लासलगांव के अंगूर किसानों पर मौसम की मार, बढ़ा फसल पर बीमारी का खतरा; किसानों की टूटी कमर

Lasalgaon Grape Farmers: नासिक जिले में ठंड और लगातार बादल छाए रहने से अंगूर की फसल पर बीमारी का खतरा बढ़ गया है। दवाइयों व श्रम लागत बढ़ने से किसानों की आर्थिक चिंता गहराई है।
Grape farmers in Lasalgaon hit hard by adverse weather, increasing the risk of crop diseases; farmers' livelihoods devastated
प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया AI )
Published on
Updated on

Nashik Grape Crop Damage: लासलगांव अंगूर की उत्पादन के लिए प्रसिद्ध नासिक जिले में अंगूर किसानों की समस्याएं बढ़ती जा रही हैं। किसान आशंका जता रहे हैं कि पिछले कुछ दिनों से जारी भीषण ठंड और लगातार बादल छाए रहने से अंगूर की फसल पर सीधा असर पड़ेगा।

ठंडे और बादल छाए रहने के साथ-साथ वातावरण में नमी बढ़ने से अंगूर की फसलों में कई तरह की बीमारियों के फैलने की संभावना बढ़ गई है। लेट ब्लाइट, स्कैब और ब्राउन रॉट जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ने के कारण किसानों को कीटनाशक छिड़काव और अन्य निवारक उपाय करने पड़ रहे हैं।

इसके चलते महंगी दवाओं, कीटनाशकों और श्रम की लागत बढ़ रही है उत्पादन लागत में काफी वृद्धि हुई है। और बेमौसम बारिश से पहले ही हो चुका है नुकसान : मानसून के बाद हुई भारी बारिश से अंगूर के बागों को व्यापक नुकसान पहुंचा है, जिससे अंगूर उत्पादकों की आर्थिक परेशानियां और बढ़ गई हैं।

वे अब बाजार में अस्थिरता, बढ़ती उत्पादन लागत और प्राकृतिक आपदाओं का सामना कर रहे हैं। कई किसानों ने अंगूर के बाग लगाने के लिए बैंकों से ऋण लिया है, और आशंका है कि मौजूदा मौसम उत्पादन को प्रभावित करता है तो उन्हें भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ेगा।

पिछले दो-तीन वर्षों से अंगूरों को अपेक्षित बाजार मूल्य नहीं मिल रहा है। इस वर्ष भारी बारिश के कारण क्षेत्र के 70 प्रतिशत अंगूर के बाग क्षतिग्रस्त हो गए हैं। बड़ी मुश्किल से बागों को बचाया गया और फसल भी अच्छी हुई। हालांकि, अब ठंड और बादल छाए रहने के कारण बागों में अंगूरों का बढ़ना फिर से रुक गया है। साथ ही, बीमारियों के प्रकोप के कारण कीटनाशकों के छिड़काव पर अतिरिक्त खर्च करना पड़ रहा है। इसलिए, केंद्र और राज्य सरकारों को अंगूर किसानों को प्रति एकड़ 50,000 रुपये से 1 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता प्रदान करनी चाहिए।

अंगूर उत्पादक किसान, निफाड- अनिल शिंदे

50 हजार प्रति एकड़ की हो रही है मांग

  • अंगूर उत्पादक किसानों की कठिनाइयों को ध्यान में रखते हुए राज्य और केंद्र सरकारों से तत्काल सहायता की मांग जोर पकड़ रही है।
  • निफाड तालुका के किसान संगठन और अंगूर उत्पादक मांग कर रहे हैं कि प्रत्येक किसान को कम से कम 50,000 रुपये से 1 लाख रुपये प्रति एकड़ की वित्तीय सहायता प्रदान की जाए।
  • यदि समय पर सहायता नहीं मिली, तो कई किसानों को वित्तीय संकट का सामना करना पड़ सकता है और सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की अपेक्षा की जाती है।
Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com