
सेलिना जेटली के भाई विक्रांत जेटली (फोटो-सोर्स,सोशल मीडिया)
Vikrant Jaitly UAE Custody: बॉलीवुड अभिनेत्री सेलिना जेटली के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। उनके भाई और रिटायर्ड मेजर विक्रांत जेटली, जो सितंबर 2024 से यूएई की हिरासत में हैं, उनके मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने अहम हस्तक्षेप किया है। कोर्ट ने विदेश मंत्रालय (MEA) को निर्देश दिया है कि वह अबूधाबी स्थित खालिद अलमरी लॉ फर्म को इस केस की जिम्मेदारी सौंपे, ताकि विक्रांत को प्रभावी कानूनी सहायता मिल सके।
मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने साफ कहा कि विदेशी हिरासत में बंद किसी भी भारतीय नागरिक को उचित कानूनी प्रतिनिधित्व और सुरक्षा मिलना जरूरी है। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि यदि विदेश मंत्रालय को लॉ फर्म से संपर्क करने या आदेश लागू करने में किसी तरह की परेशानी आती है, तो उसे हलफनामे के जरिए अदालत को सूचित करना होगा।
दिल्ली हाईकोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि विक्रांत जेटली तक तुरंत कानूनी पहुंच बनाई जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि उनकी सुरक्षा से कोई समझौता न हो। इसके लिए विदेश मंत्रालय को स्थानीय लॉ फर्म के माध्यम से आवश्यक कदम उठाने के आदेश दिए गए हैं। इस मामले की अगली सुनवाई 10 फरवरी को तय की गई है।
यह मामला पिछले कई महीनों से सेलिना जेटली और उनके परिवार के लिए गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है। सेलिना के अनुसार, उनके भाई मेजर (रिटायर्ड) विक्रांत कुमार जेटली 2016 से दुबई में रह रहे थे, लेकिन सितंबर 2024 में उन्हें एक राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामले में हिरासत में लिया गया। इसके बाद से परिवार का उनसे कोई सीधा संपर्क नहीं हो पाया।
सेलिना जेटली ने अपनी याचिका में आरोप लगाया कि उनके भाई को न तो उचित कानूनी सहायता दी गई और न ही चिकित्सकीय सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं। उन्होंने यह भी कहा कि पिछले लगभग 15 महीनों से उनका भाई परिवार से पूरी तरह कट चुका है, जिससे उनकी हालत और अधिकारों को लेकर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
ये भी पढ़ें- चिरंजीवी की ‘विश्वंभरा’ क्यों हो रही है लेट? सामने आई देरी की असली वजह, मेकर्स ने तोड़ी चुप्पी
एक्ट्रेस ने कोर्ट को बताया कि विदेश मंत्रालय से बार-बार गुहार लगाने के बावजूद उन्हें संतोषजनक मदद नहीं मिली, जिसके बाद उन्हें न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ा। सेलिना का कहना है कि उनके भाई तक सही कानूनी मदद और संवाद की सुविधा बेहद जरूरी है, ताकि वे अपनी स्थिति, अधिकारों और सुरक्षा को समझ सकें। फिलहाल, अब सबकी नजरें 10 फरवरी को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां इस संवेदनशील मामले में आगे की दिशा तय होगी।
(एजेंसी इनपुट के साथ)






