इथियोपिया की ज्वालामुखी की राख पहुंची भारत, वायु प्रदूषण पर कोई असर ना होने की खबर

Ash Cloud From Volcano: इथियोपिया के हैली गुब्बी ज्वालामुखी की राख 120 किमी/घंटा की रफ्तार से भारत पहुंची। कई राज्यों में आसमान धुंधला दिखा, लेकिन AQI पर बड़ा असर नहीं होगा।
Ash Cloud From Volcano
इथियोपिया के हैली गुब्बी ज्वालामुखी की राख (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Ethiopia Hayli Gubbi Volcanic Ash Reaches India: दिल्ली और उत्तर भारत पहले ही जहरीली हवा से जूझ रहे हैं। अब इथियोपिया में हुए ज्वालामुखी विस्फोट की राख भी भारत तक आ गई है। यह राख वायुमंडल के ऊपरी हिस्से में 25,000-45,000 फीट तक फैल गई है। हालांकि विशेषज्ञों ने कहा है कि जमीन पर प्रदूषण में खास बढ़ोतरी नहीं होगी।

इथियोपिया के हैली गुब्बी ज्वालामुखी की राख पहुंची भारत

इथियोपिया के हैली गुब्बी ज्वालामुखी के फटने से भारी मात्रा में राख वायुमंडल में फैल गई। तेज हवा (100-120 किमी/घंटा) के कारण यह राख लगभग 4500 किलोमीटर दूर भारत तक पहुंच गई। 24 नवंबर की रात यह गुबार पश्चिम भारत के हिस्सों में दाखिल हुआ और फिर उत्तर भारत में फैल गया। IMD के अनुसार, यह बादल 25 नवंबर की शाम तक भारत से बाहर निकलकर चीन की ओर बढ़ जाएगा।

भारत के किन राज्यों पर पड़ा असर?

इंडियामेटस्काई वेदर के मुताबिक राख का बादल पहले गुजरात में दाखिल हुआ। इसके बाद यह राजस्थान, उत्तर-पश्चिम महाराष्ट्र, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और हिमालयी क्षेत्रों तक फैल गया। रात 10 बजे के बाद कई शहरों में आसमान सामान्य से अधिक धुंधला दिखाई दिया।

हैली गुब्बी ज्वालामुखी की राख में क्या-क्या मिला है?

इस राख में शामिल हैं- ज्वालामुखीय राख, सल्फर डाइऑक्साइड गैस, चट्टान और कांच के बारीक कण, यह परत 15,000 से 45,000 फीट की ऊंचाई पर तेजी से आगे बढ़ रही है।

क्या यह स्वास्थ्य के लिए खतरा है?

विशेषज्ञों के अनुसार यह राख जमीन की हवा (AQI) को ज्यादा प्रभावित नहीं करेगी। राख का बादल सतह से बहुत ऊपर है, इसलिए सांस से जुड़ी दिक्कतें बढ़ने का खतरा कम है। स्थानीय प्रदूषण ही फिलहाल असली समस्या बना रहेगा। हालाकि कुछ फ्लाइट्स में देरी या उनके रूट में बदलाव किया गया है।

इथियोपिया में क्या हुआ?

अफार क्षेत्र में स्थित हैली गुब्बी ज्वालामुखी अचानक फट गया। स्थानीय गांव अफदेरा राख और धूल से ढक गया, हालाकि कोई हताहत नहीं हुआ। स्थानीय अधिकारियों ने बताया कि विस्फोट का कोई पिछला रिकॉर्ड नहीं था। लोगों ने तेज धमाके और झटके महसूस किए, जैसे किसी बम का विस्फोट हुआ हो।

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