Ustad Bade Gulam Ali: बड़े गुलाम अली खां की आवाज सुनकर नाचने लगते थे मोर, उन्हें कहा जाता था तानसेन

Ustad Bade Gulam Ali Khan: उस्ताद बड़े गुलाम अली खां का जन्म पाकिस्तान के लाहौर स्थित केसुर गांव में 2 अप्रैल 1902 को हुआ था। आज भी उनका नाम बड़े अदब के साथ लिया जाता है।
Ustad Bade Gulam Ali Khan Birth Anniversary
उस्ताद बड़े गुलाम अली खां की आवाज सुनकर नाचने लगे थे मोर
Published on: 
Updated on: 

Ustad Bade Gulam Ali Khan: उस्ताद बड़े गुलाम अली खां को भारत का तानसेन कहा जाता था, उनका जन्म पाकिस्तान के लाहौर स्थित केसुर गांव में 2 अप्रैल 1902 को हुआ था। संगीत उन्हें विरासत में मिली थी, उनके पिता अली बख्श खां सारंगी वादक और गायक थे। वहीं बड़े गुलाम अली खां को संगीत की शिक्षा अपने चाचा काले खान से मिली। वह भारत के सर्वाधिक प्रतिभाशाली गायक माने जाते थे। उनके बारे में यह किस्सा मशहूर है कि उन्होंने कभी भी फिल्म के लिए गाना नहीं गया, लेकिन के आसिफ ने उन्हें मुग़ल-ए-आज़म में गाने के लिए मना लिया था। उस फिल्म में उन्होंने तानसेन के किरदार को अपनी आवाज दी थी। 1947 में जब भारत का बंटवारा हुआ तो उस्ताद बड़े गुलाम अली खां लाहौर चले गए थे। लेकिन उनका मन वहां नहीं लगा। वह वापस लौटकर भारत आए। 1957 में उन्हें भारत की नागरिकता मिल गई थी।

बड़े गुलाम अली खां के बारे में यह कहा जाता है कि जब वह राग मल्हार गाते थे तो बादलों की गड़गड़ाहट सुनाई देने लगती थी, यही कारण है कि उन्हें भारत का तानसेन कहा जाता था। उनके बारे में यह भी कहा जाता है कि एक दिन अफगानिस्तान की शाह ने खुले बाग में संगीत की महफिल सजाई थी और बड़े गुलाम अली खां वहां गाना गा रहे थे, उनके गाने को सुनकर मोर पंख फैला कर नाचने लगे। बड़े गुलाम अली खां के गाने को लेकर इस तरह की कई कहानी सुनाने को मिलती है।

बड़े गुलाम अली खां की गायकी में वह ताकत थी कि महात्मा गांधी और जवाहरलाल नेहरू भी उनकी गायकी के मुरीद थे। कहा जाता है कि बड़े गुलाम अली खां एक महान शास्त्रीय संगीतकार थे। जिनकी गायकी में ठुमरी और ख्याल दोनों का अद्भुत मिश्रण देखने को मिलता था। 25 अप्रैल 1968 को उनकी मृत्यु हो गई थी, लेकिन आज भी बड़े गुलाम अली खां का नाम गायकी की दुनिया में बड़े अदब से लिया जाता है।

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com