
Kangna Ranaut Budget Reaction (फोटो क्रेडिट-इंस्टाग्राम)
Kangna Ranaut On Budget: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को संसद में वित्त वर्ष 2026-27 का केंद्रीय बजट पेश किया। अपने नौवें बजट भाषण में उन्होंने भारत को आर्थिक महाशक्ति बनाने के साथ-साथ पर्यावरण और पर्यटन के बीच संतुलन बनाने पर जोर दिया। इस बजट का एक मुख्य आकर्षण पहाड़ी राज्यों और तटीय क्षेत्रों में पारिस्थितिक रूप से टिकाऊ पर्यटन (Sustainable Tourism) को बढ़ावा देना रहा। सरकार ने पर्यटन को स्थानीय रोजगार सृजन का एक प्रमुख जरिया बनाने का लक्ष्य रखा है।
बजट में हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर जैसे पहाड़ी राज्यों के लिए विशेष ‘पर्वतीय ट्रेल्स’ (Mountain Trails) विकसित करने की घोषणा की गई है। ये ट्रेल्स न केवल ट्रेकिंग और हाइकिंग के शौकीनों को आकर्षित करेंगे, बल्कि वन्यजीवों के संरक्षण में भी मददगार साबित होंगे। इसके अलावा, ओडिशा, कर्नाटक और केरल जैसे राज्यों में कछुआ प्रजनन स्थलों की रक्षा के लिए ‘टर्टल ट्रेल्स’ (Turtle Trails) का निर्माण किया जाएगा।
हिमाचल प्रदेश के मंडी से भाजपा सांसद और अभिनेत्री कंगना रनौत ने इन घोषणाओं का स्वागत किया है। उन्होंने बजट को ‘विकसित भारत’ की दिशा में एक बड़ा कदम बताया। कंगना ने कहा, “यह बजट हमारे पहाड़ी राज्यों की अर्थव्यवस्था को नई उड़ान देगा। ईको-फ्रेंडली ट्रेल्स से पर्यटन बढ़ेगा और हमारे युवाओं को रोजगार मिलेगा। हम विकसित भारत के लक्ष्य के बहुत करीब पहुंच गए हैं।”
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सरकार ने पर्यटन सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने के लिए एक अभिनव पायलट प्रोजेक्ट की शुरुआत की है। इसके तहत देश के 20 प्रमुख पर्यटन स्थलों पर 10,000 टूर गाइड्स को 12 हफ्तों का उच्च गुणवत्ता वाला प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह प्रशिक्षण भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM) के सहयोग से हाइब्रिड मोड में आयोजित होगा। इसके अतिरिक्त, एक ‘राष्ट्रीय डिजिटल डेस्टिनेशन नॉलेज ग्रिड’ तैयार किया जाएगा, जो भारत की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत की जानकारी एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराएगा।
पर्यावरण संरक्षण को पर्यटन से जोड़ते हुए बजट में पूर्वी घाट की अराकू घाटी और पश्चिमी घाट के पुडिगई मलै में नए पर्यटन ट्रेल्स विकसित करने का प्रस्ताव रखा गया है। सरकार का मानना है कि इन क्षेत्रों में प्रकृति-आधारित पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। इन योजनाओं से न केवल विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ेगा, बल्कि स्थानीय समुदायों को आत्मनिर्भर बनने में भी मदद मिलेगी।






