बजट 2026 पर केरल को अनदेखा? वित्त मंत्री बालगोपाल ने बंदरगाह और रेल में नजरअंदाज किए जाने पर दी प्रतिक्रिया

Vizhinjam Port cargo corridor funds: केरल के वित्त मंत्री ने केंद्रीय बजट पर उठाए सवाल। कृषि सब्सिडी में कटौती और केरल की रेल-बंदरगाह परियोजनाओं की अनदेखी पर जताया कड़ा विरोध।
K.N. Balagopal Budget reaction
वित्त मंत्री के. एन. बालगोपाल (फोटो-सोशल मीडिया)
Published on
Updated on

K.N. Balagopal Budget reaction: केंद्रीय बजट 2026-27 के पेश होने के बाद केरल सरकार ने केंद्र की आर्थिक नीतियों पर तीखा हमला बोला है। केरल के वित्त मंत्री के. एन. बालगोपाल ने रविवार को संवाददाता सम्मेलन में कहा कि यह बजट भारतीय अर्थव्यवस्था में छाई सुस्ती और केंद्र सरकार के पास जरूरी संसाधनों की भारी कमी को स्पष्ट रूप से उजागर करता है।

अंतरराष्ट्रीय दबाव में तैयार कर नीतियां?

बालगोपाल ने आरोप लगाया कि बजट में प्रस्तावित कर सुधार घरेलू अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के बजाय अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक हितों को साधने के लिए किए गए हैं। उन्होंने दावा किया कि कराधान के मोर्चे पर जो भी सिफारिशें की गई हैं, वे यूरोपीय संघ (EU) के साथ व्यापार समझौतों और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सख्त शुल्क (टैरिफ) नीतियों के दबाव का परिणाम हैं। मंत्री के अनुसार, बजट देश हित को प्राथमिकता देने के बजाय वैश्विक शक्तियों को खुश करने की कोशिश ज्यादा लगता है।

बुनियादी क्षेत्रों के बजट में कटौती पर चिंता

केरल के वित्त मंत्री ने कहा कि बजट के आंकड़ों को गहराई से देखने पर पता चलता है कि कई महत्वपूर्ण सामाजिक और बुनियादी क्षेत्रों के खर्च में कटौती की गई है। उन्होंने विशेष रूप से कृषि और खाद्य सब्सिडी में की गई कमी पर चिंता जताई। बालगोपाल ने कहा कि स्वास्थ्य, शिक्षा, और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी जैसे भविष्योन्मुखी क्षेत्रों के आवंटन में भी कमी की गई है, जो अर्थव्यवस्था के दूरगामी विकास के लिए हानिकारक साबित हो सकता है।

केरल की प्रमुख मांगों की अनदेखी

मंत्री ने केंद्र सरकार पर केरल के प्रति भेदभावपूर्ण रवैया अपनाने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि विझिंजम बंदरगाह के विकास के लिए अतिरिक्त निधि और वहाँ से एक समर्पित कार्गो कॉरिडोर बनाने की राज्य की चिरलंबित मांग पर बजट में कोई ध्यान नहीं दिया गया। साथ ही, केरल की हाई-स्पीड रेल संपर्क की मांग को भी नजरअंदाज कर दिया गया, जबकि केंद्र ने अन्य राज्यों के लिए इसी तरह की परियोजनाओं को हरी झंडी दे दी है।

कछुआ संरक्षण बनाम जनहित

बजट में कुछ विशेष परियोजनाओं के उल्लेख पर तंज कसते हुए बालगोपाल ने कहा कि इस बार कछुआ संरक्षण के लिए एक परियोजना का जिक्र किया गया है, लेकिन यह पूरी तरह अस्पष्ट है कि ऐसी परियोजनाओं से आम आदमी के जीवन में क्या गुणात्मक सुधार आएगा। उन्होंने अंत में कहा कि संकट के समय अक्सर बजट अनुमान पूरे नहीं हो पाते, लेकिन इस बार भारतीय अर्थव्यवस्था में ठहराव इतना साफ है कि वह बजट के हर पन्ने पर दिखाई दे रहा है।

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com