर में होती है। यह कई चरणों से गुजरती है और प्रेग्नेंसी की संभावना को कंट्रोल करती है। महिलाओं के शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण यह एक स्टेज से दूसरे स्टेज में बदलता रहता है।

मासिक धर्म चक्र की गिनती पहले दिन से की जाती है, जब ब्लीडिंग शुरू होती है। आमतौर पर, एक महिला का चक्र 28 दिनों का होता है। सामान्य तौर पर, मासिक धर्म को चार स्टेज में बांटा गया है-

  • मासिक धर्म चरण (दिन 1 से 5)
  • फॉलिक्युलर स्टेज (दिन 1 से 13)
  • ओव्यूलेशन पीरियड (दिन 14)
  • ल्यूटियल स्टेज (दिन 15 से 28)

मासिक चक्र (फोटो. सोशल मीडिया)

सम्बंधित ख़बरें

Skin Care In Summer: गर्मी में त्वचा दे रही ये 5 खतरनाक संकेत? नजरअंदाज किया तो बढ़ सकती है बड़ी परेशानी!

Lauki Kalakand: गर्मी के मौसम में अपने हाथों से बनाएं ‘लौकी कलाकंद’, ऐसी मिठाई जो सेहत के लिए भी संजीवनी सी

Women Health: हर महिला को करवानी चाहिए ये 5 जरूरी हेल्थ स्क्रीनिंग, समय रहते चल जाएगा गंभीर बीमारियों का पता

Eye Care Tips:आंखों की अच्छी रोशनी के लिए अपनी डाइट में शामिल करें ये चीज़ें, बुढ़ापे में भी नहीं लगेगा चश्मा

मासिक धर्म

मासिक धर्म चक्र का पहला चरण होता है। यही वह समय होता है, जब पीरियड्स शुरू होते हैं और आमतौर पर यह पांच दिन तक चलते हैं। आखिर शरीर में ब्लीडिंग क्यों होती है।

आसान भाषा में समझें, तो यह ब्लड गर्भाशय (Uterus) की मोटी परत (Lining Of Uterus) के श्रेडिंग से निकलता है। जब कोई महिला गर्भधारण नहीं करती है, तब शरीर को इस  परत की जरूरत नहीं होती और यह योनि के जरिए बाहर निकलने लगती है। इस दौरान निकलने वाला ब्लड मेंस्ट्रुअल फ्लूइड, म्यूकस और टिश्यू होता है।

मासिक धर्म के पहले चरण के लक्षण

  • पेट में ऐंठन (क्रैम्प)
  • ब्लोटिंग
  • सिरदर्द
  • मूड स्विंग्स
  • स्तनों में कोमलता
  • चिड़चिड़ापन
  • थकान या कमजोरी
  • पीठ के निचले हिस्से में दर्द
  • लोअब अबडोमेन में दर्द

मासिक चक्र (फोटो. सोशल मीडिया)

फॉलिक्यूलर फेज

मासिक चक्र के साथ शुरू होने वाला फॉलिक्यूलर फेज आमतौर पर 13 दिनों तक चलता है। इस दौरान मस्तिष्क के एक हिस्से हाइपोथैलेमस से पिट्यूटरी ग्लैंड को एक संकेत भेजा जाता है, जिससे फॉलिकल-स्टिमुलेटिंग हार्मोन रिलीज होता है।

इसी हार्मोन की वजह से ओवरी में 5 से 20 छोटे फॉलिकल्स बनते हैं। हर फॉलिकल में एक अपरिपक्व अंडा होता है, लेकिन केवल सबसे हेल्दी अंडा ही पूरी तरह परिपक्व होता है। बाकी फॉलिकल्स को बॉडी दोबारा से अब्जॉर्ब कर लेता है। यह 13-16 दिनों तक चलता है।

शरीर में आने वाले बदलाव

  • एनर्जी लेवल का बढ़ना
  • त्वचा में निखार
  • यौन इच्छा (लिबिडो) में वृद्धि

ओव्यूलेशन पीरयड (दिन 14)

मासिक चक्र का यह चरण फर्टाइल विंडो कहलाता है। यह पीरयड प्रेग्नेंसी के लिए उपयुक्त होता है। मासिक धर्म चक्र के 14वें दिन, पिट्यूटरी ग्लैंड एक हार्मोन रिलीज करता है, जिसमें ओवरी) से मेच्योर एग निकलते है। यह एग फैलोपियन ट्यूब में प्रवेश करते है और यूटेरस की ओर जाते है। इन एग्स की लाइफ 24 घंटे की होती है। इस दौरान यदि एग और स्पर्म नहीं मिलते है, तो यह नष्ट हो जाता है।

मासिक चक्र (फोटो.सोशल मीडिया)

ओव्यूलेशन पीरियड के लक्षण

  • सर्वाइकल म्यूकस में बदलाव
  • सेंसिबिलिटी का बढ़ना (गंध व स्वाद का अधिक महसूस होना)
  • ब्रेस्ट सॉफ्टनेस या ब्रेस्ट पेन
  • हल्का पेट दर्द या ऐंठन
  • डिस्चार्ज
  • हल्की मिचली
  • स्पॉटिंग
  • शरीर के तापमान में बदलाव
  • लिबिडो यानि यौन इच्छा में बदलाव

ल्यूटियल स्टेज (दिन 15 से 28)

इस स्टेज में शरीर अगले मासिक चक्र के लिए खुद को तैयार करता है। जैसे-जैसे हार्मोन रिलीज होता है, वैसे-वैसे शरीर की एनर्जी लो होने लगती है। जब फॉलिकल एग्स को छोड़ देता है, तो कॉर्पस ल्यूटियम डेवलप होता है। यह प्रोजेस्टेरोन और कम मात्रा में एस्ट्रोजन हार्मोन रिलीज करती है। कॉर्पस ल्यूटियम एक सिस्ट की तरह होती है, जो हर माह महिलाओं की ओवरी में बनती है। यह ओवरी में मौजूद कोशिकाओं से बनती है और मासिक चक्र के अंत में विकसित होती है।

ल्यूटियल फेज में होने वाले बदलाव

  • ब्लोटिंग
  • ब्रेस्ट स्वेलिंग, दर्द औऱ सॉफ्टनेस
  • मूड स्विंग
  • सिरदर्द
  • हल्का वजन बढ़ना
  • लिबिडो में बदलाव
  • मीठा या चटपटा खाने की इच्छा
  • नींद न आना

मेंस्ट्रुअल साइकिल को कैसे ट्रैक करें

हर किसी का मासिक चक्र अलग होता है। इसका आकलन करने के लिए आपको अपने पीरियड के पहले दिन से शरू करते हुए पीरियड के आखिरी दिन तक गिनती करना होगा। उदाहरण के लिए, अगर आपका पीरियड पहली जनवरी को शुरू और 5 जनवरी को ख़त्म होता है, तो आपको 1 जनवरी से गिनते हुए अगले पीरियड के आने तक इसकी गिनती करनी होगी और अगर आपका अगला पीरियड 30 जनवरी को आया तो आपकी मेंस्ट्रुअल साइकिल 1 जनवरी से शुरू होकर 30 जनवरी तक रहेगी, जिसका मतलब है कि आपकी मेंस्ट्रुअल साइकिल 30 दिनों की है।

इस दौरान ध्यान देने वाली बात यह है कि पीरियड से पहले होने वाली स्पॉटिंग को पीरियड के पहले दिन के रूप में नहीं गिना जा सकता है। पीरियड तभी शुरू होता है जब रेगुलर ब्लीडिंग होती है।

पीरयड्स में अनियमितता के कारण

  • प्रेगनेंसी

एक शादी-शुदा महिला अगर आप सेक्सुअली एक्टिव है और आपका पीरियड नहीं आया है, तो हो सकता है कि आप प्रेगनेंट हों, लेकिन ऐसा हर बार जरूरी नहीं होता है। प्रेगनेंसी के शुरूआती लक्षणों जैसे टेंडर ब्रेस्ट, बहुत ज़्यादा थकान, मॉर्निंग सिकनेस, उल्टी आना, आदि का ध्यान रखें और इन लक्षणों में प्रेग्नेंसी टेस्ट करनी चाहिए।

मासिक धर्म (फोटो.सोशल मीडिया)

  • हार्मोनल इंबैलेंस

रिसर्च बताती है कि मेंस्ट्रुएशन से जुड़ी अनियमितताओं का सीधा संबंध हार्मोनल डिसऑर्डर जैसे हाइपोथायरॉइडिज़्म से है। अगर इररेगुलर पीरियड के साथ-साथ अचानक वेटलॉस या वेटगेन होता है, हेयरफॉल या ब्लोटिंग व इरिटेबल बावेल जैसी समस्या हो रही है, तो डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

  • पीएमओएस

यह इररेगुलर पीरियड का सबसे आम लक्षण है। इसके अलावा वजन बढ़ना, अत्यधिक बाल झड़ना, चेहरे पर बाल आना आदि। पीएमओएस एक सिंड्रोम है, जिसमें महिलाओं में एण्ड्रोजन की मात्रा बढ़ जाती है।

  • तनाव

तनाव और एंग्जायटी आपकी मेंस्ट्रुअल साइकिल पर बहुत गहरा असर डालते हैं। मेंस्ट्रुअल साइकिल से जुड़ी अनियमितता, पीरियड में देरी या फिर छोटी मेंस्ट्रुअल साइकिल, इन सबके लिए तनाव एक कारण हो सकता है, जो महिलाएं ज़्यादा चिंता करती हैं, उनमें मेंस्ट्रुअल अनियमितता बहुत आम है।

मासिक चक्र (फोटो. सोशल मीडिया)

ये भी पढ़ें- Women Health: हर महिला को करवानी चाहिए ये 5 जरूरी हेल्थ स्क्रीनिंग, समय रहते चल जाएगा गंभीर बीमारियों का पता

मेनोपॉज

यह एक नेचुरल बायोलॉजिकल प्रोसेस है। इस स्टेज में मासिक धर्म धीरे-धीरे बंद होने लगता है। आमतौर पर यह 40 से 50 की उम्र में होता है। लगातार 12 महीने तक पीरियड्स न आने का मतलब है मासिक धर्म का समाप्त होना। यह तीन चरणों में होता है- प्री मेनोपॉज, मेनोपॉज और पोस्ट मेनोपॉज। इस दौरान आम तौर पर हॉट फ्लैशेज, रात को पसीना आना, अनियमित मासिक चक्र, मूड स्विंग, चिड़चिड़ापन और नींद न आना जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। प्री-मेनोपॉज और मेनोपॉज के दौरान, एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन के स्तर में उतार-चढ़ाव होता है।

All about menstrual cycle know everything related to periods fertility and ovulation

Get Latest   Hindi News ,  Maharashtra News ,  Entertainment News ,  Election News ,  Business News ,  Tech ,  Auto ,  Career and  Religion News  only on Navbharatlive.com

Published On: Jun 02, 2026 | 07:41 AM

Topics:  

  • Health Tips
  • Healthy Body
  • Hindi News
  • Lifestyle News
  • Menstrual Leave
  • period
  • Periods Pain
  • Women Health

Popular Section

  • देश
  • विदेश
  • खेल
  • लाइफ़स्टाइल
  • बिज़नेस
  • वेब स्टोरीज़

States

  • महाराष्ट्र
  • उत्तर प्रदेश
  • मध्यप्रदेश
  • दिल्ली NCR
  • बिहार

Maharashtra Cities

  • मुंबई
  • पुणे
  • नागपुर
  • ठाणे
  • नासिक
  • अकोला
  • वर्धा
  • चंद्रपुर

More

  • वायरल
  • करियर
  • ऑटो
  • टेक
  • धर्म
  • वीडियो

Follow Us On

Contact Us About Us Disclaimer Privacy Policy Terms & Conditions Author
Marathi News Epaper Hindi Epaper Marathi RSS Sitemap

© Copyright Navbharatlive 2026 All rights reserved.