
बजट 2026 में सीनियर सिटीजन के लिए उम्मीदें (सोर्स-सोशल मीडिया)
Income Tax Relief for Senior Citizens Budget 2026: वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए जाने वाले आगामी केंद्रीय बजट 2026 से देश के करोड़ों वरिष्ठ नागरिकों को बड़ी उम्मीदें हैं। गिरती ब्याज दरों और बढ़ती महंगाई के बीच बुजुर्ग अपनी आय और स्वास्थ्य सुरक्षा को लेकर सरकार की ओर देख रहे हैं। इस बार बजट में वरिष्ठ नागरिकों के लिए आयकर छूट की सीमा बढ़ाने और निवेश योजनाओं पर अधिक लाभ मिलने की संभावना जताई जा रही है। विशेष रूप से पेंशनभोगियों और सावधि जमा (FD) पर निर्भर बुजुर्गों के लिए यह बजट उनके जीवन को वित्तीय रूप से अधिक सुगम बनाने वाला साबित हो सकता है।
वरिष्ठ नागरिक वर्तमान में पुरानी टैक्स व्यवस्था के तहत 3 लाख रुपये तक की मूल छूट सीमा का लाभ उठाते हैं। आगामी बजट में इस सीमा को बढ़ाकर 5 लाख रुपये करने की मांग की जा रही है ताकि बढ़ती लागत के बीच उनके पास अधिक ‘डिस्पोजेबल इनकम’ बच सके। इसके अलावा, नई टैक्स व्यवस्था को बुजुर्गों के लिए और भी आकर्षक बनाने हेतु अतिरिक्त स्लैब बेनिफिट्स की घोषणा भी संभव है।
धारा 80TTB के तहत वरिष्ठ नागरिकों को बैंक और पोस्ट ऑफिस के ब्याज पर मिलने वाली 50,000 रुपये की कटौती को बढ़ाकर 1 लाख रुपये किया जा सकता है। चूंकि अधिकांश बुजुर्गों की आय का मुख्य स्रोत फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) का ब्याज ही है, इसलिए यह बदलाव उन्हें सीधे तौर पर फायदा पहुंचाएगा। टीडीएस (TDS) की सीमा में भी राहत मिलने से बुजुर्गों को रिफंड के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
बढ़ती मेडिकल लागत को देखते हुए धारा 80D के तहत स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम पर मिलने वाली 50,000 रुपये की छूट को बढ़ाकर 75,000 या 1 लाख रुपये किया जा सकता है। सरकार वरिष्ठ नागरिकों के लिए गंभीर बीमारियों के इलाज (80DDB) पर भी अतिरिक्त कटौती देने पर विचार कर रही है। इससे उन बुजुर्गों को बड़ी राहत मिलेगी जिनके पास पर्याप्त बीमा कवर नहीं है और वे अपनी बचत से चिकित्सा खर्च वहन करते हैं।
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सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम (SCSS) की निवेश सीमा को पिछले बजट में 15 लाख से बढ़ाकर 30 लाख किया गया था। इस बार उम्मीद है कि इस स्कीम पर ब्याज दरों को और अधिक आकर्षक बनाया जा सकता है या निवेश की अवधि में कुछ लचीलापन दिया जा सकता है। साथ ही, पेंशन योजनाओं में प्रधानमंत्री वय वंदना योजना (PMVVY) जैसी स्कीमों को दोबारा नए स्वरूप में पेश करने की भी चर्चा है।






