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चीन के इस रेयर अर्थ ने भारत की बढ़ाई परेशानी, ऑटो इंडस्ट्री पर छाया संकट का बादल
रेयर अर्थ की सप्लाई बंद होने से ऑटो निर्माता कंपनियों अपना मैन्यूफैक्चरिंग नहीं कर पाएंगी। इस साल के अप्रैल महीने में चीन ने इन दुर्लभ खनीजों और मैग्नेट की सप्लाई पर पूरी तरह से बैन लगा दिया है।
- Written By: मनोज आर्या

प्रतीकात्मक तस्वीर
नई दिल्ली: भारत के पड़ोसी मुल्क चीन ने अपने यहां से छह रेयर अर्थ यानी दुर्लभ मैग्नेट की सप्लाई को बंद कर दिया है। चीन के इस फैसले ने दुनिया के अन्य देशों की परेशानी बढ़ा दी है। उसके इस कदम से भारतीय ऑटो सेक्टर पर संकट के बादल छा गए हैं। चीन हमेशा से ही बड़ी मात्रा में इन दुर्लभ खनिजों की सप्लाई दूसरे देशों में करता रहा है। रेयर अर्थ की सप्लाई बंद होने से ऑटो निर्माता कंपनियों अपना मैन्यूफैक्चरिंग नहीं कर पाएंगी। इस साल के अप्रैल महीने में चीन ने इन दुर्लभ खनीजों और मैग्नेट की सप्लाई पर पूरी तरह से बैन लगा दिया है। इससे भारत में भी ऑटो इंडस्ट्री के साथ अन्य क्षेत्रों को बड़ी समस्या से जूझना पड़ रहा है।
आपको बताते चलें कि इस साल चीन की ओर से चार अप्रैल को 35 रेयर अर्थ के इंपोर्ट करने वालों को बीजिंग ने सप्लाई देने पर पाबंदी लगा दी है। चीनी सरकार ने रेयर अर्थ के लिए इन इंपोर्टर्स को आवेदनों की मंजूरी नहीं दी है। इस हालत में कंपनी के पास दोबारा आवेदन करने का विकल्प है। इन सभी के अलावा भी रेयर अर्थ का इंपोर्ट चीन से जो भी कंपनियां करती हैं उनमें कॉन्टिनेंटल, बॉश इंडिया जैसी कंपनी शामिल हैं।
कहां होता है रेयर अर्थ का इस्तेमाल?
बता दें कि इन रेयर अर्थ की जरूरत हथियार बनाने से लेकर क्लीनटेक तक में किया जाता है। चीन के इस कदम से अगर कोई उद्योग सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है तो वो इलेक्ट्रिक वाहन इंडस्ट्री है। चीन के ऊपर अन्य देशों की निर्भरता कितनी है इसका अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि वाहनों के उत्पादन में लगने वाले दुनिया के 90 प्रतिशत रेयर अर्थ मैग्नेट्स का प्रोडक्शन चीन ही करता है।
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रेयर अर्थ में चीन का दबदबा कैसे?
दरअसल, चीन ने रेयर अर्थ माइनिंग और रिफाइनिंग को एक स्ट्रेटिजिकल इंडस्ट्री के रूप में तैयार किया है। साल 2000 के शुरुआत तक दुनिया के कई देश रेयर अर्थ को लेकर चीन के सामने प्रतिद्वंदी देश बन रहे थे। लेकिन रेयर अर्थ के लीडिंग प्रोड्यूसर में से एक कैलिफोर्निया के माउंटेन के पास की माइन को साल 2002 में पर्यावरण और आर्थिक दबाव की वजह से बंद करना पड़ा। इसी के कारण से चीन न केवल सिर्फ रेयर अर्थ मैग्नेट के मामले में प्रमुख सप्लायर बन गया बल्कि वो बैटरी और इलेक्ट्रोनिक्स, मैग्नेट और अन्य उपयोगी सामान बदलने वाली ग्लोबल रिफाइनरी के रूप में खुद को स्थापित कर लिया।
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रेयर अर्थ की उपलब्धता पर काम कर रहा भारत
चीन के बढ़ते इस दबदबे के बीच भारत ने रेयर अर्थ की उपलब्धता अपने यहां बढ़ाने पर जोर देना शुरू कर दिया। इसके माइनिंग के नियमों में काफी तेजी से नए बदलाव किए जा रहे हैं। पिछले दिन केंद्रीय कॉमर्स एवं इंडस्ट्री मिनिस्टर पीयूष गोयल ने जर्मनी में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा था कि रेयर अर्थ मिनरल्स से हासिल किए जाने वाले मैग्नेट को लेकर भारत अपने अलग-अलग विकल्पों पर काम कर रहा है।
India auto industry is facing more problems due to chinas ban on rare earth supply
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