
डॉक्टरों में नशे की लत (AI Generated Image)
FAIMA NGO India: एमबीबीएस के बाद नीट की तैयारी करने वाले डॉक्टर, निवासी डॉक्टर, वरिष्ठ निवासी डॉक्टर सहित वरिष्ठ डॉक्टर में काम के बोझ से जूझ रहे हैं। काम का तनाव मानसिक रूप से थका देता है। इस हालत में दिमागी आराम के लिए नशे का सहारा लेते हैं। बाद में यही नशा लत बन जाती है। यह खुलासा फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (फेमा) की पड़ताल में सामने आया है।
इसी समस्या को देखते हुए फेमा ने मेंटल हेल्थ हेल्पलाइन शुरू की है। अब इस हेल्पलाइन के साथ नशामुक्ति अभियान को भी जोड़ा गया है। देश भर के निवासी डॉक्टरों सहित वरिष्ठ डॉक्टरों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए काउंसिलिंग करने वाली फेमा ने 24 घंटे की हेल्पलाइन सेवा शुरू की है। हेल्पलाइन के माध्यम से अब तक 300 से अधिक पीड़ित डॉक्टरों की काउंसिलिंग की गई जिसके परिणाम भी सकारात्मक आये हैं।
फेमा के अध्ययन में यह सामने आया है कि सबसे अधिक तनाव नीट पीजी की तैयारी करने वाले डॉक्टरों में देखा गया है। इसके बाद विविध मेडिकल कॉलेजों के निवासी डॉक्टर काम के बोझ से ग्रसित हैं। काम का कोई भी समय निश्चित नहीं होने से अक्सर तनाव में रहते हैं।
फेमा ने पाया कि कई डॉक्टर अपनी समस्याओं को खुलकर नहीं रख पाते। डॉक्टर होने के कारण उनमें हिचकिचाहट बनी रहती है लेकिन फेमा की हेल्पलाइन पर केवल निवासी डॉक्टर ही नहीं बल्कि कई वरिष्ठ डॉक्टरों ने भी संपर्क किया है। इन डॉक्टरों में नशे की वजह काम का बोझ सहित परिवारिक समस्याएं भी हैं।
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मानसिक तनाव, कार्यस्थल पर वर्कलोड, नींद की समस्या, परीक्षा या करिअर से जुड़ा दबाव नशे की ओर आकर्षित करता है। फेमा के समन्वयक डॉ. सजल बंसल ने बताया कि नागपुर मेडिकल हब बन रहा है। बड़ी संख्या में मेडिकल स्टूडेंट्स, निवासी डॉक्टर, इंटर्न कार्यरत हैं। उन पर विविध कारणों से दबाव बना रहता है।
काम के दबाव के कारण पारिवारिक समस्याएं बढ़ती हैं। सोशल डेट भी कम हो जाता है। हेल्पलाइन पर नाम गोपनीय रखे जाने की वजह से ही अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है। नशे की वजह से स्वास्थ्य पर असर पड़ता है। धीरे-धीरे यह समस्या गंभीर होने लगती है। यदि समय रहते ही काउंसिलिंग की गई तो समस्या के समाधान तक पहुंचा जा सकता है।






