
आरमोरी विधानसभा क्षेत्र का इतिहास
गढ़चिरौली: महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में महज कुछ महिनों का समय बचा है। हालांकि अभी निर्वाचन आयोग की ओर से तारीख की घोषणा नहीं की गई है, लेकिन साल के अंत तक चुनाव होना तय है। ऐसे में हम राज्य के सभी विधानसभा सीटों के इतिहास के बारे में बात करेगे। आज हम बात करेंगे गढ़चिरौली लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र की अरमोरी विधानसभा सीट के बारे में। 2019 तक के डेटा के मुताबिक अरमोरी में कुल 182659 वोटर हैं।
जिनमें से 127794 पुरुष और 125348 महिला मतदाता हैं। वहीं 1962 के बाद कभी भी इस सीट से अनुसुचित जनजाती के अलावा दुसरे जाती के उम्मदीवार को जीत नहीं मिली है।
बता दें कि अरमोरी गढ़चिरौली जिले में स्थित है। इस सीट से पिछले विधानसभा चुनाव यानी 2019 में बीजेपी विधायक गजबे कृष्णा दामाजी ने 75,077 वोट से जीत हासिल की थी। वहीं दूसरे नंबर पर कांग्रेस पार्टी के विधायक आनंदराव गंगाराम गेदाम रहें। दोनों में जीत का अंतर 21,667 वोटों का रहा। वहीं तीसरी नंबर पर चंदेल सुरेंद्रसिंह बजरंग सिंह का नाम रहा। जिन्होंने 25027 वोट प्राप्त किए थे।
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इससे पहले 2014 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के विधायक कृष्णा दामाजी गजबे ने 60,413 वोट प्राप्त कर जीत दर्ज की थी। वहीं दूसरे नंबर पर कांग्रेस पार्टी के आनंद राव गंगाराम गेदाम रहें। जिन्हें कुल 47680 वोट मिले थे। दोनों के जीत का में 12,733 वोटों का अंतर रहा था। वहीं तीसरे स्थान पर बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवार कोमल रवि बरसागडे (ताडम) का नाम था। जिन्होंने कुल 15697 वोट हासिल किया था।
इससे पहले इस सीट पर 2009 में कांग्रेस पार्टी ने जीत दर्ज की थी। कांग्रेस विधायक आनंदराव गंगाराम गेदाम को 41257 वोट मिले थे। दूसरे नंबर पर स्वतंत्र उम्मीदवार चंदेल सुरेंद्रसिंह बजरंग सिंह का नाम रहा। जिन्होंने कुल 35702 वोट हासिल किया था। वहीं तीसरे नंबर पर शिवसेना उम्मीदवार रान्धये श्रवण सीताराम का नाम रहा था। जिन्हें कुल 16933 मत प्राप्त हुए थे।
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चुनावी इतिहास को देखा जाए तो पीछले दो चुनाव से भारतीय जनता पार्टी ने कुर्सी पकड़ रखी है। ऐसे में 2024 में होने वाले विधानसभा चुनाव में भी पार्टी अपनी कुर्सी बचाने की पूरी कोशिश करेगी। हालांकि दो दशकों से यहां के मतदाताओं ने इस सीट पर दो-दो टर्म के लिए पार्टियों पर भरोसा जताया है। ऐसे में यह उम्मीद की जा सकती है कि इस बार कांग्रेस पार्टी के पाले में पासा जा सकता है। हालंकि राजनीति में कुछ भी फिक्स नहीं है। विधानसभा चुनाव में स्थानिय पार्टी और नेताओं पर भी काफी कुछ निर्भर करता है।






